जोधपुर : क्या पुलिस को नहीं होता कोरोना? शादीयों में बैंडबाजे पर बैन जबकि DCP के फेयरवेल में उड़ी गाइडलाइन की धज्जियां

कोरोना की दूसरी लहर का कहर अभी तक थमा नहीं हैं जिसे देखते ही सरकार ने जून महीने के अंत तक किसी भी समारोह पर पाबंदी लगा रखी हैं। शादियों में बैंडबाजे पर भी बैन हैं। लेकिन क्या पुलिस के लिए अलग नियम लागू होते हैं क्योंकि गुरुवार को जोधपुर कमिश्नरेट में अलग ही नजारा देखने को मिला। डीसीपी ईस्ट धर्मेंद्र यादव के सिरोही एसपी बनने पर दिए गए फेयरवेल में बाकायदा बैंडबाजे लाए गए, घोड़े पर एसपी की सवारी निकाली गई। इस कार्यक्रम के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग और कोरोना गाइडलाइन की जमकर धज्जियां उड़ाई गई।
प्रदेशवासियों को अब तक सख्त कोरोना गाइडलाइन का पालन करने की जिम्मेदारी निभाने वाली पुलिस का खुद इस तरह गाइडलाइन तोड़ना चर्चा में आ गया। हालांकि पुलिस अधिकारियों ने इस संबंध में कहा कि डीसीपी के ट्रांसफर पर पहले कंधे पर उठाने की परंपरा थी, लेकिन कोरोना के चलते घोड़ी मंगवाई ताकि किसी को कोरोना का खतरा नहीं रहे। समारोह भी बेहद छोटा रखा गया।
जोधपुर कमिश्नरेट ईस्ट कार्यालय में बुधवार को समारोह सा माहौल नजर आया। बैंड की धुन दूर तक गूंज रही थी। कार्यालय परिसर में घोड़े पर सवार पूर्व डीसीपी धर्मेंद्र यादव सभी की बधाइयां स्वीकार कर रहे थे। मौका था आईपीएस धर्मेंद्र यादव के सम्मान में विदाई समारोह का। यादव का तबादला सिरोही एसपी के पद पर हो गया और जोधपुर कमिश्नरेट पूर्व में डीसीपी का पदभार भुवन भूषण यादव ग्रहण करेंगे। विदाई समारोह के दौरान घोड़े पर बिठाकर, साफा पहना कर बैंड की धुन पर कार्यालय परिसर में परेड भी करवाई गई।