महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को लेकर देश की राजनीति में बयानबाज़ी लगातार तेज होती जा रही है। इसी क्रम में जेडीयू नेता और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया बयान का समर्थन करते हुए कहा कि विपक्ष को इस मुद्दे पर सोच-समझकर रुख अपनाना चाहिए, वरना भविष्य में इसका राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
विपक्ष पर ‘खामियाजा’ भुगतने की चेतावनीमुंगेर से सांसद ललन सिंह ने स्पष्ट कहा कि अगर विपक्ष प्रधानमंत्री की अपील के बावजूद महिला आरक्षण बिल का विरोध करता है, तो आने वाले वर्षों में इसका बड़ा राजनीतिक परिणाम देखने को मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने स्वयं संसद में विपक्ष से इस विधेयक का समर्थन करने की बात कही है, लेकिन यदि इसे नजरअंदाज किया गया तो जनता इसका जवाब देगी।
ललन सिंह ने यह भी संकेत दिया कि बिहार के आगामी राजनीतिक परिदृश्य में भी इसका असर दिख सकता है और विपक्ष को जनता के फैसले को समझना चाहिए।
बिहार का उदाहरण देकर समझाया राजनीतिक संदेशकेंद्रीय मंत्री ने अपने बयान में बिहार का उदाहरण देते हुए कहा कि पंचायतों में 33 प्रतिशत आरक्षण लागू था, लेकिन बाद में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने इसे और व्यापक बनाते हुए महिलाओं को 50 प्रतिशत तक प्रतिनिधित्व देने का निर्णय लिया।
उन्होंने बताया कि 2006 में नीतीश कुमार ने न केवल पंचायत और नगर निकायों में महिलाओं को आरक्षण दिया, बल्कि जिला परिषद अध्यक्ष और सरपंच जैसे एकल पदों पर भी महिलाओं को अवसर प्रदान किया। इस फैसले को उन्होंने महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।
‘लालू यादव’ का जिक्र और राजनीतिक तंजललन सिंह ने अपने बयान में पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने उस समय नीतीश कुमार के इस निर्णय का विरोध किया था। उनके अनुसार, इस विरोध का राजनीतिक असर लंबे समय तक देखने को मिला।
उन्होंने दावा किया कि आज भी बिहार की महिलाएं एनडीए के पक्ष में मजबूत समर्थन दिखाती हैं, जो चुनावी परिणामों में साफ दिखाई देता है। ललन सिंह ने कहा कि पिछली कई चुनावी स्थितियां इस बात का प्रमाण हैं कि महिलाओं का झुकाव किस ओर अधिक रहा है।
अखिलेश यादव को दी नसीहतइस दौरान ललन सिंह ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव का भी जिक्र किया और उन्हें अपना मित्र बताते हुए सलाह दी कि वे इंडिया गठबंधन के दबाव में आकर निर्णय न लें। उन्होंने कहा कि गठबंधन की राजनीति कई बार गलत दिशा में ले जाती है, जिससे राजनीतिक नुकसान होता है।
उन्होंने यह भी कहा कि बिहार के हालिया चुनावी रुझानों में कई सीटों पर महिलाओं ने पुरुषों की तुलना में अधिक मतदान किया है, जो एनडीए के पक्ष में गया।
महिला सशक्तिकरण पर जोर और अपीलललन सिंह ने कहा कि महिला आरक्षण का मुद्दा लंबे समय से लंबित था और अब जब सरकार ने इसे आगे बढ़ाया है, तो सभी को इसका समर्थन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मातृशक्ति को अवसर देना समय की मांग है और इसका विरोध करना उचित नहीं है।
उन्होंने विपक्ष से अपील करते हुए कहा कि हठधर्मिता छोड़कर इस विधेयक का समर्थन करें, क्योंकि यह केवल एक राजनीतिक फैसला नहीं बल्कि सामाजिक बदलाव की दिशा में उठाया गया कदम है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि विरोध जारी रहा तो आने वाले वर्षों में इसका गंभीर राजनीतिक परिणाम देखने को मिल सकता है, जैसा कि पहले भी कुछ नेताओं के साथ हुआ है।