5 सितंबर को इंडिया गेट से मार्च का ऐलान, अभिजीत दीपके बोले- मैं और आशुतोष पिट चुके, अब सौरव का नंबर

कॉकरोच जनता पार्टी के तीन प्रमुख चेहरों अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास ने 5 सितंबर को मार्च निकालने का ऐलान किया है। जेन-जी से जुड़े एक कॉन्क्लेव में अभिजीत दीपके ने कहा कि यह मार्च इंडिया गेट से पुलिस हेडक्वार्टर तक निकाला जाएगा। उनके मुताबिक आंदोलन के जरिए छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लेने और आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की जाएगी।

दीपके ने कहा कि यह कदम उनकी इच्छा से नहीं, बल्कि मजबूरी में उठाना पड़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि करीब एक महीने से पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे की मांग की जा रही है।

'इंडिया गेट 1.0' नाम से मार्च की तैयारी

न्यूज 24 के कार्यक्रम में मार्च की योजना के बारे में पूछे जाने पर अभिजीत दीपके ने इसे 'इंडिया गेट 1.0' बताया। उन्होंने कहा कि 5 सितंबर को इंडिया गेट से पुलिस हेडक्वार्टर तक मार्च किया जाएगा।

दीपके के अनुसार, आंदोलन की दो प्रमुख मांगें हैं। पहली, छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर वापस लेना और दूसरी, पीड़ित परिवारों को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देना। उन्होंने कहा कि ये परिवार लोअर मिडिल क्लास से आते हैं और कई परिवारों पर बच्चों की पढ़ाई और कोचिंग से जुड़े कर्ज का दबाव है।

आकांक्षा चतुर्वेदी के परिवार का दिया उदाहरण

अभिजीत दीपके ने आकांक्षा चतुर्वेदी के परिवार से मुलाकात का जिक्र भी किया। उन्होंने बताया कि आकांक्षा के पिता को पैरालिसिस और हार्ट अटैक का सामना करना पड़ा था। उनके मुताबिक, परिवार का छोटा कैटरिंग कारोबार था और बेटी को डॉक्टर बनाने के लिए 15 लाख रुपये का कर्ज लिया गया था।

दीपके ने कहा कि परिवार को उम्मीद थी कि बेटी डॉक्टर बनने के बाद घर संभालने में मदद करेगी। उन्होंने दावा किया कि अब परिवार के सामने छोटे बच्चे की जिम्मेदारी और आर्थिक मुश्किलें हैं। इसी आधार पर उन्होंने पीड़ित परिवारों के लिए एक करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग दोहराई।
जयपुर की घटना पर क्या बोले आशुतोष रांका?

कार्यक्रम में आशुतोष रांका से जयपुर में हुई घटना और आगामी मार्च के दौरान संभावित हिंसा को लेकर सवाल किया गया। इस पर उन्होंने कहा कि उन्हें इसकी चिंता नहीं है। रांका ने बताया कि जयपुर की घटना के बाद वे जोधपुर भी गए थे और आगे बाड़मेर तथा बीकानेर जाने की तैयारी थी।

उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य लोगों से वोट मांगना नहीं है। रांका ने राजस्थान के स्कूलों की स्थिति का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि वे चुनाव में अपनी पार्टी के लिए वोट मांगने के बजाय स्कूलों को बेहतर करने की बात कर रहे हैं।

रांका ने एक स्कूल के भैंसों के तबेले में चलने का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसी स्थिति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने इसे देश के लिए शर्म की बात बताया।

'हम पिटने वाले लोग हैं'


जब रांका से हिंसा की आशंका को लेकर दोबारा सवाल किया गया तो अभिजीत दीपके ने कहा कि वह और रांका पहले ही पिट चुके हैं। इसी दौरान उन्होंने सौरव दास का जिक्र करते हुए कहा कि अब उनका नंबर आएगा। दीपके ने यह बात आंदोलन के दौरान अपने और रांका के साथ हुई मारपीट के संदर्भ में कही।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और केंद्र के वादों का जिक्र

सौरव दास ने चर्चा के दौरान सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अगर केंद्र के दो मंत्री किसी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कोई प्रतिबद्धता जताते हैं तो उसके पीछे सोच-विचार होना चाहिए। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 142 का उल्लेख करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पास पूर्ण न्याय के लिए असाधारण शक्ति का प्रावधान है।

दास के मुताबिक, 18 अगस्त की सुनवाई महत्वपूर्ण थी। उन्होंने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के वकील से देशभर में दर्ज एफआईआर की सूची देने को कहा था, ताकि उन पर कार्रवाई की जा सके, लेकिन केंद्र सरकार के वकील ने इसके लिए प्रतिबद्धता नहीं जताई।

दास ने इसी आधार पर कहा कि उन्हें लगा कि युवाओं के साथ विश्वासघात हो सकता है। उनके अनुसार, 5 सितंबर का मार्च शांतिपूर्ण होगा और इसकी वजह दो मांगों का पूरा नहीं होना है—छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर कार्रवाई और पीड़ित परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा।