बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) में सीटों के बंटवारे का ऐलान होते ही सियासी हलचल तेज हो गई है। सीटों के वितरण के बाद गठबंधन के अंदर असंतोष की लहर दौड़ गई है। भाजपा के वरिष्ठ नेता अब माहौल को शांत करने और सभी सहयोगी दलों के बीच तालमेल बैठाने में जुटे हुए हैं। सबसे ज्यादा नाराज़गी चिराग पासवान की पार्टी लोजपा (रामविलास) को दी गई 29 सीटों को लेकर देखी जा रही है — खासकर इसलिए क्योंकि इनमें से कई सीटें कभी भाजपा का मजबूत गढ़ मानी जाती थीं।
भाजपा की परंपरागत सीटें अब लोजपा के खाते मेंभाजपा के पुराने किलों में गिनी जाने वाली ब्रह्मपुर, गोविंदगंज, अरवल, हिसुआ और दानापुर जैसी सीटें जब लोजपा (रामविलास) को दी गईं तो एनडीए के भीतर बेचैनी और बढ़ गई। चिराग पासवान ने 29 सीटें हासिल कर गठबंधन में अपनी ताकत का एहसास कराया। उनका कहना है कि 2024 के लोकसभा चुनावों में पार्टी ने गठबंधन के तहत दी गई सभी 5 सीटें जीतीं, यानी उनका स्ट्राइक रेट 100% रहा। झारखंड विधानसभा चुनाव में भी पार्टी ने एक सीट पर जीत दर्ज की थी, जिससे उनका आत्मविश्वास और बढ़ा है।
गिरिराज सिंह का तंज – “ये नहीं, वो था असली स्ट्राइक रेट”
लोजपा के 100% स्ट्राइक रेट पर भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तंज कसते हुए लिखा — “आज जो मजबूत सीट लेकर स्ट्राइक रेट का ढोल पीट रहे हैं, उन्हें 2010 याद करना चाहिए जब एनडीए ने बिहार में इतिहास रचा था।” उन्होंने बताया कि उस चुनाव में एनडीए ने 243 में से 206 सीटें जीती थीं — जिसमें जेडीयू ने 141 में से 115 (81%), और भाजपा ने 102 में से 91 (89%) सीटें हासिल की थीं। गिरिराज ने याद दिलाया कि तब भी चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान ही थे, और आज भी वही जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
मांझी के कार्यकर्ता भी असंतुष्टवहीं हम (हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा) प्रमुख और केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने पटना में कहा कि उनकी पार्टी के कार्यकर्ता सीटों के बंटवारे से खुश नहीं हैं। उन्होंने कहा, “2020 में हमने 8 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन इस बार हमें सिर्फ 6 सीटें मिली हैं। हमारे कार्यकर्ता निराश हैं। फिर भी हम प्रधानमंत्री मोदी और एनडीए के साथ हैं। जो भी फैसला हुआ है, हम उसका सम्मान करेंगे और गठबंधन की जीत के लिए पूरी ताकत लगाएंगे।”
उपेंद्र कुशवाहा ने दोहे में जताई नाराज़गीआरएलएम (राष्ट्रीय लोक जनशक्ति मोर्चा) के नेता उपेंद्र कुशवाहा ने भी X पर अपनी नाराज़गी एक दोहे के माध्यम से जाहिर की। उन्होंने लिखा कि “बादल मेरे खिलाफ साजिश रच रहे थे, और जहां मेरा घर था, वहीं बरस गए।” इसके बाद उन्होंने जोड़ा कि अगर आसमान बिजली गिराने की जिद करता है, तो वे भी वहीं घोंसला बनाने की जिद रखते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे एनडीए की जीत के लिए काम करेंगे, लेकिन उनके शब्दों से कार्यकर्ताओं की मनःस्थिति और निराशा साफ झलकती है।
मतभेदों को मिटाने के लिए बैठकें जारीसोमवार को पूरे दिन पटना और दिल्ली में एनडीए के प्रमुख नेताओं के बीच कई दौर की बैठकों का सिलसिला चलता रहा। भाजपा की ओर से धर्मेंद्र प्रधान, विनोद तावड़े, नित्यानंद राय, और नितिन नवीन जैसे नेता लगातार बातचीत कर रहे थे ताकि किसी भी तरह के विवाद को सुलझाया जा सके।
एनडीए की प्रेस कॉन्फ्रेंस टली, अब आज होगी घोषणासोमवार शाम 4 बजे तय की गई एनडीए की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस अचानक स्थगित कर दी गई। बिहार भाजपा अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने बताया कि एनडीए उम्मीदवारों की सूची मंगलवार को जारी की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक, कुछ सीटों पर अदला-बदली और उम्मीदवारों के नामों को लेकर विचार-विमर्श जारी है। उम्मीदवारों के नाम तय होने के बाद 15 अक्टूबर से नामांकन की प्रक्रिया शुरू होगी, जिसमें कई केंद्रीय मंत्री और राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल होंगे।
वीआईपी के मुकेश सहनी को लेकर भी चर्चाएंसोमवार को सियासी गलियारों में वीआईपी पार्टी के प्रमुख मुकेश सहनी को लेकर भी तरह-तरह की अटकलें चलीं। बताया गया कि वे इलाज के लिए दिल्ली पहुंचे थे, लेकिन इंडिया गठबंधन के किसी नेता से उनकी कोई मुलाकात नहीं हो सकी। कयास यह भी लगाए जा रहे हैं कि अगर इंडिया गठबंधन में उन्हें मनचाही सीटें नहीं मिलतीं, तो वे एनडीए की ओर रुख कर सकते हैं। हालांकि सहनी के करीबी नेताओं और भाजपा सूत्रों ने इस संभावना से इनकार करते हुए कहा कि “एनडीए का हाउस अब फुल हो चुका है।”