‘भारत के नहीं पाकिस्तान के राष्ट्रपिता हैं गांधी’, BJP विधायक यतनल के विवादित बयान से मचा सियासी तूफान, भड़का विपक्ष

कर्नाटक के विजयपुरा से बीजेपी विधायक बसनगौड़ा पाटिल यतनल ने हाल ही में महात्मा गांधी को लेकर विवादित बयान दिया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। यतनल ने कहा कि गांधी भारत के राष्ट्रपिता नहीं, बल्कि पाकिस्तान के हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि जो लोग वंदे मातरम नहीं गाएंगे या मातृभूमि को सलाम नहीं करेंगे, उन्हें पाकिस्तान जाना चाहिए। इस बयान पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है, जबकि बीजेपी ने दूरी बना ली है।

‘हम गांधी को नहीं मानते राष्ट्रपिता’ – यतनल

एक सार्वजनिक सभा में यतनल ने कहा, “जो लोग वंदे मातरम नहीं कहेंगे या मातृभूमि को सलाम नहीं करेंगे, वे पाकिस्तान चले जाएं। हमारे लिए डॉ. अंबेडकर काफी हैं। गांधी हमारे राष्ट्रपिता नहीं हैं, वह पाकिस्तान के राष्ट्रपिता हैं। हम नेहरू को भी अपना पहला प्रधानमंत्री नहीं मानते। हमारे पहले प्रधानमंत्री नेताजी सुभाष चंद्र बोस थे।”

यतनल का यह बयान भारतीय इतिहास की मान्यताओं को चुनौती देता है। महात्मा गांधी को आधिकारिक तौर पर भारत का राष्ट्रपिता माना जाता है, जबकि जवाहरलाल नेहरू स्वतंत्र भारत के पहले प्रधानमंत्री थे। नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज बनाई और 1943 में सिंगापुर में खुद को ‘प्रधानमंत्री’ घोषित किया, लेकिन तब भारत आजाद नहीं था। इतिहासकारों के अनुसार, ऐसे बयान अक्सर राजनीतिक लाभ के लिए दिए जाते हैं, लेकिन ये तथ्यों को विकृत तरीके से पेश करते हैं।

विरोधियों की तीखी प्रतिक्रिया

कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री प्रियांक खरगे ने कहा, “यह गांधी के योगदान का अपमान है। गांधी ने पूरे देश को आजादी दिलाई। पाकिस्तान का निर्माण ब्रिटिश नीतियों का नतीजा था। BJP ऐसे विधायकों पर कार्रवाई क्यों नहीं करती?” वहीं, TMC की प्रमुख ममता बनर्जी ने इसे ‘विभाजनकारी राजनीति’ करार दिया।
BJP ने जताई दूरी

बीजेपी ने यतनल के बयान से खुद को अलग किया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बीवाई विजयेंद्र ने कहा, “यह विधायक का निजी मत है, पार्टी का इससे कोई संबंध नहीं। हम गांधी और अंबेडकर दोनों का सम्मान करते हैं।” हालांकि, कुछ बीजेपी नेता निजी तौर पर यतनल के समर्थन में हैं, जो पार्टी में आंतरिक मतभेद की ओर इशारा करता है। यतनल पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा के करीबी माने जाते हैं और कई बार पार्टी लाइन से हटकर बयान दे चुके हैं।

भविष्य में राजनीतिक असर


कर्नाटक विधानसभा के आगामी सत्र में यह बयान फिर से चर्चा में आ सकता है, जहां विपक्ष BJP पर हमलावर हो सकता है। यतनल पर कार्रवाई होगी या नहीं, यह देखना बाकी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे बयान अक्सर चुनावों से पहले ध्रुवीकरण की राजनीति का हिस्सा होते हैं।