कोरोना के बाद अब ब्लैक फंगस की बीमारी परेशान कर रही हैं जहां मरीजों से मरने वालों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा हैं। राज्य सरकार ने इलाज की कीमतें जरूर तय कर दी लेकिन निजी लैब संचालक जांचों में लूट मचा रहे हैं और मरीजों मनमाने दाम वसूल रहे हैं। SMS अस्पताल में कांट्रास्ट एमआरआई की कीमत 5500 तय की गई हैं जिसके पहले अधिकतम 10 हजार रुपए लगते थे लेकिन अब इनकी कीमतें दोगुना तक बढ़ा दी गई हैं। वहीं निजी लैब 18000 से 25000 रुपए तक वसूल कर रहे हैं।
अब जबकि काफी लोग ऐसे हैं जिन्हें यह बीमारी हो रही है और इलाज के लिए जांच जरूरी होती है, ऐसे में अधिक पैसा देना मजबूरी है। मामले में सरकार का कहना है कि हमने सीजीएचएस की कीमतों पर इसकी कीमत तय की है। अस्पतालों और लैब में इतनी अधिक कीमत में जांच हो रही है लेकिन कोई भी विभाग इनकी जांच करने वाला नहीं है। आपदा में भी आमजन की जेब काटने वाले लैब संचालकों की सोच बताती है कि वे इस समय में भी मरीजों को लूट रहे हैं तो सामान्य समय में किस तरह पैसा वसूलते होंगे।चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा ने कहा कि हमने कोरोना के इलाज सहित ब्लैक फंगस की दरें तय की थीं। एमआरआई भी उसमें शामिल है। अधिक कीमत कैसे ली जा रही है, इसका जानकारी मांगी जाएगी।