दिल्ली की बहुचर्चित आबकारी नीति से जुड़े मामले में बड़ा न्यायिक घटनाक्रम सामने आया है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने मुख्यमंत्री Arvind Kejriwal और पूर्व उपमुख्यमंत्री Manish Sisodia को आरोपमुक्त कर दिया है। इस फैसले को केंद्रीय जांच एजेंसी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
मामले की सुनवाई Rouse Avenue Court में हुई, जहां दोनों नेताओं के साथ आम आदमी पार्टी के नेता दुर्गेश पाठक भी पेश हुए। अदालत में सीबीआई द्वारा दायर केस पर विस्तृत बहस के बाद विशेष न्यायाधीश ने अपना निर्णय सुनाया।
सुनवाई के दौरान स्पेशल जज Jitendra Singh ने जांच एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने टिप्पणी की, “जब आप बहुत अधिक फाइलें पढ़ते हैं, तो कभी-कभी फाइलें खुद आपसे संवाद करने लगती हैं।” यह टिप्पणी सुनवाई के दौरान प्रस्तुत दस्तावेजों और साक्ष्यों की गुणवत्ता को लेकर कही गई।
अदालत ने स्पष्ट किया कि वह शुरुआत से ही कथित कबूलनामे (कन्फेशनल स्टेटमेंट) की मांग कर रही थी, लेकिन उसे चार्जशीट के साथ प्रस्तुत नहीं किया गया। साथ ही, कथित ‘स्टार गवाह’ की सूची भी समय पर उपलब्ध नहीं कराई गई। न्यायाधीश ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि अब तक उन्हें कबूलनामे की प्रति तक नहीं सौंपी गई है।
एजेंसी की ओर से दलील दी गई कि संबंधित जानकारी सीलबंद लिफाफे में दी गई थी। हालांकि, अदालत ने इस तर्क को पर्याप्त नहीं माना और जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए। जज ने कहा कि उन्हें जांच एजेंसी के वकील से ईमानदारी और स्पष्टता की अपेक्षा है।
इस निर्णय के बाद दिल्ली की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी ने इसे सत्य की जीत बताया है, जबकि विपक्षी दलों की ओर से इस मामले पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। फिलहाल, अदालत के इस आदेश ने दिल्ली शराब घोटाले से जुड़े सीबीआई केस में एक अहम मोड़ ला दिया है।