बिहार में बीजेपी–चिराग की धमाकेदार बढ़त, बिना नीतीश भी NDA ने पार किया बहुमत का जादुई आंकड़ा

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के रुझानों ने राजनीतिक माहौल पूरी तरह बदल दिया है। भारतीय जनता पार्टी और चिराग पासवान के नेतृत्व वाली लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने ऐसा प्रदर्शन किया है जिसकी कल्पना तक कई राजनीतिक जानकार नहीं कर पा रहे थे। बीजेपी ने 101 सीटों पर उम्मीदवार उतारे और उनमें से 95 सीटों पर मजबूत बढ़त बनाए हुए है। वहीं चिराग पासवान की एलजेपी (आर) ने 28 सीटों में से 21 पर स्पष्ट बढ़त के साथ अपनी ताकत का नया प्रदर्शन किया है। उपेंद्र कुशवाहा की रालोमा 4 सीटों पर आगे है, जबकि जीतन राम मांझी की हम (सेक्युलर) 5 सीटों पर जीत की ओर बढ़ रही है।

NDA का उभरता दबदबा — नीतीश के बिना भी बहुमत से आगे

बिहार की राजनीति में यह पहली बार है जब एनडीए नीतीश कुमार की सक्रिय भूमिका के बिना भी बहुमत के आंकड़े से आगे निकलता दिख रहा है। चारों दलों को मिलाकर एनडीए लगभग 125 सीटों पर बढ़त बना चुका है, जो बिहार में सरकार गठन के लिए जरूरी 122 सीटों से अधिक है। यह स्थिति संकेत देती है कि एनडीए अब नीतीश कुमार पर निर्भर हुए बिना भी सरकार बना सकता है, जिससे राज्य की सत्ता संतुलन रेखाएं बदलती दिखाई दे रही हैं।

नीतीश का रोल अस्पष्ट — आधिकारिक मुख्यमंत्री चेहरा घोषित नहीं

इस चुनाव में एनडीए ने नीतीश कुमार को सीएम फेस घोषित करने से परहेज किया। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने पहले ही संकेत दिया था कि मुख्यमंत्री का नाम चुनाव बाद लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत तय होगा। चूंकि बीजेपी बिहार में इस बार सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभर रही है, ऐसे में संवैधानिक तौर पर राज्यपाल पहले उसी को सरकार बनाने का निमंत्रण देंगे।

वहीं, नतीजों की गहमागहमी के बीच नीतीश कुमार के पटना स्थित आवास पर राजनीतिक गतिविधियाँ बढ़ गई हैं। जेडीयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय कुमार झा और मंत्री अशोक चौधरी भी नीतीश से मुलाकात के लिए पहुंच चुके हैं। सूत्र बताते हैं कि संजय झा भाजपा नेतृत्व के साथ लगातार संवाद बनाए हुए हैं और स्थिति पर करीबी नजर रख रहे हैं।

महागठबंधन की निराशाजनक स्थिति — आरजेडी और कांग्रेस हाशिए पर

उधर, महागठबंधन के लिए यह चुनाव किसी बड़े झटके से कम नहीं।6 दलों वाले विपक्षी गठबंधन को संयुक्त रूप से सिर्फ 30 सीटों पर बढ़त मिलती दिखाई दे रही है।ऐसे हालात में नीतीश कुमार के लिए विपक्ष के सहारे सरकार बनाने का विकल्प पूरी तरह खत्म हो चुका है।

याद दिला दें कि 2020 के चुनाव के परिणामों के बाद नीतीश ने एक बार फिर पाला बदलकर 2022 में आरजेडी के साथ सरकार बनाई थी।
लेकिन 2025 के नतीजे स्पष्ट कर रहे हैं कि इस बार नीतीश चाह कर भी विपक्षी गठबंधन की मदद से सरकार नहीं बना पाएंगे।