एनडीए और महागठबंधन से किनारा, बिहार में AIMIM बनाएगी तीसरा मोर्चा

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले राज्य की सियासत में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है। नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले एनडीए खेमे के लिए भले ही ये राहत की खबर हो, लेकिन महागठबंधन को बड़ा झटका लगा है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने अब खुलकर ऐलान कर दिया है कि वह तीसरा मोर्चा बनाने की कवायद में जुट चुकी है।

ऐसे वक्त में जब सभी पार्टियां रणनीति बनाने में व्यस्त हैं, एआईएमआईएम के इकलौते विधायक अख्तरुल ईमान ने अपने तेवर और भी साफ कर दिए हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि भाजपा और एनडीए को हराने के लिए अगर राजद, कांग्रेस, लेफ्ट और वीआईपी पार्टी वास्तव में गंभीर हैं, तो उन्हें वोट बंटने से रोकने के लिए सहयोग करना होगा।

2020 के चुनावी समीकरण और अब की सच्चाई

गौरतलब है कि 2020 में एआईएमआईएम, उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएसपी, मायावती की बीएसपी, देवेंद्र यादव की एसजेडीडी, ओमप्रकाश राजभर की सुभासपा और संजय चौहान की जनवादी पार्टी ने मिलकर 'ग्रैंड डेमोक्रेटिक सेक्युलर फ्रंट' बनाया था। उस चुनाव में सीटों की जमकर बंदरबांट हुई—आरएलएसपी ने 104, बीएसपी ने 80, सजद-डी ने 25, एआईएमआईएम ने 19, सुभासपा ने 5 और जनवादी पार्टी ने 5 सीटों पर किस्मत आज़माई थी। लेकिन नतीजों में सिर्फ एआईएमआईएम के 5 और बीएसपी के 1 उम्मीदवार जीत पाए।

परंतु, कहानी यहीं खत्म नहीं हुई—तेजस्वी यादव ने इन 5 में से 4 विधायकों को अपनी पार्टी राजद में शामिल कर लिया, जिससे एआईएमआईएम अकेली रह गई। उस समय से पार्टी लगातार खुद को हाशिए पर महसूस कर रही थी।

अख्तरुल ईमान की नाराज़गी और नया रास्ता

अब एआईएमआईएम के कद्दावर नेता और अकेले बचे विधायक अख्तरुल ईमान ने दिल की बात साफ कर दी है। उनका कहना है कि पार्टी अब न तो एनडीए की गोद में बैठेगी और न ही महागठबंधन के दरवाजे पर दस्तक देगी।

उन्होंने यह भी खुलासा किया कि महागठबंधन की घोषणा पत्र कमेटी की मीटिंग पटना में हो रही है, लेकिन पहले की तरह इस बार भी उन्हें कोई निमंत्रण नहीं मिला। इस उपेक्षा से आहत होकर पार्टी ने तीसरे मोर्चे की रणनीति पर काम तेज कर दिया है।

ईमान ने यह भी जोड़ा कि पार्टी अब तक महागठबंधन से एक प्रस्ताव की प्रतीक्षा कर रही थी, लेकिन जब भाव भी नहीं मिला, तो खुद का रास्ता बनाना जरूरी हो गया।