महाराष्ट्र में फिर बढ़ी महायुति की खींचतान? फडणवीस ने शिवसेना के मंत्री के फैसले में किया बदलाव

महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ महायुति में एक बार फिर अंदरूनी मतभेद की चर्चा तेज हो गई है। मामला मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के बीच फैसले को लेकर सामने आया है। संदर्भ सामग्री के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों से जुड़े एक फैसले में बदलाव किया है, जिसके बाद शिवसेना खेमे में नाराजगी बताए जाने लगी है।

मामला ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए बुनियादी मराठी सीखने की समयसीमा से जुड़ा है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने ऐसे चालकों को मराठी सीखने के लिए एक साल की अतिरिक्त मोहलत दी है। सूत्रों के मुताबिक, इस फैसले से पहले परिवहन मंत्री को विश्वास में नहीं लिया गया, जिसके कारण शिवसेना के कुछ मंत्री नाराज बताए जा रहे हैं।

कैबिनेट में फैसलों को लेकर उठे सवाल

नाराज मंत्रियों की ओर से सवाल उठाया जा रहा है कि यदि मुख्यमंत्री को महत्वपूर्ण फैसले अकेले ही लेने हैं, तो कैबिनेट बैठकों की भूमिका क्या रह जाती है। संदर्भ सामग्री में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि पिछले करीब डेढ़ साल में शिवसेना और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) से जुड़े मंत्रियों को विश्वास में लिए बिना कई फैसले लिए जाने को लेकर असंतोष रहा है।

इसी वजह से महाराष्ट्र सरकार के भीतर मंत्रियों और मुख्यमंत्री के बीच समन्वय को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि, उपलब्ध सामग्री में नाराजगी जताने वाले किसी मंत्री का नाम या उनकी ओर से कोई प्रत्यक्ष बयान नहीं दिया गया है।

मराठी भाषा के मुद्दे पर भी चर्चा

ऑटो-टैक्सी चालकों को मराठी सीखने के लिए अतिरिक्त समय देने के फैसले का असर भाषा से जुड़ी राजनीति पर पड़ने की संभावना को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। संदर्भ सामग्री में यह सवाल उठाया गया है कि क्या इस फैसले के जरिए उत्तर भारतीयों को राहत देने की कोशिश की गई है और क्या इससे मराठी मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो सकती है।

हालांकि, इस फैसले के पीछे मुख्यमंत्री की मंशा या किसी चुनाव को ध्यान में रखे जाने की पुष्टि संदर्भ सामग्री में नहीं है। इसलिए इसे फिलहाल उठाए गए राजनीतिक सवालों और अटकलों के रूप में ही देखा जा रहा है।

मंत्रिमंडल के अधिकारों को लेकर भी असंतोष

सूत्रों के हवाले से यह भी बताया गया है कि मुख्यमंत्री द्वारा अधिसूचना के जरिए मंत्रिमंडल के सभी अधिकार अपने पास केंद्रित किए जाने को लेकर महायुति के कुछ मंत्री नाराज बताए जा रहे हैं।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि मुख्यमंत्री फडणवीस और शिवसेना के बीच फैसलों को लेकर सामने आई नाराजगी किस तरह दूर होती है। उपलब्ध जानकारी में इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री या शिवसेना की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया दर्ज नहीं है।