सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD का बड़ा एक्शन, 51 जर्जर इमारतों में से 27 पर चलेगा बुलडोजर

दिल्ली के सत्य निकेतन में 6 सितंबर को हुए बिल्डिंग हादसे में 7 लोगों की मौत के बाद नगर निगम ने जर्जर और नियमों का उल्लंघन करने वाली इमारतों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। MCD के सर्वे में 51 इमारतों को खतरनाक और जर्जर पाया गया है। इनमें से 27 इमारतों को गिराने के आदेश दिए गए हैं। इन भवनों पर डिमोलिशन की कार्रवाई आज से शुरू की जा रही है।

कार्रवाई से पहले कमजोर इमारतों को लोहे के बीम का सहारा दिया जा रहा है, ताकि उन्हें नियंत्रित तरीके से गिराया जा सके। इसका उद्देश्य आसपास की संपत्तियों और कार्रवाई में जुटी टीम की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

सत्य निकेतन में जर्जर इमारतों पर कार्रवाई

MCD की टीमों ने तीन जोन में संचालित प्राइवेट हॉस्टल और PG का सर्वे किया। इस दौरान कुल 51 इमारतें ऐसी मिलीं, जिन्हें खतरनाक या जर्जर माना गया। इनमें 27 भवनों को तुरंत गिराने का आदेश दिया गया है, जबकि 7 इमारतों को सील किया गया है।

इसके अलावा 35 भवन मालिकों को नोटिस जारी किए गए हैं। MCD के वेस्ट जोन और शाहदरा साउथ जोन में आज से जर्जर इमारतों को गिराने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।

सत्य निकेतन में हॉस्टल डेज के पास स्थित एक जर्जर इमारत पर भी कार्रवाई की तैयारी चल रही है। मंगलवार को यहां बने वॉटर प्लांट और कैंटीन को हटाया गया। टिन शेड को गैस कटर से काटकर निकाला गया, जिसके बाद अब पूरी इमारत को सुरक्षित तरीके से गिराने की तैयारी की जा रही है।

दरारों वाली इमारतों में रह रहे थे छात्र


सर्वे के दौरान MCD की टीमों को कई ऐसी जर्जर इमारतें भी मिलीं, जहां छात्र अभी रह रहे थे। कुछ छात्रों ने अपनी स्थिति का वीडियो बनाकर इमारतों की हालत दिखाई। एक वीडियो में छात्र दीवारों में आई दरारों को लेकर चिंता जताते नजर आए।

छात्रों का कहना था कि दरार बढ़ती जा रही है और उन्हें डर है कि इमारत का कोई हिस्सा गिर सकता है। सत्य निकेतन में हुए हादसे के बाद कई छात्र इलाका छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर रहने के लिए दूसरे ठिकाने तलाश रहे हैं। हादसे को लेकर छात्रों के परिवारों में भी चिंता और नाराजगी बताई गई है।

हाईकोर्ट की फटकार के बाद बढ़ी जांच

सत्य निकेतन हादसे के बाद MCD ने PG और छात्र हॉस्टलों का निरीक्षण तेज कर दिया है। हाईकोर्ट की फटकार के बाद अधिकारी हॉस्टलों में जाकर फायर NOC, संचालन की अनुमति और अन्य जरूरी दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं।

निरीक्षण के दौरान कई ऐसी इमारतें मिलीं, जहां आपातकालीन निकास की व्यवस्था नहीं थी। कुछ मकान मालिकों के पास फायर विभाग की NOC भी नहीं पाई गई। नियमों का पालन नहीं करने वाले परिसरों को सील किए जाने की चेतावनी दी गई है।

मंगलवार को लक्ष्मी नगर, ललिता पार्क और शकरपुर के 35 PG संचालकों को नोटिस दिया गया। कुछ जगह फायर NOC नहीं मिली, जबकि कुछ PG में आने-जाने के लिए केवल एक रास्ता था। MCD ने कहा है कि यदि सुरक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो संबंधित PG को सील किया जा सकता है।

तीन महीने में 959 संपत्तियों पर कार्रवाई

MCD के अनुसार, दिल्ली में अनधिकृत निर्माण के खिलाफ पिछले तीन महीने से विशेष अभियान चलाया जा रहा है। 1 जून से 31 अगस्त के बीच 959 संपत्तियों के खिलाफ डिमोलिशन की कार्रवाई की गई।

इसी दौरान 1 जून से 8 सितंबर के बीच 471 संपत्तियों को सील किया गया और अनधिकृत निर्माण से जुड़े 1,551 शो-कॉज नोटिस जारी किए गए। इस अवधि में अवैध निर्माण गिराने के लिए 753 डिमोलिशन ऑर्डर भी जारी किए गए।
सत्य निकेतन हादसे में लेबर कॉन्ट्रैक्टर गिरफ्तार

