सुप्रीम कोर्ट ने जगन्नाथ पुरी में रथयात्रा की अनुमति दे दी है। इसके साथ ही रथ यात्रा को लेकर सोमवार रात 9 बजे से बुधवार दोपहर 2 बजे तक पुरी में शटडाउन रहेगा। सभी एंट्री पॉइंट्स बंद रहेंगे और लोगों की आवाजाही पूरी तरह से बंद रहेगी। ये शटडाउन करीब 41 घंटे रहेगा। यह जानकारी ओडिशा के चीफ सेक्रेटरी असित त्रिपाठी ने दी। उन्होंने कहा कि रथ यात्रा के दौरान कोरोना के मद्देनजर कर्फ्यू जैसे प्रतिबंध रहेंगे। बता दे, यह रथ यात्रा कल निकलने वाली है लेकिन इस कोरोना के चलते यात्रा में श्रद्धालु शामिल नहीं हो पाएंगे। कोर्ट ने ओडिशा सरकार को निर्देश दिए कि यात्रा के दौरान पुरी में कर्फ्यू लागू किया जाए। एक रथ को 500 से ज्यादा लोग ना खींचें और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें।
रथयात्रा की शुरुआत मंगलवार सुबह 9 बजे से होगीबता दे, मंगलवार को रथयात्रा की शुरुआत सुबह 9 बजे से होगी। भगवान जगन्नाथ खिचड़ी खाकर निकलेंगे। पुरी महाराज दिव्य सिंह देव छेरा पहरा यानी रथ की सफाई रात एक बजे शुरू करेंगे। मंदिर के सेवादार राजेंद्र मुदाली ने बताया महाप्रभु की मौसी के घर यानी गुंडिचा मंदिर जाने की यात्रा दोपहर दो से ढाई बजे शुरू होगी। मंदिर की दूरी साढ़े तीन किलोमीटर है। जहां सूर्यास्त होगा, यात्रा वहीं रुक जाएगी। रथ खींचने वाले सेवादारों का कोरोना टेस्ट हो चुका है। सभी निगेटिव हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रथ यात्रा दौरान पारंपरिक अनुष्ठान में भी सिर्फ जरूरी लोगों को इजाजत होगी। इनमें मंदिर कमेटी वाले पंडे, अधिकारी और पुलिसकर्मी शामिल हैं। कोर्ट ने इनके भी शामिल होने की शर्त रखी है। रथ यात्रा में वही शामिल होगा, जिसकी कोरोना रिपोर्ट निगेटिव होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रथ यात्रा और सभी रस्मों को इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को कवर करने की इजाजत दी जाए। सरकार क्रू के मुताबिक कैमरा लगाने की इजाजत दे।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शर्तों और अन्य मानदंडों के अनुसार, रथ यात्रा के संचालन की प्राथमिक जिम्मेदारी जगन्नाथ मंदिर प्रशासन समिति के प्रभारी की होगी। इसके अलावा रथ यात्रा के संचालन के लिए राज्य सरकार द्वारा नामित अफसर भी इसी तरह जिम्मेदार होंगे।
वहीं, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायालय को आश्वासन दिया है कि केंद्र सरकार इस प्रयास में राज्य सरकार को सभी सहायता प्रदान करेगी। राज्य सरकार उन सभी लोगों का रिकॉर्ड बनाए रखेगी, जिन्हें रथ यात्रा में भाग लेने की अनुमति दी गई है और अनुष्ठान में भाग लेने वालों का मेडिकल रिकॉर्ड भी रखा जाएगा।
पुरी में गूंजे जय जगन्नाथ के नारेसुप्रीम कोर्ट का फैसला आते ही पुरी में जय जगन्नाथ के नारे गूंजने लगे। भीड़ जमा न हो इसलिए शहर में शाम 4 बजे से धारा 144 लागू कर दी गई। शाम होते ही नंदीघोष, तालध्वज और दर्पदलन रथ को मंदिर के सिंह द्वार तक पहुंचाने की तैयारी शुरू हो गई। नंदीघोष भगवान जगन्नाथ का रथ है। तालध्वज पर बलराम विराजेंगे और दर्पदलन पर सुभद्रा।
तीनों रथों को खींचने के लिए शंखचूड़ा नागिन, वासुकी नाग और स्वर्णचूड़ा नागिन लाई गईं। यह नारियल से बनी रस्सियों के नाम हैं।
बता दे, जगन्नाथ रथयात्रा आषाढ़ शुक्ल द्वितीया से शुरू होती है। यह मुख्य मंदिर से शुरू होकर 2.5 किलोमीटर दूर स्थित गुंडिचा मंदिर में जाती है। यह भगवान जगन्नाथ की मौसी का घर माना जाता है। जहां भगवान 7 दिन तक आराम करते हैं और आषाढ़ शुक्ल दशमी को रथयात्रा फिर जगन्नाथ के मुख्य मंदिर पहुंचती है। यह बहुड़ा यात्रा कहलाती है। स्कंदपुराण में लिखा है कि आषाढ़ मास में पुरी तीर्थ में स्नान करने से सभी तीर्थों के दर्शन का फल मिलता है और भक्तों को शिवलोक की प्राप्ति होती है। रथयात्रा से 15 दिन पहले ज्येष्ठ पूर्णिमा पर भगवान को स्नान कराया जाता है। इसके बाद भगवान जगन्नाथ बीमार होते हैं। इस वजह से उन्हें 15 दिन तक एकांतवास में रखा जाता है। इस दौरान कुछ पुजारी ही उनके पास होते हैं। उन्हें औषधियों और हल्के आहार का ही भोग लगाया जाता है। रथयात्रा से एक दिन पहले ही भगवान का एकांतवास खत्म होता है।
रथ यात्रा पर रोक के खिलाफ डाली गई थीं याचिकाएंबता दें कि पुरी में जगन्नाथ रथ यात्रा को सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी मिल गई है। कोरोना के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने शर्तों के साथ 23 जून को रथ यात्रा निकालने की इजाजत दी है। कोरोना वायरस संक्रमण की वजह से पुरी रथ यात्रा पर रोक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं डाली गई थीं। इन याचिकाओं पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इस मामले में चीफ जस्टिस (सीजेआई) एसए बोवडे ने तीन जजों की बेंच गठित की। इस बेंच में सीजेआई एसए बोवडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस दिनेश माहेश्वरी शामिल रहे।