नई दिल्ली। संसद के बजट सत्र में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोपों ने लोकसभा में गरमा-गरम बहस को जन्म दिया। उनके भाषण के कुछ हिस्सों पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई है और इसके बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस जारी करने की घोषणा की। राहुल गांधी को नोटिस प्राप्त हो चुका है और उन्हें शाम 5 बजे तक जवाब देने के लिए कहा गया है।
राहुल गांधी ने अपने भाषण में ‘एप्स्टीन फाइल्स’ का उल्लेख किया। हालांकि, आसन पर बैठे सांसद जगदंबिका पाल द्वारा रोकने पर राहुल ने कहा कि वह एप्स्टीन का नाम आगे नहीं लेंगे।
अडानी और अंबानी पर आरोप
अपने भाषण में राहुल गांधी ने उद्योगपति गौतम अडानी का नाम लेते हुए केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि बजट और सरकारी नीतियों में अडानी का प्रभाव नजर आता है। राहुल ने यह भी कहा कि अमेरिका में अडानी के खिलाफ दायर मुकदमा प्रधानमंत्री मोदी को निशाना बनाने के लिए orchestrated है।
इसके अलावा, राहुल गांधी ने अनिल अंबानी का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें अब तक जेल क्यों नहीं भेजा गया, जबकि उनका नाम कथित तौर पर एप्स्टीन फाइल्स में शामिल है।
हरदीप सिंह पुरी का नाम और सवालराहुल गांधी ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी का नाम लेकर सवाल किया कि उन्हें एप्स्टीन से किसने मिलवाया। इस पर सत्ता पक्ष ने तत्काल आपत्ति जताई। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी के बयान संसदीय मर्यादा के खिलाफ हैं और उनके खिलाफ विशेषाधिकार हनन नोटिस जारी किया गया है।
सरकार का कहना है कि राहुल गांधी को सदन में बुलाकर अपने आरोपों के प्रमाण पेश करने को कहा जाएगा। बीजेपी प्रवक्ता डॉ. सुधांशु त्रिवेदी ने भी कहा कि संसद लोकतंत्र की सर्वोच्च संस्था है और ऐसे आरोप संसदीय परंपराओं को चोट पहुंचाते हैं।
हरदीप सिंह पुरी का करारा जवाबकेंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने राहुल गांधी के आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा, नेता दो प्रकार के होते हैं – एक जो जिम्मेदारी से देश के लिए काम करते हैं और दूसरा जो संसद में भाषण देकर चले जाते हैं।
पुरी ने स्पष्ट किया कि उनके और जेफरी एप्स्टीन के बीच हुई मुलाकात का उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों से कोई संबंध नहीं था। उनका मुख्य संपर्क लिंक्डइन के सह-संस्थापक रीड हॉफमैन से था, जिन्हें उन्होंने भारत आने का निमंत्रण दिया था।
उन्होंने बताया कि तीन मिलियन ईमेल में सिर्फ तीन-चार बार उनका नाम आया। एप्स्टीन से मुलाकात केवल कुछ प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में हुई और केवल एक ईमेल का आदान-प्रदान हुआ। यह बातचीत ‘मेक इन इंडिया’ जैसे विषयों पर हुई थी, और एप्स्टीन के कथित अपराधों से इसका कोई लेना-देना नहीं था।
पुरी ने जोर देकर कहा कि उन्हें एप्स्टीन की गतिविधियों में कोई दिलचस्पी नहीं थी और एप्स्टीन ने उन्हें ‘दोमुंहा’ तक कहा था। उन्होंने राहुल गांधी को सुझाव दिया कि वह ईमेल को ध्यानपूर्वक पढ़ें, ताकि वास्तविक तथ्यों की जानकारी सामने आए।