यूबीटी में बड़ी टूट की आहट! आधी रात सांसदों से मिले एकनाथ शिंदे, 6 सांसदों के पाला बदलने की अटकलें

महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर बड़े घटनाक्रम की ओर बढ़ती नजर आ रही है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) में संभावित टूट की अटकलों ने राजनीतिक गलियारों का तापमान बढ़ा दिया है। मुंबई से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं और चर्चा इस बात की है कि उद्धव ठाकरे की पार्टी के कई सांसद जल्द ही बड़ा फैसला ले सकते हैं।

सूत्रों के हवाले से सामने आ रही जानकारी के अनुसार, उद्धव ठाकरे गुट के कुल नौ लोकसभा सांसदों में से छह सांसद कथित तौर पर एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के संपर्क में हैं और पाला बदलने पर विचार कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि इनमें से कई सांसद इन दिनों दिल्ली में मौजूद हैं, जहां लगातार बैठकों और रणनीतिक चर्चाओं का दौर जारी है।

दिल्ली में सक्रिय हुए एकनाथ शिंदे, देर रात हुई अहम बैठक की चर्चा

राजनीतिक सूत्रों का दावा है कि महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे भी इन दिनों दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। जानकारी के मुताबिक, मंगलवार रात वह जयपुर से दिल्ली लौटे थे। इसी दौरान यह चर्चा भी तेज हो गई कि उन्होंने देर रात उद्धव ठाकरे गुट के कुछ सांसदों के साथ गोपनीय बैठक की।

सूत्रों के अनुसार, यह मुलाकात बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि पार्टी के भीतर संभावित असंतोष और राजनीतिक पुनर्संरचना की चर्चाएं पहले से ही चल रही हैं। हालांकि इस कथित बैठक को लेकर किसी भी पक्ष की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।

संजय राउत ने किया टूट की खबरों से इनकार

दूसरी ओर, शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत लगातार यह दावा कर रहे हैं कि पार्टी पूरी तरह एकजुट है और किसी तरह की टूट की संभावना नहीं है। उनका कहना है कि सभी सांसद उद्धव ठाकरे के नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़े हैं और विपक्ष द्वारा फैलाई जा रही अटकलों में कोई सच्चाई नहीं है।

बताया जा रहा है कि शिंदे गुट के कथित 'ऑपरेशन टाइगर' को विफल करने के लिए उद्धव ठाकरे खेमे ने भी अपनी रणनीति को तेज कर दिया है। पार्टी नेतृत्व लगातार सांसदों और वरिष्ठ नेताओं के संपर्क में है ताकि किसी भी संभावित नुकसान को रोका जा सके।
श्रीकांत शिंदे के आवास पर बैठक की चर्चा

सूत्रों के मुताबिक बुधवार सुबह दिल्ली स्थित सांसद श्रीकांत शिंदे के सरकारी आवास पर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित होने की संभावना जताई जा रही है। बताया जा रहा है कि सुबह करीब 8:30 बजे होने वाली इस बैठक में उद्धव गुट के कुछ सांसद शामिल हो सकते हैं। साथ ही एकनाथ शिंदे की मौजूदगी को लेकर भी चर्चा है।

राजनीतिक गलियारों में यह भी अटकलें लगाई जा रही हैं कि बैठक के बाद श्रीकांत शिंदे लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात कर सकते हैं। इसी बीच यह जानकारी भी सामने आई है कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला मंगलवार रात दिल्ली लौट चुके हैं, जिससे राजनीतिक गतिविधियों को और बल मिला है।

कुछ सूत्रों का दावा है कि श्रीकांत शिंदे ने उद्धव गुट से दूरी बनाकर शिंदे गुट के साथ अपनी नजदीकियां बढ़ा ली हैं। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

अरविंद सावंत ने स्पीकर को लिखा पत्र

उधर, शिवसेना (यूबीटी) के सांसद और लोकसभा में पार्टी के समूह नेता अरविंद सावंत ने भी इस पूरे घटनाक्रम के बीच सक्रियता बढ़ा दी है। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को एक पत्र लिखकर अपनी पार्टी की स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की है।

पत्र में उन्होंने कहा है कि सदन में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ही पार्टी का वैध और अधिकृत प्रतिनिधित्व करती है। इसलिए पार्टी के अधिकृत नेता और व्हिप के माध्यम से ही उसकी पहचान बरकरार रखी जानी चाहिए।

सावंत ने यह भी आग्रह किया कि यदि कोई अन्य समूह या अलग हुए नेताओं का धड़ा पार्टी का प्रतिनिधित्व करने का दावा करता है, तो उसे किसी प्रकार की अलग मान्यता, विशेषाधिकार या सुविधा प्रदान न की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि इस संबंध में कोई आवेदन या पत्र प्राप्त होता है तो उस पर फैसला लेने से पहले शिवसेना (यूबीटी) को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाना चाहिए।

दसवीं अनुसूची का भी किया जिक्र

अरविंद सावंत ने अपने पत्र में संविधान की दसवीं अनुसूची का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी के पास दल-बदल विरोधी कानून के तहत उपलब्ध सभी संवैधानिक और कानूनी अधिकार सुरक्षित हैं। उन्होंने संकेत दिया कि यदि कोई जनप्रतिनिधि पार्टी के आधिकारिक रुख के खिलाफ कदम उठाता है तो उसके खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि संविधान और लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत किसी भी गतिविधि पर पार्टी गंभीरता से विचार करेगी और आवश्यक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगी।

मातोश्री ने सक्रिय किया संकट प्रबंधन प्लान

राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि संभावित टूट और विरोधी खेमे की गतिविधियों को देखते हुए उद्धव ठाकरे ने स्वयं मोर्चा संभाल लिया है। पार्टी नेतृत्व लगातार सांसदों और वरिष्ठ पदाधिकारियों के संपर्क में बना हुआ है।

खबरों के अनुसार, पार्टी को किसी बड़े झटके से बचाने के लिए मातोश्री की ओर से विशेष 'क्राइसिस मैनेजमेंट प्लान' लागू किया गया है। इसका उद्देश्य सांसदों को एकजुट रखना और पार्टी संगठन में किसी प्रकार की अस्थिरता को रोकना है।

फिलहाल दिल्ली और मुंबई के बीच राजनीतिक गतिविधियां चरम पर हैं। शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत और अनिल देसाई पहले ही दिल्ली पहुंच चुके हैं, जबकि सांसद अरविंद सावंत और राजाभाऊ वाजे के भी राजधानी पहुंचने की खबर है। ऐसे में आने वाले कुछ दिन महाराष्ट्र की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं और सभी की नजरें उद्धव ठाकरे गुट के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।