साइना नेहवाल ने लिया संन्यास, ओलंपिक पदक के साथ स्वर्णिम करियर को कहा अलविदा, भारतीय बैडमिंटन के एक युग का समापन

ओलंपिक पदक विजेता और भारतीय बैडमिंटन की सबसे चमकदार सितारों में शुमार साइना नेहवाल ने प्रतिस्पर्धी खेल से संन्यास लेने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। अपने फैसले के पीछे उन्होंने शारीरिक सीमाओं का हवाला देते हुए कहा कि अब उनका शरीर एलीट स्तर के खेल की कठिन मांगों का साथ देने की स्थिति में नहीं है। लंबे समय से कोर्ट से दूर चल रहीं साइना के इस ऐलान के साथ ही भारतीय खेल जगत में एक भावनात्मक अध्याय का अंत हो गया।

घुटने की चोट बनी सबसे बड़ी वजह


साइना नेहवाल ने स्पष्ट किया कि गंभीर घुटने की समस्या के कारण लगातार हाई-इंटेंसिटी ट्रेनिंग और मुकाबलों में उतरना उनके लिए संभव नहीं रह गया था। उन्होंने बताया कि उनके घुटने का कार्टिलेज पूरी तरह खराब हो चुका है और आर्थराइटिस की स्थिति बन गई थी। पहले जहां वह दुनिया में सर्वश्रेष्ठ बनने के लिए दिन के आठ से नौ घंटे अभ्यास करती थीं, वहीं अब एक-दो घंटे की ट्रेनिंग में ही उनका घुटना जवाब देने लगा था। इसी वजह से उन्होंने दो साल पहले ही खेल से दूरी बना ली थी।

बिना शोर-शराबे के लिया फैसला

साइना ने कहा कि उन्होंने चुपचाप खेल छोड़ दिया था और औपचारिक घोषणा जरूरी नहीं समझी। उनका मानना था कि जब खिलाड़ी खुद महसूस कर ले कि वह पहले जैसा प्रदर्शन नहीं कर सकता, तो सम्मानजनक विदाई लेना ही बेहतर होता है। समय के साथ लोगों को भी यह समझ आने लगा था कि वह अब प्रतिस्पर्धी बैडमिंटन में नजर नहीं आ रहीं।

ऐतिहासिक उपलब्धियों से भरा रहा करियर


साइना नेहवाल भारतीय बैडमिंटन की पहली ऐसी खिलाड़ी रहीं, जिन्होंने ओलंपिक में पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। लंदन ओलंपिक 2012 में उन्होंने कांस्य पदक अपने नाम किया। साल 2015 में वह विश्व रैंकिंग में नंबर एक स्थान पर पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला बैडमिंटन खिलाड़ी बनीं। जूनियर स्तर से लेकर सीनियर मंच तक उनका प्रदर्शन लगातार प्रेरणादायक रहा।


खिताबों और सम्मानों की लंबी सूची

अपने करियर में साइना ने बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप, सुपर सीरीज खिताब और कई अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट जीते। कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने दो बार एकल स्वर्ण पदक हासिल कर इतिहास रचा। उनकी उपलब्धियों के लिए भारत सरकार ने उन्हें अर्जुन पुरस्कार, खेल रत्न, पद्म श्री और पद्म भूषण जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा। ये सम्मान उनके योगदान और संघर्ष की कहानी खुद बयां करते हैं।

नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनी रहेंगी साइना

भले ही साइना नेहवाल अब कोर्ट पर मुकाबले खेलती नजर न आएं, लेकिन उनका सफर आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बना रहेगा। एक ऐसे दौर में जब भारतीय महिला बैडमिंटन को वैश्विक पहचान मिलनी शुरू हुई, साइना ने अपने प्रदर्शन, आत्मविश्वास और जुझारू अंदाज से देश को नई दिशा दी। उनका संन्यास खेल से विदाई नहीं, बल्कि एक गौरवशाली विरासत की शुरुआत माना जा रहा है।