नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने एक बार फिर अपने तेवर कड़े कर दिए हैं। झारखंड के गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि पार्टी संसद में उन्हें नेता प्रतिपक्ष के पद से हटाने के लिए प्रस्ताव लाने पर विचार कर सकती है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की विदेश यात्राओं और उनसे जुड़े विभिन्न पहलुओं की जवाबदेही तय होना आवश्यक है।
निशिकांत दुबे का कहना है कि वर्ष 2004 से 2026 के बीच राहुल गांधी ने जितनी भी विदेश यात्राएं की हैं, उनके उद्देश्य, मुलाकातों और गतिविधियों को लेकर सार्वजनिक रूप से कभी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई। उनके अनुसार, देश की जनता को यह जानने का अधिकार है कि इन दौरों के दौरान राहुल गांधी किन लोगों से मिले और किस उद्देश्य से विदेश गए।
विदेश यात्राओं और जॉर्ज सोरोस से जुड़े लोगों पर उठाए सवालभाजपा सांसद ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी जब भी विदेश यात्रा पर जाते हैं, तो वहां भारत सरकार, देश की नीतियों और संविधान को लेकर आलोचनात्मक बयान देते हैं। उन्होंने कहा कि यह जानना जरूरी है कि विदेशों में उनकी मुलाकातें किन लोगों से होती हैं और उन बैठकों में किन विषयों पर चर्चा की जाती है।
दुबे ने यह भी दावा किया कि राहुल गांधी की कुछ विदेश यात्राओं के दौरान अमेरिकी उद्योगपति जॉर्ज सोरोस से जुड़े लोगों की मौजूदगी रही। उन्होंने इस आधार पर सवाल उठाया कि इन मुलाकातों का उद्देश्य क्या था और क्या इनका किसी राजनीतिक या अन्य गतिविधि से कोई संबंध था।
इसके साथ ही उन्होंने वर्ष 2008 में कांग्रेस और चीन के बीच हुए कथित समझौते का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि यदि ऐसा कोई समझौता हुआ था, तो उसे अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया और उसकी पूरी जानकारी देश के सामने क्यों नहीं रखी गई।
SIT जांच की मांग, लगाए गंभीर आरोपनिशिकांत दुबे ने मांग की कि राहुल गांधी की वर्ष 2004 से 2026 तक की सभी विदेश यात्राओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए। इसके लिए उन्होंने विशेष जांच दल (SIT) गठित करने की मांग करते हुए कहा कि उनके विदेश दौरों, संपर्कों और कथित समझौतों की पूरी पड़ताल होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष जैसा संवैधानिक पद संभालने वाले व्यक्ति से अपेक्षा होती है कि वह विदेश में भारत के हितों और नीतियों का सम्मानपूर्वक प्रतिनिधित्व करे। दुबे ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी विदेशी ताकतों के प्रभाव में काम कर रहे हैं और उनके कुछ कदम देश के हितों के खिलाफ बताए जा सकते हैं। उन्होंने यहां तक आरोप लगाया कि राहुल गांधी देश को विभाजित करने वाली ताकतों के एजेंडे को बढ़ावा दे रहे हैं।
राहुल के सवालों के बीच आया भाजपा का पलटवारभाजपा सांसद का यह बयान ऐसे समय आया है, जब राहुल गांधी संसद के भीतर लगातार केंद्र सरकार पर विभिन्न मुद्दों को लेकर हमलावर हैं। हाल ही में 20 जुलाई को हुए छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई, पेलेट गन के इस्तेमाल और छात्रों पर हुए लाठीचार्ज का मुद्दा उठाते हुए राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाब मांगा था।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा की ओर से आया यह बयान उसी राजनीतिक टकराव की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष एक-दूसरे पर लगातार आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं।
पहले भी संसद में उठ चुका है मामलायह पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी को लेकर संसद में इस तरह की कार्रवाई की चर्चा हुई हो। इससे पहले फरवरी 2026 में भी सरकार की ओर से लोकसभा में राहुल गांधी के खिलाफ एक सब्सटेंसिव मोशन (गंभीर प्रस्ताव) लाया गया था। इसके अतिरिक्त, उनके विभिन्न भाषणों और बयानों को लेकर विशेषाधिकार हनन के प्रस्ताव की चेतावनियां और नोटिस भी समय-समय पर सामने आते रहे हैं।
बजट सत्र के दौरान भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने लोकसभा में नियम 352(5) और 353 के तहत राहुल गांधी के खिलाफ एक सब्सटेंसिव मोशन पेश किया था। उस प्रस्ताव में उन पर सदन को कथित रूप से गुमराह करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया था। साथ ही उनकी लोकसभा सदस्यता समाप्त करने और भविष्य में चुनाव लड़ने पर रोक लगाने की मांग भी की गई थी। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निर्णय संसद की निर्धारित संसदीय प्रक्रिया के अनुसार ही लिया जाना होता है।