पीएम मोदी की अपील के बाद दिल्ली सरकार का बड़ा कदम, हर हफ्ते ‘नो कार डे’ अनिवार्य, अफसरों की विदेश यात्राओं पर लगी रोक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पेट्रोलियम खपत घटाने और ऊर्जा संरक्षण की अपील के बाद दिल्ली प्रशासन ने सख्त और व्यापक कदम उठाए हैं। राजधानी में लोक निर्माण विभाग (PWD), दिल्ली जल बोर्ड (DJB) और सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग की ओर से संयुक्त रूप से 11 बिंदुओं वाला नया दिशा-निर्देश जारी किया गया है। इस आदेश को तुरंत प्रभाव से लागू कर दिया गया है, जिसके तहत सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए परिवहन और यात्रा से जुड़े कई बड़े बदलाव किए गए हैं।

नई व्यवस्था के अनुसार अब सभी विभागों में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों को सप्ताह में एक दिन अनिवार्य रूप से “नो कार डे” का पालन करना होगा। इस दिन सरकारी दफ्तर आने-जाने के लिए निजी या विभागीय कारों के उपयोग को हतोत्साहित किया जाएगा और इसके स्थान पर सार्वजनिक परिवहन, इलेक्ट्रिक वाहनों तथा साझा यात्रा प्रणाली (कार पूलिंग) को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके साथ ही सभी सरकारी कार्यालयों और परिसरों में इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने का भी निर्देश दिया गया है, ताकि ई-वाहनों को अपनाने की प्रक्रिया तेज हो सके।

सरकारी काफिले पर लगाम, कार पूलिंग और साझा यात्रा पर जो

निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि निरीक्षण, फील्ड विजिट और सरकारी कार्यक्रमों के दौरान अलग-अलग वाहनों के काफिले की बजाय कार पूलिंग को प्राथमिकता दी जाए। अधिकारियों को सलाह दी गई है कि उद्घाटन समारोह, निरीक्षण दौरे और अन्य आधिकारिक आयोजनों में सामूहिक रूप से इलेक्ट्रिक वाहनों, साझा वाहनों या सार्वजनिक परिवहन का उपयोग किया जाए। इसके अलावा अनावश्यक यात्रा को कम करने के लिए विभागों को वर्चुअल बैठकों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया है।

यह पूरा कदम उस व्यापक नीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें देशभर में ईंधन खपत घटाने और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है। केंद्र सरकार के स्तर पर लगातार दिए जा रहे पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा बचत के संदेशों के बाद अब दिल्ली प्रशासन भी उसी दिशा में सक्रिय दिखाई दे रहा है।
डीजल आधारित सिस्टम की जगह इलेक्ट्रिक और हरित विकल्प

नए आदेश में तकनीकी और संचालन स्तर पर भी बड़े बदलाव सुझाए गए हैं। विभागों को निर्देश दिया गया है कि डीजल या ट्रैक्टर चालित पंपों की जगह अब इलेक्ट्रिक पंपों और आधुनिक स्थायी पंपिंग स्टेशनों का अधिक उपयोग किया जाए। इसके साथ ही सरकारी बागवानी और हरित क्षेत्रों के रखरखाव में केवल जैविक खाद के उपयोग को अनिवार्य बनाने की बात कही गई है।

इसके अलावा ग्रीन वेस्ट मैनेजमेंट और प्रोसेसिंग से जुड़े प्रोजेक्ट्स को भी तेज गति से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का उद्देश्य पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता को कम करके इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और पर्यावरण-अनुकूल तकनीकों को बढ़ावा देना है, जिससे प्रशासनिक व्यवस्था अधिक टिकाऊ और आधुनिक बन सके।

विदेश यात्राओं पर पूर्ण रोक, लंबित प्रस्ताव भी निरस्त

आदेश का सबसे सख्त हिस्सा विदेश यात्रा से जुड़ा है। इसमें स्पष्ट कहा गया है कि अगले आदेश तक किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को निजी या सरकारी किसी भी उद्देश्य से विदेश यात्रा की अनुमति नहीं दी जाएगी। यहां तक कि पहले से स्वीकृत अवकाश भी रद्द माने जाएंगे और सभी लंबित विदेश यात्रा प्रस्ताव स्वतः निरस्त कर दिए जाएंगे।

प्रशासन ने सभी विभागों को यह भी निर्देश दिया है कि इन आदेशों के पालन की साप्ताहिक अनुपालन रिपोर्ट अनिवार्य रूप से जमा की जाए, ताकि निगरानी और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।

इस पूरे मामले पर दिल्ली सरकार में मंत्री प्रवेश वर्मा ने कहा कि इन कदमों का उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना और पेट्रोलियम खपत को कम करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकारी वाहनों का सीमित उपयोग, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा, कार पूलिंग और वर्चुअल मीटिंग जैसी व्यवस्थाएं प्रशासन को अधिक आधुनिक और जिम्मेदार बनाएंगी।

यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब प्रधानमंत्री Narendra Modi की ओर से देश में ऊर्जा बचत और ईंधन खपत घटाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है, और विभिन्न राज्य सरकारें भी इसी दिशा में नीतिगत बदलाव कर रही हैं।