लंदन के लॉर्ड्स मैदान पर खेले गए तीसरे टेस्ट मैच ने एक बार फिर साबित कर दिया कि टेस्ट क्रिकेट आज भी सबसे रोमांचक और प्रतिष्ठित प्रारूप है। पूर्व इंग्लिश बल्लेबाज और अफगानिस्तान के मौजूदा कोच जॉनाथन ट्रॉट ने भारत और इंग्लैंड के बीच इस मुकाबले को टेस्ट क्रिकेट के लिए शानदार बताया।
आखिरी सेशन तक सांसें थाम देने वाला संघर्षएंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी के अंतर्गत खेले जा रहे पांच मैचों की श्रृंखला का यह तीसरा मुकाबला श्रृंखला में 2-1 की बढ़त हासिल करने के लिहाज से बेहद अहम था। आखिरी दिन के अंतिम सत्र तक चला यह संघर्ष रोमांच और तनाव से भरा रहा। ट्रॉट ने कहा, “यह इतना तनावपूर्ण था कि मुझे लगता है मेरी सारी नाखूनें खत्म हो गईं! किसी न किसी को जीतना था, लेकिन जिस तरह की आक्रामकता और खेल भावना दोनों टीमों ने दिखाई, वह टेस्ट क्रिकेट के लिए बहुत अच्छा संकेत है।”
उन्होंने आगे जोड़ा कि “अगर मैदान के बाहर सब कुछ ठीक रहता है और यह गहमागहमी आगे न बढ़े, तो कोई समस्या नहीं है। यह मुकाबला बेहद कड़ा और उच्च स्तर का था। मैं अगले मैच का इंतजार नहीं कर सकता।”
जडेजा ने दिखाई जुझारूपन की मिसालइस मैच में भारत के स्टार ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा एक बार फिर संकटमोचक बनकर उभरे। जब भारत लंच तक आठ विकेट खो चुका था और हार तय लग रही थी, तब जडेजा ने tailenders जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद सिराज के साथ मिलकर अभूतपूर्व प्रतिरोध दिखाया।
ट्रॉट ने जडेजा के शॉट चयन और संयम की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने “अपने धैर्य और समझदारी से भारत को असंभव को संभव में बदलने का मौका दिया।
उन्होंने आलोचकों से आग्रह किया कि जडेजा के प्रदर्शन को “जरूरत से ज़्यादा विश्लेषण न करें।” उनके अनुसार, “अगर जडेजा आक्रामक होकर आउट हो जाते, तो कहा जाता कि उन्होंने मैच गंवा दिया। लेकिन उन्होंने संतुलन बनाए रखा और टीम को अंत तक मुकाबले में रखा।
‘हेडिंग्ले जैसा करिश्मा’ अधूरा रह गयाट्रॉट ने जडेजा की तुलना 2019 की हेडिंग्ले टेस्ट में बेन स्टोक्स द्वारा किए गए चमत्कारी रनचेज से की, लेकिन इस बार कहानी अधूरी रह गई। हालांकि, उन्होंने कहा कि “एक बात तय है – जडेजा ने सब कुछ झोंक दिया। उन्होंने दबाव में खुद को साबित किया और यह दर्शाता है कि वो क्यों आज भी नंबर 1 टेस्ट ऑलराउंडर बने हुए हैं।”
लॉर्ड्स टेस्ट मैच ने दर्शकों को एक बार फिर ये अहसास करा दिया कि टेस्ट क्रिकेट केवल एक खेल नहीं, बल्कि धैर्य, रणनीति, और जुझारूपन की परीक्षा है। जॉनाथन ट्रॉट की टिप्पणी इस बात की पुष्टि करती है कि जब मुकाबला स्तर का हो, तो टेस्ट फॉर्मेट ही क्रिकेट की असली आत्मा है। Ravindra Jadeja जैसे खिलाड़ी उस आत्मा को ज़िंदा रखने वाले योद्धा हैं।
अब सभी की निगाहें अगले टेस्ट पर हैं – क्या भारत वापसी करेगा या इंग्लैंड बढ़त को मज़बूत करेगा? इंतजार रहेगा!