उद्धव गुट में सेंध की अटकलों पर रोहित पवार का बड़ा बयान, कहा- 'टूटने वाले हों या तोड़ने वाले, दोनों को...

महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों कथित दल-बदल और राजनीतिक जोड़तोड़ को लेकर माहौल गर्म है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के कुछ सांसदों के पार्टी छोड़ने की अटकलों ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। संभावित टूट की खबरों के बीच शिवसेना (यूबीटी) खेमे में बेचैनी का माहौल देखा जा रहा है। वहीं दूसरी ओर, सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन से जुड़े नेताओं के बयानों ने इस मुद्दे को और अधिक चर्चा का विषय बना दिया है।

इसी बीच राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक और शरद पवार के पोते रोहित पवार ने इस पूरे घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा करते हुए भाजपा नेतृत्व वाली महायुति सरकार पर अप्रत्यक्ष निशाना साधा और राज्य के मौजूदा राजनीतिक माहौल पर सवाल उठाए।

'जनता के मुद्दे पीछे, राजनीतिक जोड़तोड़ आगे'

रोहित पवार ने अपने पोस्ट में कहा कि राज्य और देश के सामने कई गंभीर चुनौतियां खड़ी हैं, लेकिन राजनीतिक वर्ग का ध्यान जनहित के मुद्दों से भटकता दिखाई दे रहा है। उन्होंने लिखा कि मध्यम वर्ग रोजगार की असुरक्षा से जूझ रहा है, युवाओं के लिए नौकरी के अवसर सीमित होते जा रहे हैं और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर लगातार चिंताएं बढ़ रही हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है।

उन्होंने आगे कहा कि एल-नीनो के प्रभाव और कमजोर मानसून की आशंकाओं के कारण किसान पहले से ही परेशान हैं। कई क्षेत्रों में जल संकट गहराने की संभावना जताई जा रही है और पीने के पानी की उपलब्धता को लेकर भी चिंता बनी हुई है। ऐसे समय में जनप्रतिनिधियों की कथित खरीद-फरोख्त और राजनीतिक समीकरणों की चर्चा होना लोकतांत्रिक मूल्यों पर सवाल खड़े करता है।

'तोड़ने और टूटने वालों को जनता जवाब देगी'

उद्धव ठाकरे की पार्टी में संभावित टूट की चर्चाओं पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए रोहित पवार ने कहा कि लोकतंत्र में जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों को अपने जनादेश का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो लोग राजनीतिक स्वार्थ के लिए दल बदलते हैं और जो उन्हें ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं, दोनों को आत्ममंथन करने की जरूरत है।

रोहित पवार ने अपने बयान में कहा, जो लोग टूटते हैं और जो दूसरों को तोड़ने का प्रयास करते हैं, दोनों को शर्म आनी चाहिए। जनता ने जिस भरोसे के साथ उन्हें चुना है, उसका सम्मान होना चाहिए। लोकतंत्र में जनता ही सबसे बड़ी ताकत होती है और विश्वास के साथ खिलवाड़ करने वालों को अंततः जनता ही राजनीतिक रूप से सबक सिखाती है।
उद्धव ठाकरे की बैठक में नहीं पहुंचे सभी सांसद

गौरतलब है कि हाल ही में शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने अपने सांसदों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई थी। जानकारी के अनुसार बैठक में पार्टी के कुल नौ सांसदों को आमंत्रित किया गया था, लेकिन उनमें से केवल चार सांसद ही व्यक्तिगत रूप से बैठक में उपस्थित हुए। बाकी सांसदों की अनुपस्थिति ने राजनीतिक हलकों में कई तरह की अटकलों को जन्म दिया और संभावित दल-बदल की चर्चाओं को और हवा मिल गई।

बैठक के बाद विपक्षी खेमे में यह चिंता भी सामने आई कि कहीं कुछ सांसद नेतृत्व से असंतुष्ट होकर दूसरे राजनीतिक विकल्पों की ओर तो नहीं देख रहे हैं। हालांकि पार्टी की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

शिंदे गुट ने दिया खुला संदेश

इसी बीच शिवसेना के शिंदे गुट की ओर से भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया सामने आई। महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और शिंदे गुट के वरिष्ठ नेता प्रताप सरनाईक ने कहा कि यदि कोई सांसद या विधायक अपने वर्तमान नेतृत्व पर भरोसा नहीं करता और मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में काम करना चाहता है, तो उसके लिए शिवसेना के दरवाजे खुले हुए हैं।

उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों को अपने राजनीतिक भविष्य और जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेने का अधिकार है। यदि कोई नेता एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में विश्वास जताना चाहता है, तो उसका स्वागत किया जाएगा।

फिलहाल उद्धव ठाकरे गुट में संभावित टूट की चर्चाओं को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। आने वाले दिनों में यह साफ हो सकेगा कि ये अटकलें केवल राजनीतिक चर्चा तक सीमित रहती हैं या महाराष्ट्र की राजनीति में कोई बड़ा घटनाक्रम देखने को मिलता है।