हिमाचल और उत्तराखंड के जंगलों में आग, सोलन में उठते धुएं के गुबार और लपटों ने बढ़ाई चिंता, VIDEO वायरल

हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भीषण गर्मी के बीच जंगलों की आग ने हालात बेहद गंभीर बना दिए हैं। हिमाचल के सोलन जिले में स्थित कंडाघाट और क्यारीघाट क्षेत्र के जंगलों में लगी आग ने विकराल रूप धारण कर लिया है। देखते ही देखते पेड़ तेज लपटों में घिरकर जलने लगे और आसमान में सैकड़ों फीट ऊंचा काला धुआं फैल गया। स्थिति को देखते हुए आसपास के इलाकों को खाली कराया गया है और प्रशासन के साथ वन विभाग की टीमें आग पर काबू पाने की कोशिशों में जुटी हैं। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में बारिश की संभावना जताई है, जिससे उम्मीद है कि आग पर काबू पाने में मदद मिल सकती है।

हिमाचल के अलावा पड़ोसी राज्य उत्तराखंड में भी जंगलों की आग लगातार फैलती जा रही है। जानकारी के अनुसार, सोलन जिले के कंडाघाट से शुरू हुई आग अब क्यारीघाट के पहाड़ी इलाकों तक पहुंच गई है, जिससे हालात और बिगड़ गए हैं। आग की तीव्रता इतनी अधिक है कि दूर-दूर तक काले धुएं के विशाल गुबार दिखाई दे रहे हैं। फायर ब्रिगेड, वन विभाग और स्थानीय लोग मिलकर आग को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहे हैं। इससे पहले मई महीने में छोटा शिमला इलाके में भी आग लगने की घटना सामने आई थी, जहां दुकानों को नुकसान पहुंचा था, हालांकि फायर ब्रिगेड ने समय रहते स्थिति पर काबू पा लिया था। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भी अधिकारियों को राहत और बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए हैं।

उत्तराखंड में भी आग का बढ़ता दायरा

उत्तराखंड के जंगलों में भी आग ने व्यापक रूप ले लिया है और कई जिलों में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। राज्य सरकार ने आग बुझाने में मदद करने वालों के लिए 1 लाख रुपये तक के इनाम की घोषणा की है ताकि लोगों को सहयोग के लिए प्रेरित किया जा सके। वन विभाग ने आग पर नियंत्रण के लिए 11 हजार से अधिक कर्मचारियों को तैनात किया है। चमोली, रुद्रप्रयाग, पौड़ी, टिहरी, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ और नैनीताल जैसे जिलों में अब तक करीब 400 से ज्यादा आग की घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें लगभग 330 हेक्टेयर जंगल जलकर नष्ट हो चुका है।
6 हजार फीट तक पहुंची आग, बांझ के जंगल भी खतरे में

जंगलों की आग अब 6 हजार फीट की ऊंचाई तक पहुंच चुकी है, जिससे हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। विशेष रूप से बांझ (Oak) के जंगल भी इस आग की चपेट में आ गए हैं, जो मिट्टी के कटाव को रोकने और जल स्रोतों को रिचार्ज करने में अहम भूमिका निभाते हैं। ये जंगल बारिश और बर्फबारी के पानी को संरक्षित करके भूमिगत जल स्तर बनाए रखने में मदद करते हैं, लेकिन अब इनके अस्तित्व पर संकट गहरा गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, बांझ के जंगल पहाड़ी ढलानों को स्थिर रखते हैं और भूस्खलन जैसी घटनाओं को रोकने में मदद करते हैं। लेकिन लगातार बढ़ती आग से यह प्राकृतिक संतुलन बिगड़ सकता है, जिसका असर आने वाले समय में जल स्रोतों और पर्यावरण पर भी पड़ सकता है।

रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और चमोली सबसे ज्यादा प्रभावित

गढ़वाल क्षेत्र के रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और चमोली जिलों में जंगलों की आग सबसे अधिक विकराल रूप में सामने आई है। इन इलाकों में इस सीजन में 25 मई तक 382 से ज्यादा आग की घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिससे सैकड़ों हेक्टेयर वन क्षेत्र पूरी तरह से तबाह हो चुका है। इस आग की चपेट में आकर अब तक एक व्यक्ति की मौत भी हो चुकी है, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है।

प्रशासन लगातार आग पर नियंत्रण पाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन तेज हवाओं और सूखी वनस्पति के कारण आग तेजी से फैलती जा रही है। स्थानीय लोगों में भी दहशत का माहौल बना हुआ है और कई इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी गई है।