जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए अपनी फीस संरचना में ऐतिहासिक बदलाव किया है। विश्वविद्यालय ने 80 प्रतिशत तक की कटौती करते हुए यह निर्णय लिया है कि वर्ष 2025-26 के शैक्षणिक सत्र से विदेशी छात्रों को कम दरों पर उच्च शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय दाखिलों में गिरावट का सामना करना पड़ रहा है।
SAARC देशों के छात्रों को सबसे बड़ा लाभनए शुल्क ढांचे के तहत सबसे अधिक लाभ दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) देशों के छात्रों को मिलेगा। मानविकी (Humanities) पाठ्यक्रमों के लिए मात्र $200 और विज्ञान (Science) के लिए $300 शुल्क तय किया गया है। वहीं, अफ्रीकी और लैटिन अमेरिकी देशों के छात्रों के लिए यह शुल्क $400 से $300 तक कर दिया गया है, जो कि पहले की तुलना में 80 प्रतिशत तक कम है।
पश्चिम अफ्रीकी छात्रों और अन्य क्षेत्रों के लिए भी रियायतपश्चिम अफ्रीका के छात्रों को अब मानविकी पाठ्यक्रमों के लिए $500 और विज्ञान पाठ्यक्रमों के लिए $600 शुल्क देना होगा। अन्य देशों के छात्रों के लिए भी शुल्क घटाकर $1000 (Humanities) और $1250 (Science) कर दिया गया है।
नामांकन शुल्क अलग सेसभी अंतरराष्ट्रीय छात्रों को अब एक $500 का एकमुश्त रजिस्ट्रेशन शुल्क भी देना होगा, जो पहले से तय है।
पहले कितनी थी फीस?JNU की पिछली फीस संरचना के अनुसार, विदेशी छात्रों को प्रत्येक सेमेस्टर के लिए विज्ञान विषयों में $1900 और मानविकी विषयों में $1500 का शुल्क देना होता था। इनमें M.Tech, MPH, MA, MSc, MCA, BA(Hons), BSc-MSc इंटीग्रेटेड प्रोग्राम और पार्ट-टाइम कोर्स भी शामिल थे।
हालांकि SAARC देशों के छात्रों के लिए यह शुल्क पहले ही थोड़ा कम था — $700 (Science) और $600 (Others) प्रति सेमेस्टर। तिब्बती छात्रों के लिए JNU पहले से ही भारतीय छात्रों के समान शुल्क लेता है।
JNU का उद्देश्य: शैक्षणिक समावेशिता और वैश्विक पहुंचJNU प्रशासन के अनुसार, इस बदलाव का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर देशों के छात्रों को भारत में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करने का अवसर देना है। विश्वविद्यालय का मानना है कि शैक्षणिक विविधता और अंतरराष्ट्रीय भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए यह कदम जरूरी था।
इसके साथ ही विश्वविद्यालय को उम्मीद है कि यह परिवर्तन SAARC, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के छात्रों को JNU की ओर आकर्षित करेगा और संस्थान की वैश्विक रैंकिंग में सुधार भी ला सकेगा।