भोपाल में ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत का मामला लगातार गहराता जा रहा है और हर नए खुलासे के साथ जांच व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस केस में सामने आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पुलिस की कार्यशैली पर भी कई तरह की शंकाएं पैदा कर दी हैं। एम्स भोपाल की रिपोर्ट के अनुसार, जिस बेल्ट से फांसी लगाने की बात कही जा रही थी, वह ऑटोप्सी के दौरान डॉक्टरों के सामने प्रस्तुत ही नहीं की गई। इसी कारण यह स्पष्ट नहीं हो सका कि ट्विशा के गले पर मिले निशान उसी बेल्ट से बने थे या किसी अन्य कारण से। इस बड़ी चूक ने जांच प्रक्रिया में लापरवाही और संभावित सबूतों के साथ छेड़छाड़ जैसे गंभीर सवालों को जन्म दिया है।
एसआईटी प्रमुख और मिसरोद के सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) रजनीश कश्यप ने जांच में इस गंभीर लापरवाही को स्वीकार किया है। उन्होंने बताया कि बाद में संबंधित बेल्ट को फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) के हवाले कर एम्स भोपाल में सुरक्षित रूप से जमा कराया गया। हालांकि तब तक जांच के शुरुआती चरण में यह अहम सबूत उपलब्ध नहीं होने से कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर स्पष्टता नहीं मिल सकी।
जानकारी के अनुसार, ट्विशा शर्मा का शव भोपाल के कटरा हिल्स स्थित उसके ससुराल में फंदे से लटका हुआ पाया गया था। घटना के बाद उसकी सास, रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह, और पति समर्थ उसे तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम में एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि पुलिस को मौके पर बुलाए बिना ही शव को अस्पताल क्यों ले जाया गया। इससे घटनास्थल की प्रारंभिक जांच और फॉरेंसिक प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
इस पर एसीपी रजनीश कश्यप ने कहा कि यह पहलू जांच का बेहद अहम हिस्सा है और पुलिस हर एंगल से मामले की पड़ताल कर रही है। उन्होंने बताया कि घर में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज भी खंगाले जा रहे हैं, ताकि यह समझा जा सके कि घटना के समय और उसके बाद किन परिस्थितियों में निर्णय लिए गए और शव को अस्पताल ले जाया गया।
आरोप-प्रत्यारोप में उलझा मामलाइस केस में अब तक स्थिति और अधिक जटिल हो गई है क्योंकि दोनों पक्ष एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। ट्विशा के माता-पिता का आरोप है कि उनकी बेटी की हत्या दहेज प्रताड़ना के चलते की गई है और इसमें ससुराल पक्ष शामिल है। उनका यह भी कहना है कि परिवार में एक रिटायर्ड जज होने के कारण जांच को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है और निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
वहीं दूसरी ओर, सास गिरिबाला सिंह ने भी पलटवार करते हुए ट्विशा और उसके मायके पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि ट्विशा को नशे की लत थी और गर्भावस्था के दौरान भी उसने नशीले पदार्थों का सेवन किया था। उन्होंने यह भी कहा कि ट्विशा ने स्वयं डॉक्टरों के सामने यह बात स्वीकार की थी और इसी कारण वह गर्भपात कराना चाहती थी। हालांकि बाद में उसे अपनी गलती का एहसास हुआ, लेकिन तब तक स्थिति बदल चुकी थी।
सास ने आगे यह भी दावा किया कि ट्विशा मानसिक रूप से अस्वस्थ थी और इसी वजह से कई जटिल परिस्थितियां उत्पन्न हुईं। हालांकि पुलिस ने अब तक स्पष्ट किया है कि इन दावों के समर्थन में कोई ठोस सबूत सामने नहीं आए हैं और जांच जारी है।
दहेज के आरोपों पर क्या बोलीं रिटायर्ड जजट्विशा शर्मा मामले में दहेज प्रताड़ना के लगाए गए आरोपों पर रिटायर्ड जज गिरिबाला सिंह ने अपना पक्ष रखते हुए कई दस्तावेज और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के सबूत पेश किए हैं। उन्होंने दावा किया है कि वे लगातार ट्विशा की जरूरतों को पूरा करने के लिए उसे आर्थिक सहायता भेजती रही थीं। उनके अनुसार, विभिन्न समय पर किए गए इन लेनदेन में 5 हजार रुपये से लेकर 50 हजार रुपये तक की रकम शामिल है, जो इस बात का संकेत है कि परिवार की ओर से उसे आर्थिक रूप से सहयोग दिया जाता था।
