सोमवार को सर्वोच्च न्यायालय में कार्यवाही के दौरान उस समय तनाव का माहौल बन गया जब एक वकील ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी.आर. गवई पर हमला करने का प्रयास किया। आरंभिक सूचना के अनुसार, बहस के बीच में ही, उस वकील ने मंच की ओर तेज़ी से कदम बढ़ाए और अपना जूता निकालकर फेंकने की चेष्टा की। हालांकि, वहाँ मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए उसे समय रहते रोक लिया और वह अपने मंसूबे में कामयाब नहीं हो पाया।
सुरक्षा बल की त्वरित कार्रवाई और वकील का विरोध प्रदर्शनसुरक्षाकर्मियों ने तुरंत हरकत में आते हुए उस विघटनकारी वकील को अदालत कक्ष से बाहर निकाल दिया। इस दौरान वह ज़ोर-ज़ोर से चिल्ला रहा था, “हम सनातन के अपमान को बर्दाश्त नहीं करेंगे।” इस पूरी अप्रिय घटना के दौरान CJI गवई ने असाधारण शांति और संयम बनाए रखा। उन्होंने शांत स्वर में कहा, हम इस तरह की हरकतों से विचलित नहीं होते। आप सभी कृपया अपनी दलीलें जारी रखें।
विष्णु प्रतिमा से जुड़े विवादित बयान की पृष्ठभूमियह दुर्भाग्यपूर्ण घटना संभवतः खजुराहो में भगवान विष्णु की एक खंडित मूर्ति से जुड़े एक पुराने मामले में मुख्य न्यायाधीश द्वारा की गई एक विवादास्पद टिप्पणी से उपजी है। उस टिप्पणी पर कई हिंदूवादी संगठनों ने कड़ा विरोध व्यक्त किया था। हालाँकि, सुरक्षा स्टाफ इस अप्रिय वारदात से पूरी तरह इनकार कर रहा है। वे केवल इतना कह रहे हैं कि अदालत कक्ष में एक व्यक्ति शोर मचा रहा था, जिसे बाहर कर दिया गया है।
मुख्य न्यायाधीश गवई की विवादास्पद टिप्पणी का ब्यौराविवाद तब शुरू हुआ जब मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने एक व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की थी। याचिका में खजुराहो में भगवान विष्णु की सिर कटी मूर्ति को पुनर्स्थापित करने की मांग की गई थी। CJI गवई ने याचिकाकर्ता से कहा था, जाओ और देवता से ही कुछ करने के लिए कहो। आप कहते हैं कि आप भगवान विष्णु के अनन्य भक्त हैं, तो जाओ और अभी प्रार्थना करो। यह एक पुरातत्व स्थल है और इसके लिए एएसआई (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) से अनुमति आदि लेना आवश्यक है। हमें खेद है। उनके इस कथन के बाद सोशल मीडिया पर उनके विरोध में बाढ़ आ गई थी, और बड़ी संख्या में लोगों ने उनके इस्तीफे की मांग भी की थी।
मुख्य न्यायाधीश की स्पष्टीकरण और सर्वधर्म समभाव का आश्वासनबढ़ते विवाद को देखते हुए, मुख्य न्यायाधीश ने बाद में स्पष्ट किया था कि उनकी टिप्पणियों को सोशल मीडिया पर गलत तरीके से प्रस्तुत किया जा रहा है। CJI गवई ने कहा, किसी ने मुझे बताया कि मेरे द्वारा की गई टिप्पणियों को सोशल मीडिया पर एक विशिष्ट और भ्रामक तरीके से प्रसारित किया गया है... मैं सभी धर्मों के प्रति सम्मान का भाव रखता हूँ। उन्होंने अपनी ओर से किसी भी धार्मिक अपमान की मंशा से इनकार किया।