धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद पुलिस की अपील, लाउडस्पीकर से कहा- 'जंतर-मंतर खाली करें'

नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के शनिवार, 25 जुलाई 2026 की शाम इस्तीफा देने के कुछ ही समय बाद दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर कार्रवाई शुरू कर दी। पुलिसकर्मी लाउडस्पीकर के माध्यम से लगातार प्रदर्शनकारी छात्रों और युवाओं से शांतिपूर्वक धरना स्थल खाली करने की अपील करते दिखाई दिए। पुलिस का कहना है कि आंदोलन की सबसे प्रमुख मांग, यानी शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, पूरी हो चुकी है। ऐसे में अब प्रदर्शन समाप्त कर जंतर-मंतर को खाली कराया जाना आवश्यक है।

लंबे आंदोलन का कारोबार और जनजीवन पर पड़ा असर


एक महीने से अधिक समय तक चले इस छात्र आंदोलन का प्रभाव केवल यातायात व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा। लगातार धरना, सुरक्षा व्यवस्था और रूट डायवर्जन के कारण लुटियंस दिल्ली के कई प्रमुख इलाकों में सामान्य गतिविधियां प्रभावित रहीं। खासतौर पर जंतर-मंतर के आसपास के बाजारों और व्यावसायिक क्षेत्रों में कारोबार पर इसका सीधा असर देखने को मिला।

फ्ली मार्केट और ऐतिहासिक कनॉट प्लेस (सीपी) के व्यापारियों का कहना है कि बीते कई सप्ताह उनके लिए बेहद सुस्त रहे। उनके अनुसार पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई, जबकि स्थानीय ग्राहकों की आवाजाही भी पहले की तुलना में काफी घट गई। व्यापारियों का मानना है कि लगातार प्रदर्शन और सुरक्षा प्रतिबंधों के कारण बाजारों की रौनक प्रभावित हुई।

मेट्रो स्टेशन खुलने से यात्रियों और कारोबारियों को राहत

प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा कारणों से बंद किए गए आसपास के तीन प्रमुख मेट्रो स्टेशनों को अब दोबारा आम लोगों के लिए खोल दिया गया है। मेट्रो सेवाएं सामान्य होने के बाद यात्रियों, कार्यालय जाने वाले लोगों और स्थानीय कारोबारियों ने राहत महसूस की है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में क्षेत्र में सामान्य गतिविधियां धीरे-धीरे फिर से पटरी पर लौट सकती हैं।
सरकार और CJP के बीच बातचीत का नया चरण शुरू

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार और आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्र संगठन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बीच वार्ता का नया दौर भी शुरू हो गया है। सरकार की ओर से भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा तथा प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह बातचीत में शामिल हुए। वहीं छात्र संगठन की ओर से मुख्य प्रवक्ता सौरभ दास और आशुतोष रांका ने प्रदर्शनकारी छात्रों का पक्ष सरकार के सामने रखा।

इस्तीफे पर धर्मेंद्र प्रधान ने कही यह बात

अपने त्यागपत्र में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि उनका फैसला किसी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा से जुड़ा नहीं है। उन्होंने लिखा कि दिल्ली के जंतर-मंतर और देश के विभिन्न हिस्सों में बने हालात का कोई असामाजिक या राष्ट्रविरोधी तत्व फायदा न उठा सके, इसी उद्देश्य से उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए पद छोड़ने का निर्णय लिया। उन्होंने यह भी कहा कि सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदारी निभाना उनके लिए हमेशा सर्वोपरि रहा है।

आंदोलन की अन्य मांगों पर भी बनी सहमति

शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद छात्र संगठन CJP ने स्पष्ट किया कि आंदोलन को पूरी तरह समाप्त करने के लिए उनकी कुछ अन्य प्रमुख मांगों पर भी सरकार का निर्णय आवश्यक था। अब संगठन की ओर से दावा किया गया है कि सरकार ने इन मांगों पर भी सकारात्मक सहमति जताई है।

इन मांगों में 3 मई को रद्द हुई NEET-UG परीक्षा से जुड़े घटनाक्रम के बाद मानसिक तनाव के कारण जान गंवाने वाले परीक्षार्थियों के परिवारों को ₹1 करोड़ की आर्थिक सहायता देने का प्रस्ताव शामिल है। इसके अलावा आंदोलन के दौरान दिल्ली और अन्य राज्यों में प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं पर दर्ज सभी पुलिस मुकदमों तथा एफआईआर को बिना शर्त वापस लेने की मांग पर भी सरकार ने सकारात्मक रुख दिखाया है। इन सहमतियों के बाद लंबे समय से जारी छात्र आंदोलन के पूरी तरह समाप्त होने और शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधारों की दिशा में आगे बढ़ने की उम्मीद और मजबूत हो गई है।