फ्लाईदुबई की उड़ान FZ1073 में कॉकपिट के भीतर हुए हमले के बाद भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार ने उस भयावह घटना के बारे में विस्तार से बताया है। दुबई से तेल अवीव जा रही उड़ान के दौरान को-पायलट ने कथित तौर पर उन पर अचानक हमला कर दिया था। हमले के बावजूद कैप्टन मच्छार ने विमान को संभालने की कोशिश जारी रखी और यात्रियों की सुरक्षा के लिए निर्णायक कदम उठाए।
इलाज के दौरान दुबई के अस्पताल से कैप्टन मच्छार ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से फोन पर बातचीत की। नेतन्याहू ने उनके साहस की प्रशंसा की और उन्हें इजरायल के स्वतंत्रता दिवस समारोह में मशाल प्रज्वलित करने के लिए आमंत्रित किया। इस दौरान कैप्टन मच्छार ने प्रधानमंत्री को बताया कि कॉकपिट में हमले की शुरुआत कैसे हुई और किस तरह उन्होंने बेहद मुश्किल स्थिति में बाहर मौजूद सहयोगियों के लिए कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफलता हासिल की।
नमाज के लिए उठे को-पायलट ने अचानक किया हमलाकैप्टन मच्छार के मुताबिक, उड़ान सामान्य रूप से चल रही थी। इसी दौरान को-पायलट ने नमाज पढ़ने की बात कही। कैप्टन ने बताया कि उन्हें इसमें कोई असामान्य बात नहीं लगी और धार्मिक सम्मान को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपना ध्यान सामने की ओर रखा।
कुछ मिनट बाद अचानक उनके सिर के पीछे जोरदार हमला हुआ। शुरुआत में उन्हें समझ नहीं आया कि आखिर हुआ क्या है। उन्हें लगा कि शायद विमान में कोई तकनीकी समस्या आ गई है या कोई बड़ा हादसा हो गया है। लेकिन जब लगातार कई वार किए गए और उनकी आंखों के सामने धुंधलापन छाने लगा, तब उन्हें एहसास हुआ कि खतरा विमान की तकनीकी स्थिति से नहीं, बल्कि कॉकपिट में मौजूद दूसरे व्यक्ति से है।
हमले के बीच विमान का नियंत्रण भी प्रभावित होने लगा और स्थिति तेजी से गंभीर होती चली गई। कैप्टन के सामने एक तरफ अपनी चोटों से जूझने की चुनौती थी तो दूसरी तरफ विमान में मौजूद यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी।
कॉकपिट का दरवाजा खोलना बना सबसे बड़ी चुनौतीकैप्टन मच्छार ने बताया कि हमले के दौरान बाहर मौजूद उनके सहयोगियों ने कॉकपिट का दरवाजा खोलने की कोशिश की। दरवाजा बाहर से कोड के जरिए खोला जाना था, लेकिन को-पायलट कथित तौर पर उस प्रक्रिया को रोक रहा था। ऐसे में बाहर मौजूद लोग तुरंत कॉकपिट के भीतर प्रवेश नहीं कर पा रहे थे।
कैप्टन के अनुसार, उस समय दरवाजा खोलने का विकल्प केवल अंदर से मौजूद 'ट्विस्ट नॉब' के जरिए था। वह खुद हमले में घायल होकर फर्श पर गिर चुके थे, लेकिन उन्हें यह महसूस हो रहा था कि यदि उन्होंने किसी तरह दरवाजा नहीं खोला तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।
उन्होंने अपनी बची हुई ताकत जुटाई और हाथ बढ़ाकर दरवाजे के नॉब तक पहुंचने की कोशिश की। इसके बाद उन्होंने नॉब घुमाकर कॉकपिट का दरवाजा खोल दिया। दरवाजा खुलते ही बाहर मौजूद सहयोगी अंदर पहुंचे और स्थिति को संभालने में मदद की।
घायल होने के बावजूद यात्रियों की सुरक्षा पर रखा ध्यानइस पूरी घटना के दौरान कैप्टन मच्छार खुद गंभीर स्थिति में थे। हमले के कारण उन्हें चोट लगी थी और उनकी नजर भी प्रभावित हुई थी। इसके बावजूद उन्होंने विमान में मौजूद लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी।
फ्लाईदुबई की इस उड़ान में बड़ी संख्या में यात्री सवार थे और कॉकपिट में हुई घटना के कारण विमान की स्थिति बेहद संवेदनशील हो गई थी। कैप्टन मच्छार की ओर से विमान को नियंत्रित रखने और कॉकपिट तक सहायता पहुंचाने के लिए किए गए प्रयासों को इस घटना का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है।
नेतन्याहू ने कैप्टन मच्छार को बताया हीरोघटना के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कैप्टन स्मित मच्छार से फोन पर बातचीत की। उन्होंने उनके साहस की सराहना करते हुए कहा कि वह इजरायल, भारत और पूरी दुनिया के लिए हीरो हैं।
नेतन्याहू ने कैप्टन मच्छार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इजरायल के स्वतंत्रता दिवस समारोह में मशाल प्रज्वलित करने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने इसे विशेष सम्मान के रूप में पेश किया और कैप्टन मच्छार के साहस की प्रशंसा की।
UAE में इलाज के बाद सेहत में सुधारकैप्टन मच्छार का दुबई में इलाज चल रहा है। संयुक्त अरब अमीरात में भारतीय दूतावास की ओर से जारी अपडेट के मुताबिक उनकी सेहत में तेजी से सुधार हो रहा है और वह खतरे से बाहर हैं।
इस घटना में कॉकपिट के भीतर हुए हमले के बावजूद कैप्टन मच्छार द्वारा स्थिति को संभालने और यात्रियों की सुरक्षा के लिए किए गए प्रयासों ने उन्हें चर्चा के केंद्र में ला दिया है। वहीं, नेतन्याहू की ओर से स्वतंत्रता दिवस समारोह में उन्हें आमंत्रित किया जाना उनके साहस के लिए दिए जा रहे विशेष सम्मान को दर्शाता है।