नेपाल में आई भीषण फ्लैश फ्लड के बाद हालात गंभीर बने हुए हैं। सैलाब में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 600 के करीब पहुंच गई है, जबकि करीब 2,000 लोगों से अभी संपर्क नहीं हो पाया है। लापता लोगों में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। इनमें लगभग 320 भारतीय नागरिक बताए जा रहे हैं, जिनसे संपर्क स्थापित करने के प्रयास जारी हैं। लापता भारतीयों में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए कुछ तीर्थयात्री भी शामिल बताए जा रहे हैं।
इस बीच चीन-नेपाल सीमा के पास तिब्बत के दोभाल इलाके में बनी एक कृत्रिम झील से पानी लगातार ओवरफ्लो होने की खबर सामने आई है। इससे भोटे कोशी नदी का जलस्तर बढ़ गया है और नदी के किनारे तथा निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए गए हैं। ऐसे में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान के साथ एक और संभावित खतरा सामने आया है।
हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट से 84 लोगों का रेस्क्यूनेपाल में सेना और पुलिस की टीमें लगातार बचाव अभियान चला रही हैं। रसुवा जिले में अपर त्रिशूली-1 हाइड्रोप्रोजेक्ट की सुरंग में फंसे लोगों को सेना ने सुरक्षित बाहर निकाला है।
त्रिशूली हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम कर रहे 63 कर्मचारियों समेत अब तक 84 लोगों को सुरक्षित बचाए जाने की जानकारी दी गई है। वहीं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में फंसे तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्रियों को भी सुरक्षित भारत पहुंचाया गया है।
चीन की सीमा की ओर फंसे करीब 400 भारतीय नागरिकों के सुरक्षित होने की भी जानकारी सामने आई है। हालांकि, नेपाल और आसपास के प्रभावित क्षेत्रों में लापता लोगों को लेकर स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है।
ईशा फाउंडेशन के 77 तीर्थयात्रियों का पता नहींतिब्बत में चीन-नेपाल सीमा के नजदीक आए सैलाब के बाद ईशा फाउंडेशन के 77 तीर्थयात्रियों से भी संपर्क नहीं हो पाया है। फाउंडेशन के नेतृत्व में गए इस 77 सदस्यीय दल में 19 देशों के नागरिक शामिल थे।
ग्रुप की कोऑर्डिनेटर मां गंभीरी के मुताबिक, पिछले दो दिनों से इन तीर्थयात्रियों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है। उन्होंने बताया कि बचाव दल मौके पर मौजूद हैं, लेकिन अभी तक समूह के बारे में कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई है।
मां गंभीरी के अनुसार, इस संबंध में भारत, चीन और नेपाल में संबंधित दूतावासों के साथ-साथ विभिन्न कार्यालयों और मंत्रालयों से संपर्क किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि सद्गुरु आपदा प्रभावित क्षेत्र जियारोंग जाकर सहायता करना चाहते थे, लेकिन उन्हें इसके लिए जरूरी अनुमति नहीं मिल सकी।
ईशा फाउंडेशन की स्थापना भारतीय आध्यात्मिक नेता जग्गी वासुदेव ने की है, जिन्हें सद्गुरु के नाम से जाना जाता है।
बढ़ते जलस्तर के बीच राहत अभियान जारीनेपाल में एक ओर फ्लैश फ्लड से हुई तबाही के बाद लापता लोगों की तलाश जारी है, वहीं दूसरी ओर भोटे कोशी नदी का बढ़ता जलस्तर चिंता का नया कारण बन गया है। कृत्रिम झील से पानी के ओवरफ्लो की खबर के बाद नदी के आसपास और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने के निर्देश दिए गए हैं।
राहत एवं बचाव दल प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को निकालने में जुटे हैं। हालांकि, बड़ी संख्या में लोगों से संपर्क नहीं हो पाने के कारण बचाव अभियान के सामने चुनौती बनी हुई है।