कांग्रेस को ममता का साथ मिलते ही गिरफ्तार हुए मिलन प्रधान, नंदीग्राम में क्यों गरमाई राजनीति?

पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव से पहले सियासत अचानक गरमा गई है। कांग्रेस के उम्मीदवार मिलन प्रधान को एक पुराने हत्या मामले के सिलसिले में गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है। यह कार्रवाई उस समय हुई, जब तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी ने नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी को समर्थन देने का ऐलान किया था। गिरफ्तारी के समय को लेकर कांग्रेस और ममता बनर्जी ने सवाल उठाए हैं, जबकि विपक्ष की ओर से कहा गया है कि मिलन प्रधान के खिलाफ पहले से लंबित मामलों में वारंट पर कार्रवाई की गई है।

किस मामले में हुई मिलन प्रधान की गिरफ्तारी

मिलन प्रधान की गिरफ्तारी नंदीग्राम के 2007 के भूमि अधिग्रहण विरोधी आंदोलन से जुड़े पुराने हत्या के मामलों के सिलसिले में हुई है। पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष सुभंकर सरकार के मुताबिक, उन्हें जानकारी मिली कि मिलन प्रधान को हत्या के एक मामले में हिरासत में लिया गया है, हालांकि उस समय कांग्रेस की ओर से गिरफ्तारी की पूरी जानकारी स्पष्ट नहीं थी।

सुभंकर सरकार ने यह भी कहा कि मिलन प्रधान नंदीग्राम के भूमि आंदोलन के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे हैं और उनके खिलाफ पहले से कई मामले दर्ज थे। उन्होंने गिरफ्तारी के समय पर सवाल उठाते हुए पूछा कि यदि मामले पुराने हैं तो कार्रवाई इसी समय क्यों की गई।

उधर, विपक्षी नेता ऋतब्रत बनर्जी ने गिरफ्तारी को लंबित मामलों से जोड़ते हुए कहा कि डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस की ओर से मिलन प्रधान के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई थी और उनके खिलाफ हत्या के तीन मामले लंबित हैं। उनके मुताबिक, चुनाव के दौरान वारंट पर अमल किया जाना जरूरी है।

इस तरह गिरफ्तारी को लेकर दोनों पक्षों की अलग-अलग व्याख्या सामने आई है। कांग्रेस ने जहां इसके समय को लेकर सवाल उठाए हैं, वहीं विपक्ष की ओर से इसे लंबित मामलों में कानूनी कार्रवाई बताया गया है।

ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार को क्यों दिया समर्थन

मिलन प्रधान की गिरफ्तारी से पहले नंदीग्राम उपचुनाव में एक बड़ा राजनीतिक बदलाव हुआ था। ममता बनर्जी के खेमे की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने शुक्रवार को अपना नामांकन वापस ले लिया। वह पेशे से शिक्षिका हैं और उन्हें ममता बनर्जी के खेमे ने नंदीग्राम से उम्मीदवार बनाया था।

नामांकन वापस लेने से पहले संचिता प्रधान डे अपने पति सत्यजीत के साथ पश्चिम बंगाल के राज्य सचिवालय ‘नबान्न’ पहुंचीं। वहां उन्होंने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की। इसके बाद ममता बनर्जी ने नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की।

ममता के समर्थन के कुछ ही समय बाद मिलन प्रधान की गिरफ्तारी की खबर सामने आने से इस पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक रंग ले लिया।
गिरफ्तारी की टाइमिंग पर ममता ने उठाए सवाल

ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मिलन प्रधान की गिरफ्तारी के समय पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि नंदीग्राम उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन देने के तुरंत बाद उनकी गिरफ्तारी हुई है और इस टाइमिंग को गंभीरता से देखा जाना चाहिए।

ममता ने आरोप लगाया कि यह बीजेपी की वही पुरानी रणनीति है, जिसमें पुराने मामलों को सामने लाया जाता है। उन्होंने सवाल किया कि कार्रवाई इसी समय क्यों हुई।

हालांकि, यह ममता बनर्जी का राजनीतिक आरोप है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मिलन प्रधान के खिलाफ पुराने हत्या के मामले और वारंट से संबंधित कार्रवाई का दूसरा पक्ष भी सामने आया है। इसलिए गिरफ्तारी को लेकर लगाए गए राजनीतिक आरोपों और कानूनी कार्रवाई के दावे को अलग-अलग देखा जाना जरूरी है।

राहुल गांधी ने बीजेपी पर साधा निशाना

मिलन प्रधान की गिरफ्तारी पर कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में गिरफ्तारी को राजनीतिक प्रतिशोध बताया और आरोप लगाया कि नंदीग्राम उपचुनाव से पहले कांग्रेस उम्मीदवार के खिलाफ कार्रवाई कोई संयोग नहीं है।

राहुल गांधी ने बीजेपी पर निष्पक्ष चुनाव में भरोसा नहीं करने का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष के मुताबिक कभी वोट चोरी, कभी सरकार चोरी और कभी पार्टी चोरी जैसे मुद्दे सामने आते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी चुनावी मुकाबले को खत्म करना चाहती है।

राहुल गांधी का यह बयान राजनीतिक आरोप के तौर पर सामने आया है। उपलब्ध संदर्भ में बीजेपी की ओर से इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया शामिल नहीं है, इसलिए उसके पक्ष में कोई अतिरिक्त दावा नहीं जोड़ा जा सकता।

नंदीग्राम में उपचुनाव से पहले बदल गया पूरा समीकरण

नंदीग्राम उपचुनाव से ठीक पहले घटनाक्रम तेजी से बदला। पहले ममता बनर्जी के खेमे ने संचिता प्रधान डे को उम्मीदवार बनाया था। इसके बाद उन्होंने नामांकन वापस ले लिया और ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने का ऐलान किया।

ममता के समर्थन के बाद मिलन प्रधान की गिरफ्तारी ने चुनावी माहौल को और विवादित बना दिया। एक तरफ कांग्रेस और ममता बनर्जी ने गिरफ्तारी के समय को लेकर सवाल उठाए और इसे राजनीतिक कार्रवाई से जोड़कर देखा, वहीं विपक्ष की ओर से कहा गया कि मिलन प्रधान के खिलाफ हत्या के मामले लंबित हैं और वारंट पर कार्रवाई की गई है।

नंदीग्राम में उपचुनाव से पहले सामने आए इन घटनाक्रमों ने कांग्रेस उम्मीदवार की गिरफ्तारी को चुनावी राजनीति के केंद्र में ला दिया है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी में गिरफ्तारी से जुड़े पुराने मामलों, ममता बनर्जी के समर्थन और कांग्रेस की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोपों को लेकर अलग-अलग पक्ष सामने आए हैं।