ट्विशा केस में नया मोड़: मौत के बाद पूर्व जज गिरिबाला ने किन 46 प्रभावशाली नंबरों पर की थी कॉल? जांच अब डिजिटल सबूतों पर केंद्रित

ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत से जुड़े मामले में हर दिन नई परतें खुलती जा रही हैं। अब इस केस में परिजनों द्वारा लगाए गए एक नए आरोप ने जांच को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। परिजनों ने अदालत में एक आवेदन दाखिल कर दावा किया है कि ट्विशा की मृत्यु के तुरंत बाद पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह ने 46 अलग-अलग नंबरों पर संपर्क किया था। इन नंबरों में कुछ न्यायिक व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों और जांच एजेंसियों के उच्च पदस्थ अफसरों के होने की आशंका जताई गई है। इस दावे के सामने आने के बाद मामला और अधिक गंभीर हो गया है, जिसके चलते जांच का पूरा रुख अब डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की ओर मुड़ गया है।

46 कॉल्स के दावे से जांच में आई तेजी

मामले में भोपाल की पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह की बहू ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत को लेकर परिजनों ने अदालत में एक महत्वपूर्ण आवेदन दिया है। इसमें आरोप लगाया गया है कि ट्विशा की मौत के तुरंत बाद कई प्रभावशाली व्यक्तियों से फोन पर बातचीत की गई थी। परिजनों का कहना है कि जिन 46 नंबरों पर कॉल किए गए, उनमें न्यायिक सेवा से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी और जांच एजेंसियों के अफसर भी शामिल हो सकते हैं। इस गंभीर आरोप के बाद पुलिस ने अदालत को जानकारी दी है कि सभी संबंधित मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और टावर लोकेशन को सुरक्षित रखने के लिए टेलीकॉम कंपनियों को पत्र भेजा गया है, ताकि किसी भी डिजिटल साक्ष्य से छेड़छाड़ न हो सके।
सीबीआई जांच के बाद सक्रिय हुई स्थानीय पुलिस

इस पूरे मामले की जांच में स्थानीय पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं। पुलिस ने कोर्ट में बताया कि ट्विशा और उनके पति समर्थ के मोबाइल फोन समेत कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त कर लिए गए हैं। हालांकि हैरानी की बात यह है कि यह कार्रवाई घटना के करीब 13 दिन बाद की गई, वह भी सोमवार रात को। बताया जा रहा है कि यह कदम तब उठाया गया जब सीबीआई ने मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। सीबीआई की सक्रियता के बाद भोपाल पुलिस भी हरकत में आई और आरोपी समर्थ को लेकर मौके पर पहुंचकर स्पॉट वेरिफिकेशन कराया गया, ताकि घटनास्थल से जुड़ी परिस्थितियों की दोबारा जांच की जा सके।

एम्स के वीडियो फुटेज भी साक्ष्य के रूप में सुरक्षित

डिजिटल साक्ष्यों को संरक्षित करने की दिशा में पुलिस ने एम्स भोपाल से जुड़े महत्वपूर्ण रिकॉर्ड भी अपने कब्जे में ले लिए हैं। अस्पताल में ट्विशा के पोस्टमार्टम और शव के संरक्षण की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग मौजूद थी, जिसे अब पुलिस ने प्राप्त कर लिया है। इन सभी वीडियो फुटेज को साक्ष्य के तौर पर सुरक्षित रखते हुए सरकारी मालखाने में जमा कर दिया गया है। जांच एजेंसियों का मानना है कि ये डिजिटल रिकॉर्ड मामले की सच्चाई तक पहुंचने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।