बिल्डिंग हादसे की पुलिस जांच भी आगे बढ़ रही है। सोमवार को गिरफ्तार किए गए हरिराम गुप्ता और उर्मिला गुप्ता को अदालत ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। वहीं महेश को दो दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया।

पुलिस पूछताछ में महेश ने बताया कि वह अपने माता-पिता की ओर से इमारत के रखरखाव का काम देखता था। उसके अनुसार, अगस्त 2025 में यह भवन 'हॉस्टल डेज' नाम के PG संचालकों को लीज पर दिया गया था।

महेश ने पूछताछ में यह भी बताया कि इमारत के बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था। ग्राउंड फ्लोर पर व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए जगह बढ़ाने का काम भी किया जा रहा था। हादसे के दिन स्थानीय लोगों से इमारत गिरने की सूचना मिलने के बाद वह घर से निकलकर राजस्थान के भिवाड़ी स्थित अपने ससुराल चला गया था।

इस मामले में पुलिस ने लेबर कॉन्ट्रैक्टर सनोज को उत्तर प्रदेश के कासगंज से गिरफ्तार किया है। उसे पूछताछ के लिए दिल्ली लाया गया है।

PG और हॉस्टल के लिए नए नियमों की तैयारी


दिल्ली में जर्जर और अनधिकृत इमारतों पर कार्रवाई के साथ ही PG और हॉस्टल को नियमन के दायरे में लाने की तैयारी भी चल रही है। दिल्ली सरकार विधानसभा में 'पेइंग गेस्ट एकॉमोडेशन रेगुलेशन एंड वेलफेयर बिल' लाने की तैयारी कर रही है।

प्रस्तावित कानून के तहत दिल्ली में संचालित प्रत्येक PG का अनिवार्य रजिस्ट्रेशन किया जाएगा। संचालकों को 90 दिनों के भीतर जोन अथॉरिटी से ऑपरेटिंग लाइसेंस लेना होगा। इसके लिए पुलिस, MCD और स्थानीय प्रशासन से जरूरी NOC लेने का प्रावधान प्रस्तावित है। रजिस्ट्रेशन के बाद प्रत्येक PG को एक यूनिक PG रजिस्ट्रेशन नंबर यानी PGRN दिया जाएगा।

GovPG पोर्टल पर मिलेगी PG की जानकारी

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत GovPG पोर्टल तैयार किया जाएगा। इस पर PG और हॉस्टल की सूची के साथ किराया, उपलब्ध सुविधाएं और सुरक्षा संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने की बात कही गई है।

छात्र इस पोर्टल के माध्यम से गुमनाम शिकायत भी दर्ज करा सकेंगे। यानी शिकायत करने वाले छात्र की पहचान उजागर किए बिना उसकी शिकायत पर कार्रवाई का प्रावधान प्रस्तावित है।

किराए और सिक्योरिटी डिपॉजिट के लिए भी नियम

प्रस्तावित कानून में PG के किराए और सिक्योरिटी डिपॉजिट को लेकर भी नियम बनाने की बात है। रेंट रेगुलेशन कमेटी अलग-अलग क्षेत्रों के हिसाब से किराए का बैंड तय करेगी।

PG संचालक अधिकतम तीन महीने की सिक्योरिटी डिपॉजिट ले सकेंगे और तीन महीने से अधिक का एडवांस लेने पर रोक होगी। PG छोड़ने के लिए 30 दिन का नोटिस देने का प्रावधान प्रस्तावित है। इसके अलावा लिंग, जाति, धर्म या मूल राज्य के आधार पर छात्रों के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकेगा।

CCTV और सुरक्षा गार्ड की व्यवस्था होगी जरूरी

प्रस्तावित नियमों में PG की सुरक्षा को लेकर भी कई प्रावधान रखे गए हैं। सभी प्रवेश द्वारों और कॉमन एरिया में CCTV कैमरे लगाना अनिवार्य होगा। कैमरों की रिकॉर्डिंग कम से कम 30 दिनों तक सुरक्षित रखने की बात कही गई है।

जिन PG में 15 से अधिक छात्र रहेंगे, वहां रात के समय सुरक्षा गार्ड रखना जरूरी होगा। PG और हॉस्टल में विजिटर रजिस्टर भी रखना होगा। इसके अलावा छात्रों की सुरक्षा के लिए PG से 500 मीटर के दायरे में वार्डन की उपलब्धता का प्रावधान भी प्रस्तावित किया गया है।