इसके साथ ही गिरिबाला सिंह ने यह भी आरोप लगाया है कि पिछले लगभग पांच महीनों में ट्विशा के माता-पिता उससे मिलने या उसे देखने नहीं आए। उन्होंने कहा कि आज जब ट्विशा इस दुनिया में नहीं है, तब उसका अंतिम संस्कार तक नहीं होने दिया जा रहा है, जो बेहद दुखद स्थिति है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ट्विशा के परिजनों ने कम उम्र में ही उसे ग्लैमर और करियर की तेज रफ्तार दुनिया में धकेल दिया, जिससे वह मानसिक दबाव में रहने लगी थी।
गिरिबाला सिंह ने अपने बेटे समर्थ सिंह के लिए जिला अदालत में दायर अग्रिम जमानत याचिका में भी कई गंभीर दावे किए हैं। याचिका में कहा गया है कि ट्विशा नशे की आदी थी और जब उसे नशा नहीं मिलता था तो वह चिड़चिड़ी हो जाती थी तथा उसके हाथ-पैर कांपने लगते थे। उन्होंने यह भी कहा कि ट्विशा की मौत उनके लिए किसी गहरे सदमे और बुरे सपने से कम नहीं है, क्योंकि वह उनके परिवार का हिस्सा थी।
चैट्स से बढ़ा विवाद, रिश्तों में तनाव के संकेतइस पूरे मामले के बीच सोशल मीडिया पर ट्विशा की अपनी मां के साथ हुई बातचीत के स्क्रीनशॉट भी सामने आए हैं, जिनमें वह बार-बार अपनी मां से उसे घर ले जाने की गुहार लगाती दिखाई देती है। चैट्स में ट्विशा यह भी लिखती है कि उसकी जिंदगी कठिन हो गई है और वह चाहती है कि उसे वहां से निकाल लिया जाए। एक संदेश में वह अपने पति समर्थ पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहती है कि वह उस पर बच्चे को लेकर शक कर रहा है और यह सवाल उठा रहा है कि गर्भ में पल रहा बच्चा किसका है, जिसके चलते उसे गर्भपात तक का दबाव झेलना पड़ा।
इसी बातचीत में यह भी दावा किया गया है कि समर्थ ने उसके पिता से माफी मंगवाने के लिए अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया था। फिलहाल इस मामले में समर्थ सिंह फरार बताया जा रहा है। उसकी ओर से दायर अग्रिम जमानत याचिका पहले ही खारिज हो चुकी है और पुलिस उसकी तलाश में जुटी हुई है। उस पर इनाम घोषित किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
रिश्तेदारों के अनुसार, घटना वाले दिन रात करीब 10 बजे तक ट्विशा अपने परिजनों के संपर्क में थी, लेकिन इसके कुछ घंटे बाद ही 12 मई को उसका शव फंदे से लटका हुआ मिला, जिससे मामले ने और भी रहस्यमय रूप ले लिया है।
पोस्टमार्टम, जांच और बढ़ता राजनीतिक-प्रशासनिक दबाव
इस समय ट्विशा का शव भोपाल स्थित एम्स के शवगृह में रखा हुआ है। परिवार ने दोबारा पोस्टमार्टम दिल्ली के एम्स में कराने की मांग की है, जिससे जांच को लेकर विश्वास और पारदर्शिता सुनिश्चित की जा सके।
समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत याचिका में यह भी दावा किया गया है कि शादी के बाद और विशेष रूप से गर्भावस्था के दौरान ट्विशा के व्यवहार में बदलाव आया था। याचिका में यह भी उल्लेख किया गया है कि घटना वाले दिन पति उसे ब्यूटी पार्लर लेकर गया था। इसके अलावा, दस्तावेजों में गर्भपात का भी उल्लेख किया गया है, जो अब जांच का हिस्सा बना हुआ है। इस याचिका की कॉपी सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला और अधिक चर्चा में आ गया है।
ट्विशा की चचेरी बहन मीनाक्षी ने भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि लगातार मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के कारण ट्विशा का वजन लगभग 15 किलोग्राम तक घट गया था। उनका दावा है कि यह उत्पीड़न उस समय और बढ़ गया जब उसकी नौकरी चली गई और वह गर्भवती हो गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि उसके पति ने गर्भ में पल रहे बच्चे को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था।
इस बीच, जांच एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि एसआईटी अब दहेज प्रताड़ना, शारीरिक हिंसा और सबूतों को नष्ट करने के प्रयासों सहित सभी पहलुओं की जांच कर रही है। वहीं रविवार को ट्विशा शर्मा के परिवार ने मुख्यमंत्री मोहन यादव के आवास के बाहर प्रदर्शन कर दिल्ली एम्स में दोबारा पोस्टमार्टम कराने की मांग भी उठाई, जिससे मामला और अधिक संवेदनशील बन गया है।