नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद पंजाब की राजनीति में एक बार फिर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। राघव चड्ढा ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपनी मुलाकात की तस्वीरें साझा कीं और इसे एक खास और यादगार मुलाकात बताया।
राघव चड्ढा की पीएम मोदी से यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां धीरे-धीरे तेज हो रही हैं। ऐसे में सवाल उठने लगा है कि क्या भाजपा पंजाब में चुनावी रणनीति को मजबूत करने के लिए राघव चड्ढा को कोई बड़ी जिम्मेदारी देने की तैयारी कर रही है। हालांकि, फिलहाल इस संबंध में पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
राघव चड्ढा उन नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने आम आदमी पार्टी से भाजपा में आए पंजाब के राज्यसभा सांसदों को पार्टी के साथ जोड़ने में अहम भूमिका निभाई। यही वजह है कि प्रधानमंत्री के साथ उनकी ताजा मुलाकात को राजनीतिक नजरिए से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पीएम मोदी से मुलाकात को बताया 'यादगार सुबह'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ तस्वीरें साझा करते हुए राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस मुलाकात को 'यादगार सुबह' बताया। उन्होंने पोस्ट में प्रधानमंत्री से मिलने का अवसर मिलने पर खुशी जताई और कहा कि दोनों के बीच विस्तृत तथा ज्ञानवर्धक चर्चा हुई।
राघव चड्ढा ने लिखा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का सौभाग्य मिला। एक विस्तृत और ज्ञानवर्धक चर्चा हुई। उनके कीमती समय और उनकी समझ व मार्गदर्शन से लाभ उठाने के अवसर के लिए मैं बहुत आभारी हूं।
हालांकि, राघव चड्ढा ने अपनी पोस्ट में यह स्पष्ट नहीं किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी बातचीत किन मुद्दों पर हुई। मुलाकात के एजेंडे को लेकर कोई विस्तृत जानकारी सामने नहीं आने के कारण राजनीतिक गलियारों में इसके अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं।
पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचलराघव चड्ढा और पीएम मोदी की मुलाकात को पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर भी देखा जा रहा है। आम आदमी पार्टी से जुड़े रहे पंजाब के छह राज्यसभा सांसदों के भाजपा में आने के बाद राघव चड्ढा की राजनीतिक भूमिका पहले ही चर्चा में रही है। अब प्रधानमंत्री से उनकी व्यक्तिगत मुलाकात ने इन अटकलों को और हवा दे दी है।
कुछ दिन पहले ही प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यसभा सांसदों के साथ मुलाकात की थी। इस दौरान राघव चड्ढा और आम आदमी पार्टी से भाजपा में आए अन्य सांसद भी प्रधानमंत्री से मिले थे। इसके बाद अब राघव चड्ढा की पीएम मोदी के साथ अलग से हुई मुलाकात को लेकर सियासी चर्चाएं और तेज हो गई हैं।
राजनीतिक जानकारों की नजर इस बात पर भी है कि भाजपा पंजाब में अपने संगठन और चुनावी रणनीति को किस तरह आगे बढ़ाती है। ऐसे में राघव चड्ढा का आम आदमी पार्टी के भीतर का अनुभव और पंजाब की राजनीति की उनकी समझ भाजपा के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। हालांकि, यह अभी अटकलों का हिस्सा है और पार्टी की ओर से किसी नई जिम्मेदारी को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।
सुखबीर सिंह बादल की पीएम मोदी से मुलाकात भी चर्चा मेंराघव चड्ढा की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात ऐसे समय में हुई है, जब इससे ठीक एक दिन पहले यानी शुक्रवार को शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने भी पीएम मोदी से मुलाकात की थी।
सुखबीर सिंह बादल की मुलाकात के बाद भाजपा और शिरोमणि अकाली दल के बीच संभावित गठबंधन को लेकर एक बार फिर चर्चाएं शुरू हो गई थीं। दोनों दल पहले भी राजनीतिक सहयोगी रह चुके हैं, लेकिन बाद में उनके रास्ते अलग हो गए थे। अब पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले दोनों के बीच संभावित राजनीतिक समीकरणों को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं।
हालांकि, अभी तक भाजपा या अकाली दल की ओर से किसी नए गठबंधन को लेकर कोई ठोस घोषणा नहीं की गई है। ऐसे में राघव चड्ढा और सुखबीर सिंह बादल की प्रधानमंत्री मोदी से लगातार हुई मुलाकातों ने पंजाब की राजनीति को लेकर चर्चाओं को और बढ़ा दिया है।
आखिर राघव चड्ढा को लेकर ही क्यों बढ़ा सस्पेंस?राघव चड्ढा की राजनीतिक सक्रियता को लेकर उत्सुकता की एक बड़ी वजह पंजाब विधानसभा चुनाव 2022 में उनकी भूमिका भी रही है। 2022 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी ने पंजाब में शानदार जीत हासिल करते हुए पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई थी। उस चुनाव के दौरान राघव चड्ढा ने पार्टी के चुनाव प्रचार और रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
हालांकि, राघव चड्ढा ने खुद विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा था, लेकिन उस समय पंजाब की राजनीति में उनकी भूमिका को लेकर काफी चर्चाएं थीं। एक दौर में उन्हें पंजाब सरकार का 'डिफैक्टो मुख्यमंत्री' तक कहा जाने लगा था। राजनीतिक हलकों में ऐसी अटकलें भी थीं कि सरकार के कामकाज और महत्वपूर्ण फैसलों में राघव चड्ढा की भूमिका काफी प्रभावशाली थी।
उस समय आम आदमी पार्टी की पंजाब में बड़ी जीत और पार्टी के भीतर राघव चड्ढा के बढ़ते प्रभाव ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर भी एक चर्चित चेहरा बना दिया था। हालांकि, बाद के वर्षों में राजनीतिक परिस्थितियां बदलीं और राघव चड्ढा का आम आदमी पार्टी से दूरी बढ़ती गई।
अब वह भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद के तौर पर संसद में हैं। ऐसे में पंजाब की राजनीति में उनके पुराने अनुभव और आम आदमी पार्टी के संगठन व रणनीति की उनकी समझ को देखते हुए यह सवाल उठ रहा है कि क्या भाजपा उन्हें आने वाले चुनाव में कोई महत्वपूर्ण भूमिका दे सकती है।
क्या भाजपा देगी कोई बड़ी जिम्मेदारी?फिलहाल यह साफ नहीं है कि राघव चड्ढा को भाजपा की ओर से पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जाएगी या नहीं। प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी हालिया मुलाकात को लेकर पार्टी की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है, जिससे यह पुष्टि हो सके कि उन्हें कोई नया पद या चुनावी जिम्मेदारी मिलने वाली है।
फिर भी, जिस समय यह मुलाकात हुई है, उसे देखते हुए राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर जारी है। पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा राज्य में अपने राजनीतिक आधार को मजबूत करने की कोशिश कर रही है और ऐसे में राघव चड्ढा जैसे नेता की भूमिका को लेकर चर्चा स्वाभाविक है।
2022 में आम आदमी पार्टी की पंजाब में जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके राघव चड्ढा अब भाजपा के साथ हैं। ऐसे में क्या भाजपा उनके अनुभव का इस्तेमाल पंजाब में अपनी चुनावी रणनीति को मजबूत करने के लिए करेगी और क्या उन्हें कोई अहम जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, इसका जवाब आने वाले समय में ही मिलेगा। फिलहाल प्रधानमंत्री मोदी से उनकी मुलाकात ने पंजाब की सियासत में इस सवाल को जरूर गर्म कर दिया है।