महाराष्ट्र विधानसभा के बजट सत्र के दौरान माहौल उस वक्त बेहद भावुक हो गया, जब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्य के उपमुख्यमंत्री रहे अजित पवार को श्रद्धांजलि दी। सदन में बोलते हुए उनकी आवाज कई बार भर्रा गई। उन्होंने स्वीकार किया कि अजित पवार के अचानक चले जाने से जो खालीपन पैदा हुआ है, उसे शब्दों में बयां करना आसान नहीं है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में अपनी अलग पहचान बना चुके और भविष्य में और बड़ी भूमिका निभाने की क्षमता रखने वाले नेता का इस तरह असमय जाना पूरे राज्य के लिए गहरा आघात है। उन्होंने महाकवि भास के प्रसिद्ध नाटक ‘स्वप्नवासवदत्तम्’ का उल्लेख करते हुए एक सुभाषित सुनाया— “लकड़ी जब जलती है तो केवल शरीर को जलाती है, लेकिन मित्र का वियोग हृदय और आत्मा को भी दग्ध कर देता है।” फडणवीस ने कहा कि अजित दादा के निधन के बाद वे स्वयं इसी पीड़ा से गुजर रहे हैं। यह केवल राजनीतिक क्षति नहीं, बल्कि निजी जीवन का भी बड़ा नुकसान है।
“कहां से शुरुआत करूं, समझ नहीं पा रहा”अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि वे उलझन में हैं कि श्रद्धांजलि की शुरुआत कहां से करें। मन में भावनाओं का ज्वार उमड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कभी सोचा नहीं था कि इस तरह के शोक प्रस्ताव पर उन्हें बोलना पड़ेगा। सदन में बैठते समय उनकी नजर अक्सर बगल की सीट पर जाती थी, जहां अजित पवार मौजूद रहते थे। सुबह से देर रात तक चलने वाली कार्यवाही में उनका उत्साह और सक्रियता प्रेरणादायक थी। आज वही सीट खाली है, और यह दृश्य भीतर तक झकझोर देता है।
बजट पेश करने की जिम्मेदारी अब मेरे पासफडणवीस ने बताया कि यदि वे हमारे बीच होते तो इस वर्ष अपना 12वां बजट पेश करते और अगले वर्ष 13वां बजट प्रस्तुत कर बैरिस्टर शेषराव वानखेड़े के रिकॉर्ड की बराबरी कर सकते थे। संभव था कि वे राज्य के इतिहास में सर्वाधिक बार बजट पेश करने वाले वित्त मंत्री बनते। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। उनके असामयिक निधन के कारण अब बजट पेश करने की जिम्मेदारी स्वयं मुख्यमंत्री के कंधों पर आ गई है।
कठिन फैसलों से नहीं घबराते थे अजित दादामुख्यमंत्री ने कहा कि अजित पवार निर्णय लेने के मामले में हमेशा साहसिक रहे। ‘लाडकी बहिन’ योजना के वित्तीय प्रभाव को लेकर जब कई तरह की चर्चाएं हो रही थीं, तब भी उन्होंने दृढ़ता दिखाते हुए इसे मंत्रिमंडल के सामने रखा और आगे बढ़ाया। योजना लागू होने के बाद उनका गुलाबी जैकेट पहनना एक प्रतीक बन गया था, जिसे उन्होंने साथियों के साथ साझा किया। ये छोटी-छोटी बातें आज यादों में बदल चुकी हैं।
‘जगह खाली हो गई’ का असली अर्थफडणवीस ने भावुक स्वर में कहा कि किसी भी नेता के निधन पर अक्सर कहा जाता है कि उनकी जगह कोई नहीं ले सकता। लेकिन जब अजित पवार जैसा अनुभवी, प्रभावशाली और मजबूत नेतृत्व वाला व्यक्तित्व चला जाता है, तब इस वाक्य का वास्तविक अर्थ समझ में आता है। यह केवल एक संवैधानिक औपचारिकता नहीं थी, बल्कि उनके लिए अत्यंत निजी और संवेदनशील क्षण था।