जयपुर / कोरोना के असली योद्धा, संक्रमण से मरने वाले 64 लोगों का किया अंतिम संस्कार

आज हम आपको राजस्थान के ऐसे शख्स के बारे में बताने जा रहे है जो अपनी जान हथेली पर रखकर कोरोना से जान गंवाने वाले लोगों का अंतिम संस्कार करता है। हम बात करे रहे है जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल मुर्दाघर के सुपरवाइजर विष्णु की। विष्णु पिछले दो महीने से अपने घर नहीं गए उन्होंने अपने परिजनों का चेहरा सिर्फ मोबाइल फोन पर ही देखा है। आपको बता दे, विष्णु कोरोना काल से पहले कभी भी कब्रिस्तान नहीं गए थे लेकिन आज इस दौर में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

राजस्थान में 125 लोगों की हुई मौत, जयपुर में 64 मौतें

जयपुर का सवाई मानसिंह अस्पताल कोरोना वायरस के इलाज का सबसे बड़ा सेंटर बना हुआ है। कोरोना से राजस्थान में बुधवार तक 125 लोगों की मौत हुई है। इनमें से 64 मौतें जयपुर में हुईं हैं। सभी का अंतिम संस्कार विष्णु और उनके साथियों पंकज, मनीष, मंगल, अर्जुन, सूरज ने ही किया है। कोरोना महामारी ने उन्हें एक ऐसा काम करने की जिम्मेदारी सौंप दी, जो शायद आमतौर पर कोई नहीं करना चाहता है लेकिन विष्णु और उनकी टीम पूरी मुस्तैदी से यह काम कर रही है। विष्णु और उनके साथी अस्पताल के पास ही बनी एक धर्मशाला में रह रहे हैं और अपने घर भी नहीं जाते हैं।
मुस्लिम भाइयों का भी किया अंतिम संस्कार

सवाई मानसिंह अस्पताल में मुर्दाघर के सुपरवाइजर विष्णु कहते हैं, 'हमने 64 मृतकों में से 26 मुस्लिम मित्रों को कब्रिस्तान में ले जाकर सुपुर्द-ए-खाक भी किया है। इससे पहले नहीं जानता था कि मुस्लिम रीति रिवाज में अंतिम संस्कार कैसे होता है और ना ही कभी कब्रिस्तान गया था।'

लोगों का कहना है कि ये कोरोना के असली योद्धा हैं जो जोखिम भरा और मानवता का सबसे बड़ा काम कर रहे हैं। ये उन 64 लोगों के सबसे करीबी रिश्तेदार बन गए हैं, जिनके भरे पूरे परिवार होने के बावजूद कोरोना के डर ने उन्हें अंतिम समय में अपनों से दूर कर दिया।
घरवालों से मोबाइल पर करते है बात

विष्णु के घर उसका 3 साल का बेटा और छह महीने की बेटी भी है जिससे वो पिछले 2 महीने से मोबाइल पर वीडियो कॉल के जरिए ही बात करते हैं। विष्णु बताते हैं कि कोरोना पॉजिटिव मरीजों का अंतिम संस्कार उनके परिवार वाले नहीं कर सकते। कुछ तो डर के चलते देखने तक नहीं आते। उन्होंने बताया कि 13 अंतिम संस्कार ऐसे किए हैं, जिनमें मृतक के परिवार का कोई सदस्य नहीं था। सारा काम हमने खुद ही किया।

मृतकों को कोरोना के डर से परिवार वाले लेने नहीं आते

विष्णु ने बताया कि अभी भी मुर्दाघर में 13 से 14 कोरोना पॉजिटिव मरीजों की अस्थियां उन्होंने निशान लगाकर, मृतकों के नाम लिखकर रखी हैं लेकिन परिवार के सदस्य कोरोना के डर से लेने नहीं आये। विष्णु बताते हैं कि 7 साल से मुर्दाघर में काम कर रहे हैं। मगर जब पहली बार अंतिम संस्कार का काम करने गए तो काफी डर लगा, लेकिन अब सारा डर निकल गया है। रोज पीपीई किट पहनने से पहले थर्मल जांच होती है। विष्णु और उनके साथियों की कोरोना जांच अभी निगेटिव आ रही हैं।

राजस्थान में 4688 कोरोना संक्रमित मामले

राजथान में कोरोना संक्रमितों की गिनती 4688 तक पहुंच गई है। रदेश में संक्रमण के सबसे ज्यादा केस जयपुर में हैं। यहां 1375 (2 इटली के नागरिक) संक्रमित हैं। शुक्रवार को 154 नए पॉजिटिव केस सामने आए। इनमें कोटा में 48, उदयपुर में 38, पाली में 13, जोधपुर में 12, जयपुर में 11, जालौर में पांच, राजसमंद और सीकर में तीन-तीन, जैसलमेर, अजमेर और चूरू में दो-दो, चित्तौड़गढ़, बाड़मेर, झुंझुनू, करौली, दौसा, डूंगरपुर, बारां, भरतपुर में एक-एक संक्रमित मिला। साथ ही बीएसएफ के 6 जवान भी संक्रमित मिले। वहीं, मध्यप्रदेश का एक व्यक्ति भी पॉजिटिव मिला।