ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य तनाव अब और अधिक तीखा होता नजर आ रहा है। रविवार को ईरान ने एक बार फिर बड़ा दावा करते हुए कहा कि उसकी सैन्य इकाइयों ने इस्फहान क्षेत्र में अमेरिका के एक और एयरक्राफ्ट को मार गिराया है। यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब पिछले 36 घंटों के भीतर अमेरिकी सेना को कई मोर्चों पर नुकसान झेलने की खबरें सामने आ चुकी हैं, जिससे इस संघर्ष की गंभीरता और बढ़ गई है।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के मुताबिक, इस्फहान परमाणु सुविधा के आसपास अमेरिकी गतिविधियां बढ़ने के बाद यह कार्रवाई की गई। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस ऑपरेशन में अमेरिकी सी-130 सपोर्ट विमान को निशाना बनाकर गिराया गया। इससे पहले भी इसी इलाके में एक एमक्यू-9 ड्रोन को मार गिराने का दावा किया गया था, जिससे संकेत मिलते हैं कि यह क्षेत्र इस समय सैन्य टकराव का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
इससे पहले के घटनाक्रम पर नजर डालें तो ईरान ने दावा किया था कि उसने अमेरिका के कई अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों को भी निशाना बनाया है। इनमें एक एफ-35, दो एफ-15, एक एफ-16 और एक ए-10 विमान के साथ-साथ हेलीकॉप्टर, एमक्यू-9 ड्रोन और क्रूज मिसाइलें शामिल बताई गई थीं। इन घटनाओं के दौरान दो अमेरिकी पायलटों को इजेक्ट करना पड़ा था, जिनमें से एक को पहले ही सुरक्षित निकाल लिया गया था, जबकि दूसरे को बाद में खोज लिया गया।
इस्फहान परमाणु केंद्र के पास हुई ताजा कार्रवाई को लेकर ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी आईआरएनए ने भी जानकारी साझा की। एजेंसी के अनुसार, अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से इस क्षेत्र को निशाना बनाने की कोशिश की थी। इसके जवाब में ईरान के कानून प्रवर्तन कमांड (फ़राज़ा) के विशेष बलों ने जवाबी कार्रवाई करते हुए अमेरिकी सी-130 विमान को नष्ट कर दिया। यह घटनाक्रम इस बात की ओर इशारा करता है कि दोनों पक्षों के बीच सैन्य गतिविधियां लगातार तेज हो रही हैं।
इसी बीच यह भी सामने आया है कि अमेरिका और इजरायल ने अंतरराष्ट्रीय चेतावनियों को नजरअंदाज करते हुए इस्फहान परमाणु केंद्र पर एक बार फिर हमला किया। बताया जा रहा है कि रविवार को किया गया यह हमला इस क्षेत्र पर पांचवीं बार की गई सैन्य कार्रवाई है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) ने पहले ही ऐसे हमलों से बचने की अपील की थी, लेकिन इसके बावजूद कार्रवाई जारी रही।
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इससे पहले ही इस्फहान पर हो रहे हमलों को लेकर गंभीर चिंता जताई थी। उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि इस परमाणु सुविधा को नुकसान पहुंचता है तो पूरे मध्य-पूर्व क्षेत्र में रेडियोएक्टिव विकिरण फैल सकता है। उन्होंने सऊदी अरब, यूएई, बहरीन, ओमान और कतर जैसे देशों पर इसके संभावित दुष्प्रभावों को लेकर भी आगाह किया था।
इन तमाम घटनाओं के बीच यह साफ होता जा रहा है कि ईरान और अमेरिका के बीच टकराव अब एक व्यापक क्षेत्रीय संकट का रूप ले सकता है। लगातार हो रही सैन्य कार्रवाइयों और बढ़ते दावों-प्रतिदावों के बीच वैश्विक समुदाय की चिंता भी गहराती जा रही है।