3 महीने बाद पूरी तरह प्राइवेट हो जाएगा IDBI बैंक, सरकार ने तय की अक्टूबर की डेडलाइन

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने एक अहम फैसला लेते हुए सार्वजनिक क्षेत्र के IDBI बैंक के निजीकरण की अंतिम डेडलाइन तय कर दी है। सरकार ने घोषणा की है कि IDBI बैंक की रणनीतिक बिक्री अक्टूबर 2025 तक पूरी कर ली जाएगी, यानी आगामी तीन महीनों में यह सरकारी बैंक पूरी तरह प्राइवेट हाथों में चला जाएगा। निवेश और लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी साझा की है।

फाइनल स्टेज में है प्रक्रिया

IDBI बैंक के निजीकरण की प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। अधिकारी ने बताया कि फिलहाल संभावित खरीदारों के साथ शेयर खरीद समझौते (SPA) की तैयारी चल रही है और यह प्रक्रिया सही दिशा में आगे बढ़ रही है। यह सौदा बैंकिंग सेक्टर में अब तक का सबसे बड़ा और चर्चित विनिवेश माना जा रहा है।

हिस्सेदारी का पूरा विवरण


IDBI बैंक में सरकार की हिस्सेदारी 30.48 प्रतिशत है, जबकि बीमा कंपनी LIC के पास 30.24 प्रतिशत हिस्सेदारी है। यानी कुल मिलाकर सरकार और एलआईसी मिलकर इस बैंक की 60.72 प्रतिशत हिस्सेदारी निजी निवेशकों को सौंपने जा रहे हैं। यह हिस्सेदारी करीब 33,000 करोड़ रुपये की मानी जा रही है।

इन कंपनियों ने दिखाई रुचि

IDBI बैंक की हिस्सेदारी खरीदने के लिए जिन संभावित निवेशकों को फाइनल लिस्ट में शामिल किया गया है, उनमें शामिल हैं —

—फेयरफैक्स इंडिया होल्डिंग्स (CSB बैंक की प्रवर्तक)

—एमिरेट्स एनबीडी

—कोटक महिंद्रा बैंक

इन कंपनियों को जल्दी ही अपनी वित्तीय बोलियाँ जमा करनी होंगी, जिसके बाद सरकार सबसे उपयुक्त बोलीदाता के साथ SPA को अंतिम रूप देगी।

सरकार को मिलेगा पूंजी लाभ

IDBI बैंक की रणनीतिक बिक्री से सरकार को ब्याज मुक्त पूंजी जुटाने में मदद मिलेगी। वित्त वर्ष 2025–26 के लिए सरकार ने विनिवेश और संपत्ति मुद्रीकरण से 47,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है। यह सौदा इस दिशा में सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मिल सकती है प्रबंधन की पूरी आज़ादी


बिक्री प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए सरकार शेयर खरीद समझौते में संभावित खरीदारों को बैंक के प्रबंधन में पूरी स्वतंत्रता देने का प्रस्ताव भी कर सकती है। इसका मतलब है कि खरीदार बैंक के संचालन, कर्मचारियों और प्रबंधन में अपनी पसंद से बदलाव कर सकेगा।

कर्मचारियों के हितों का रखा जाएगा ध्यान


हालांकि बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के तहत कोई भी शेयरधारक या उसके साथ जुड़े साझेदार 26 प्रतिशत से ज्यादा वोटिंग अधिकार नहीं रख सकते, भले ही उनके पास हिस्सेदारी ज्यादा हो। ऐसे में सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि कर्मचारियों और अन्य हितधारकों के हितों को ध्यान में रखते हुए SPA में आवश्यक प्रावधान किए जाएंगे।

भारत का दूसरा सबसे बड़ा निजीकरण सौदा

यह सौदा फ्लिपकार्ट-वॉलमार्ट सौदे के बाद भारत में अब तक का दूसरा सबसे बड़ा निजीकरण सौदा होगा। बैंकिंग, फाइनेंस और बीमा (BFSI) क्षेत्र में तो यह अब तक का सबसे बड़ा सौदा माना जा रहा है।