अशोक गहलोत का बड़ा दावा- 'इंदिरा गांधी आज होतीं तो BJP पर लगा देतीं प्रतिबंध'

राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बार फिर केंद्र की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी पर जोरदार हमला बोला है। रविवार को एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने न केवल बीजेपी की राजनीति पर सवाल उठाए, बल्कि विपक्षी दलों को भी एकजुट होकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के नेतृत्व को स्वीकार करने की सलाह दी। गहलोत ने कहा कि देश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में विपक्ष को स्पष्ट रणनीति के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है और राहुल गांधी को विपक्षी गठबंधन का प्रमुख चेहरा बनाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है जब देश के सामने राजनीतिक मुकाबला साफ तौर पर दिखाई देना चाहिए। उनके अनुसार, जनता को यह स्पष्ट संदेश मिलना चाहिए कि राष्ट्रीय स्तर पर लड़ाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी के नेतृत्व वाले विपक्ष के बीच है। गहलोत ने कहा कि विपक्षी गठबंधन को राहुल गांधी के नेतृत्व को खुलकर स्वीकार करना चाहिए ताकि जनता के सामने एक मजबूत विकल्प प्रस्तुत किया जा सके।

'कांग्रेस बनाम सब' नहीं, 'बीजेपी बनाम सब' होना चाहिए मुकाबला

अशोक गहलोत ने कहा कि वर्तमान दौर में राजनीतिक लड़ाई का स्वरूप बदल चुका है। उनके मुताबिक अब मुकाबला कांग्रेस और अन्य दलों के बीच नहीं, बल्कि बीजेपी और पूरे विपक्ष के बीच होना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत रखने के लिए सभी विपक्षी दलों का एक मंच पर आना जरूरी है।

इसी दौरान उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का उल्लेख करते हुए एक बड़ा बयान दिया। गहलोत ने दावा किया कि यदि आज इंदिरा गांधी जीवित होतीं और सत्ता में होतीं, तो धर्म के आधार पर राजनीति करने वाले दलों के खिलाफ कठोर कदम उठातीं। उन्होंने कहा कि संविधान धर्म के नाम पर राजनीति की अनुमति नहीं देता और राजनीतिक दलों को संवैधानिक मर्यादाओं के भीतर रहकर काम करना चाहिए।
इंदिरा गांधी के दौर का हवाला देकर साधा निशाना

जयपुर में आयोजित एक सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए गहलोत ने कहा कि कांग्रेस ने अपने लंबे राजनीतिक इतिहास में कई बार एकजुट विपक्ष का सामना किया है। उन्होंने कहा कि आज भी बीजेपी के मुकाबले एक व्यापक विपक्षी मोर्चे की आवश्यकता है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इंडिया गठबंधन को और मजबूत बनाने की जरूरत है और इसमें सबसे बड़ी जिम्मेदारी कांग्रेस की बनती है क्योंकि गठबंधन में वही सबसे बड़ा राजनीतिक दल है। उन्होंने कहा कि यदि विपक्ष को मजबूत विकल्प के रूप में उभरना है तो कांग्रेस को नेतृत्वकारी भूमिका निभानी होगी और सहयोगी दलों के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करना होगा।

संजय राउत के सुझाव का किया समर्थन

हाल ही में शिवसेना (उद्धव गुट) के नेता संजय राउत ने बयान दिया था कि कांग्रेस से अलग होकर बने दलों को दोबारा कांग्रेस के साथ आ जाना चाहिए। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अशोक गहलोत ने कहा कि वह इस विचार से सहमत हैं।

उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले भी सार्वजनिक रूप से यह राय रखी है कि इंडिया गठबंधन को राहुल गांधी के नेतृत्व को स्वीकार करना चाहिए। गहलोत के अनुसार, विपक्ष की एकजुटता और मजबूत नेतृत्व ही आगामी राजनीतिक चुनौतियों का प्रभावी जवाब बन सकता है।

राहुल गांधी को बताया निडर और मुखर नेता

कांग्रेस नेता ने राहुल गांधी की कार्यशैली की सराहना करते हुए उन्हें साहसी और बेखौफ नेता बताया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी लगातार संसद के भीतर और बाहर देश से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को उठा रहे हैं और जनता को संभावित चुनौतियों के प्रति आगाह कर रहे हैं।

गहलोत ने कहा कि राहुल गांधी ऐसे नेता हैं जो कठिन सवाल पूछने से पीछे नहीं हटते। उन्होंने दावा किया कि राहुल राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधे सवाल करते हैं, लेकिन उन सवालों के जवाब अक्सर नहीं मिलते। उनके अनुसार, राहुल गांधी विपक्ष की आवाज को मजबूती से सामने रखने का काम कर रहे हैं।

युवाओं से राजनीति में सक्रिय भागीदारी की अपील

अपने संबोधन के दौरान अशोक गहलोत ने युवाओं और छात्रों को भी राजनीति में सक्रिय रूप से शामिल होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को मजबूत बनाने में युवा पीढ़ी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है और उन्हें राजनीतिक प्रक्रियाओं से दूर नहीं रहना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अपने लगभग पांच दशकों के राजनीतिक जीवन में उन्होंने वर्तमान जैसी परिस्थितियां पहले कभी नहीं देखीं। उनके अनुसार यदि देश ने समय रहते सही दिशा नहीं चुनी, तो आने वाले वर्षों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। उन्होंने युवाओं से विभिन्न विचारधाराओं को समझने और उनका अध्ययन करने की अपील की।

लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव का लगाया आरोप

गहलोत ने केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक संस्थाओं को प्रभावित करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि देश की कई महत्वपूर्ण संस्थाएं अभूतपूर्व दबाव का सामना कर रही हैं और हालात लोगों की कल्पना से कहीं अधिक गंभीर हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि न्यायपालिका, जांच एजेंसियों और नौकरशाही सहित कई संस्थानों पर दबाव महसूस किया जा सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और आयकर विभाग जैसी एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं के खिलाफ राजनीतिक हथियार के रूप में किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए सभी नागरिकों, विशेषकर युवाओं को जागरूक रहना होगा और देश के राजनीतिक भविष्य को लेकर गंभीरता से सोचने की आवश्यकता है।