लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath 22 फरवरी से सिंगापुर और जापान के दौरे पर रवाना होने वाले हैं। इस यात्रा का उद्देश्य प्रदेश में बड़े पैमाने पर विदेशी निवेश आकर्षित करना और उत्तर प्रदेश को औद्योगिक हब के रूप में स्थापित करना बताया जा रहा है। सरकार का दावा है कि यह दौरा अरबों डॉलर के निवेश की संभावनाएं लेकर आ सकता है और राज्य को देश के अगले औद्योगिक पावरहाउस के रूप में प्रस्तुत करने की रणनीति का हिस्सा है।
हालांकि, मुख्यमंत्री के इस विदेश दौरे पर सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री Akhilesh Yadav ने इस यात्रा को लेकर तंज कसा है।
‘क्योटो भी हो आइए’—अखिलेश की नसीहतअखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट साझा करते हुए मुख्यमंत्री का नाम लिए बिना निशाना साधा। उन्होंने लिखा कि जब जापान जा ही रहे हैं तो क्योटो शहर भी देख लें, ताकि यह समझ सकें कि प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र काशी को क्योटो जैसा क्यों नहीं बनाया जा सका या उसकी विरासत किस तरह प्रभावित हुई।
उन्होंने यह भी कहा कि जापान से विरासत संरक्षण और शहरी विकास का सकारात्मक अनुभव लेकर लौटना चाहिए। उनके बयान में यह संकेत भी था कि मौजूदा कार्यकाल के अंतिम चरण में इस तरह के अध्ययन से कितना व्यावहारिक लाभ होगा, इस पर सवाल उठता है।
अखिलेश ने अपने पोस्ट में यह भी टिप्पणी की कि यदि यह यात्रा ‘मनसुख-पर्यटन’ नहीं बल्कि गंभीर अध्ययन का हिस्सा है, तो कम से कम सच्चाई स्वीकार कर जनता के सामने रखनी चाहिए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि विदेश में होने वाले विशेष अध्ययनों का लाभ केवल व्यक्तिगत स्तर पर न रह जाए, बल्कि प्रदेश के हित में भी साझा हो।
22 फरवरी से शुरू होगा दौराजानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री 22 फरवरी से जापान की यात्रा पर रहेंगे। इस दौरान वे जापान की अत्याधुनिक मैग्लेव ट्रेन में भी सफर करेंगे, जो लगभग 600 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती है। यह ट्रेन पटरियों के ऊपर हवा में तैरते हुए चलने की तकनीक पर आधारित है। मुख्यमंत्री वहां की उन्नत रेल प्रणाली और भविष्य की परिवहन तकनीकों का प्रत्यक्ष अनुभव लेंगे।
निवेश और औद्योगिक प्रस्तावों पर फोकसजापान और सिंगापुर यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री कई निवेश प्रस्ताव प्रस्तुत करेंगे। सूत्रों के अनुसार, ग्रेटर नोएडा के पास ‘जापान सिटी’ और ‘सिंगापुर सिटी’ विकसित करने की योजना भी विदेशी निवेशकों के सामने रखी जाएगी। इसके तहत सेक्टर 5ए और सेक्टर 7 में करीब 500 एकड़ भूमि औद्योगिक शहरों के विकास के लिए प्रस्तावित की जा सकती है।
सरकार का कहना है कि यह दौरा आधुनिक परिवहन अवसंरचना, औद्योगिक विस्तार और वैश्विक निवेश को आकर्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। वहीं विपक्ष इस यात्रा की उपयोगिता और समय को लेकर सवाल उठा रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा प्रदेश की राजनीति में और गरमाने के आसार हैं।