कोरोना का दौर जारी है जिसमें घटते आंकड़ों की वजह से राहत मिलने लगी हैं। राजस्थान में 35 दिन बाद शुक्रवार को 7 हजार से कम 6,225 केस मिले हैं, जबकि 129 लोगों की मौत हो गई। वहीं राहत की बात ये है कि 18,264 मरीज रिकवर हुए हैं। रिकवरी रेट में भी धीरे-धीरे बढ़ोतरी हो रही है। आज राज्य में रिकवरी रेट 85 फीसदी के नजदीक पहुंच गई। सबसे अच्छी रिकवरी रेट जालौर में 94 फीसदी, जबकि सबसे कम 63 फीसदी जैसलमेर की है।
शुक्रवार को सबसे ज्यादा 1,251 मरीज जयपुर में मिले हैं, जबकि 28 मरीजों की इस बीमारी से मौत हुई है। जयपुर में 2,897 मरीज रिकवर हुए हैं। राजस्थान में मुख्यमंत्री के गृह जिला जोधपुर में रिकवरी तेजी से हो रही है। यहां 10 दिन पहले तक 24,400 से ज्यादा एक्टिव केस थे, जो अब कम होकर 9231 पर पहुंच गए। प्रदेश के 33 में 14 जिले ऐसे हैं, जहां 100 से कम संख्या में मरीज मिले हैं। सबसे कम 12 मरीज जालौर जिले में मिले हैं। जालौर के अलावा सीकर, सिरोही, राजसमंद, प्रतापगढ़, सवाई माधोपुर, करौली, झालावाड़, धौलपुर, दौसा, बूंदी, चित्तौड़गढ़ और बारां जिले में भी 100 से कम केस मिले हैं। कोरोना की बात करें तो राजस्थान देश में छत्तीसगढ़ के बाद देश का 10वां ऐसा राज्य बन गया जहां इस पूरे संक्रमितों की संख्या 9 लाख के पार हो गई।मरीजों की बढ़ती रिकवरी का नतीजा है कि प्रदेश में अब हर बड़े अस्पतालों में लोगों को ऑक्सीजन सपोर्ट के बैड्स आसानी से मिलने शुरू हो गए हैं। SMS अस्पताल में तो क्रिटिकल मरीजों की संख्या में भी अब कमी आने लगी है। यहां 136 ICU बैड्स में से 10 फीसदी तो खाली हो पड़े हैं। हालांकि, सबसे बड़े डेडिकेटेड कोविड अस्पताल RUHS में अभी क्रिटिकल मरीजों के लिए ICU बैड्स और वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं हैं। राजस्थान में एक तरफ तो कोरोना के मामले लगातार कम हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर एक नया खतरा म्यूकोमाइकोसिस यानी ब्लैक फंगस के केस तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। राज्य में अब तक ब्लैक फंगस के 700 केस मिल चुके हैं। शुक्रवार देर शाम स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने डोर-टू-डोर सर्वे कर मरीजों को चिह्नित करने के आदेश दिए हैं।