राजस्थान में 12वीं की किताब 'आजादी के बाद स्वर्णिम इतिहास' को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। यह किताब बच्चों को क्या इतिहास सिखा रही है, इसी पर बहस छिड़ गई है। किताब में गांधी-नेहरू परिवार और कांग्रेस के प्रधानमंत्रियों पर भरपूर जानकारी है, लेकिन बीते 11 वर्षों से देश के प्रधानमंत्री रहे नरेंद्र मोदी पर बस नाममात्र का जिक्र किया गया है। इतने लंबे कार्यकाल के बाद भी किताब में उनके योगदान की उपेक्षा देखकर राज्य सरकार ने यह फैसला किया है कि यह किताब स्टूडेंट्स को नहीं पढ़ाई जाएगी। सरकार का कहना है कि किसी भी किताब को मंजूरी देने से पहले समीक्षा बेहद जरूरी है और यह किताब मंजूरी के बिना स्टूडेंट्स तक नहीं पहुंचनी चाहिए।
कांग्रेस के शासनकाल से पढ़ाई जा रही है ये किताबेंकक्षा 11 और 12 में ‘भाग-1’ और ‘भाग-2’ नाम से ये किताबें कांग्रेस शासनकाल से चली आ रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों और पाठ्यक्रम समिति ने बिना किसी बदलाव के केवल 2025 का लेबल लगाकर पुराने संस्करण को फिर से प्रिंट करवा दिया। भाग-2 को लेकर विवाद सबसे ज्यादा है, क्योंकि इसके कवर पर इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की तस्वीरें छपी हैं, जिससे किताब के झुकाव पर सवाल उठते हैं।
नेहरू से मनमोहन तक, तस्वीरें ही तस्वीरें, पर मोदी नदारदकिताब में नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और मनमोहन सिंह की कुल 15 से ज्यादा तस्वीरें मौजूद हैं। यहां तक कि सोनिया गांधी और अशोक गहलोत की तस्वीरें भी जगह पा गई हैं। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक भी तस्वीर इस किताब में नहीं है। इतना ही नहीं, संयोजक के प्राक्कथन में राजीव गांधी के योगदान का 80% से अधिक वर्णन है, जबकि वाजपेयी और मोदी जैसे नेताओं के योगदान की चर्चा भी न के बराबर है।
मंत्री बोले– बच्चों को नहीं पढ़ाएंगे ऐसी पक्षपाती किताबराजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने मीडिया से बातचीत में साफ कहा कि इस किताब में सिर्फ कांग्रेस को महिमामंडित किया गया है। उन्होंने कहा, “ऐसा लगता है जैसे देश में अब तक सब कुछ कांग्रेस ने ही किया हो। इसमें लोकतंत्र की हत्या करने वालों की गाथाएं लिखी गई हैं, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी जैसे जननायक की उपेक्षा की गई है। हम ऐसी किताब को अपने बच्चों को नहीं पढ़ाएंगे।”
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि भैरोंसिंह शेखावत और वसुंधरा राजे जैसे वरिष्ठ नेताओं के योगदान को आखिर क्यों भुला दिया गया?
बोर्ड का जवाब– सरकार की मंजूरी से ही छपी है किताबराजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के सचिव कैलाश चंद शर्मा ने बताया कि बोर्ड द्वारा तैयार की गई किताबों को सरकार की अनुमति मिलने के बाद ही प्रकाशित किया जाता है। सरकार जैसा आदेश देगी, उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। वहीं पुस्तक मंडल के सीईओ मनोज कुमार ने कहा कि हमारा काम केवल किताबें छापने और वितरित करने तक सीमित है। उनमें क्या छपा है, इसकी जिम्मेदारी हमारी नहीं है।