भारत और इंग्लैंड के बीच चल रहे तीसरे टेस्ट मैच में उस समय विवाद खड़ा हो गया जब अंपायर पॉल रीफेल ने इंग्लैंड के बल्लेबाज जो रूट को मोहम्मद सिराज की एक गेंद पर नॉट आउट करार दे दिया। यह फैसला भारत के पूर्व कप्तान और दिग्गज कमेंटेटर सुनील गावस्कर को बेहद नागवार गुज़रा। वहीं इंग्लैंड के पूर्व बल्लेबाज जोनाथन ट्रॉट भी अंपायर के निर्णय से स्तब्ध रह गए। हालांकि राहत की बात यह रही कि जो रूट इस जीवनदान का फायदा नहीं उठा सके और जल्द ही पवेलियन लौट गए।
कैसे हुआ विवाद?
चौथे दिन इंग्लैंड की दूसरी पारी के दौरान जो रूट 36 रन पर बल्लेबाजी कर रहे थे। मोहम्मद सिराज की एक गेंद ने पिच पर टप्पा खाने के बाद रूट के पैड्स से सीधा संपर्क किया। गेंद लाइन में पिच हुई थी और डीआरएस में साफ दिखा कि अगर पैड न होता तो गेंद सीधा लेग स्टंप पर लगती। भारतीय खिलाड़ियों ने जोरदार अपील की लेकिन अंपायर पॉल रीफेल ने रूट को नॉट आउट करार दिया।
भारत ने तुरंत रिव्यू लिया। रिव्यू में साफ दिखा कि गेंद विकेट्स पर लग रही थी, लेकिन ‘अंपायर कॉल’ के चलते रूट को जीवनदान मिल गया। इसी पर नाराजगी जताते हुए गावस्कर और ट्रॉट ने अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दी।
गावस्कर का तीखा रिएक्शन, ट्रॉट भी हैरानकमेंट्री बॉक्स में बैठे सुनील गावस्कर ने कहा, मुझे विश्वास नहीं हो रहा कि गेंद इतनी ज्यादा मूव हुई होगी। आप कह रहे हैं कि यह गेंद सिर्फ छू रही थी? नहीं! यह सीधी लेग स्टंप उखाड़ने जा रही थी। उन्होंने अंपायर की तकनीकी व्याख्या पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह अंपायर कॉल का गलत इस्तेमाल है।
गावस्कर के साथ मौजूद इंग्लैंड के पूर्व बल्लेबाज जोनाथन ट्रॉट ने भी हैरानी जताते हुए कहा, मैं स्तब्ध हूं। रीयल टाइम में भी यह लग रहा था कि गेंद स्टंप से टकराएगी। रिप्ले में तो यह और साफ दिखा। मैं समझ नहीं पा रहा कि यह कैसे नॉट आउट दिया गया।
भारत को राहत, रूट जल्द आउटहालांकि भारत के लिए राहत की बात यह रही कि रूट इस जीवनदान को बड़ी पारी में तब्दील नहीं कर सके। 40 रन के स्कोर पर वॉशिंगटन सुंदर ने उन्हें आउट कर दिया। इससे पहले इंग्लैंड की दूसरी पारी महज 192 रन पर सिमट गई थी।
मैच की स्थितिभारत ने चौथे दिन का खेल खत्म होने तक अपनी दूसरी पारी में 4 विकेट पर 58 रन बना लिए थे। केएल राहुल 33 रन बनाकर नाबाद हैं और भारत को जीत के लिए अब सिर्फ 135 रन और चाहिए। उसके 6 विकेट शेष हैं। ऐसे में पांचवें और अंतिम दिन भारत के पास जीत का सुनहरा मौका है।
जो रूट को मिला यह ‘अंपायर कॉल’ जीवनदान मैच के नतीजे को नहीं बदल सका, लेकिन अंपायरिंग की विश्वसनीयता और तकनीकी फैसलों की पारदर्शिता पर सवाल जरूर खड़े कर गया। सुनील गावस्कर और जोनाथन ट्रॉट जैसे दिग्गजों की प्रतिक्रिया बताती है कि खेल के हर स्तर पर निष्पक्षता और पारदर्शिता की कितनी आवश्यकता है। अब सबकी नजरें अंतिम दिन की शुरुआत पर हैं, जहां भारत इतिहास रचने से महज 135 रन दूर है।