दुबई से भारत लाया गया ड्रग्स केस का आरोपी वीरेंद्र बसोया, ₹6000 करोड़ के नेटवर्क से जुड़ा है मामला

ड्रग्स तस्करी से जुड़े एक बड़े मामले में भारत को अहम कामयाबी मिली है। आरोपी वीरेंद्र सिंह बसोया को दुबई से भारत लाया गया है। एनसीबी की ओर से उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था, जिसके बाद UAE में उसकी गिरफ्तारी हुई। भारत सरकार की पहल के बाद उसे डिपोर्ट किया गया और शुक्रवार को एयर इंडिया की फ्लाइट नंबर 4310 से भारत लाया गया।

वीरेंद्र सिंह बसोया पर पुणे के करीब 6000 करोड़ रुपये के ड्रग्स मामले में शामिल होने का आरोप है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, वह दिल्ली पुलिस के ड्रग्स मामले के मुख्य आरोपी संदीप धुनिय का करीबी बताया जाता है। हालांकि, इस मामले का मुख्य आरोपी संदीप धुनिय दुबई से पाकिस्तान जाने में सफल रहा और फिलहाल भारतीय एजेंसियों की पकड़ से बाहर है।

अमित शाह ने कार्रवाई को बताया अहम उपलब्धि

वीरेंद्र बसोया को भारत लाए जाने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार विदेशों में छिपे ड्रग्स तस्करों को लगातार ट्रैक कर रही है और उनके पूरे नेटवर्क को खत्म करने के लिए कार्रवाई की जा रही है।

अमित शाह ने कहा कि नारकोटिक्स के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत एनसीबी ने UAE से भगोड़े ड्रग्स किंगपिन वीरेंद्र सिंह बसोया को वापस लाने में सफलता हासिल की है। उन्होंने यह भी कहा कि एजेंसियां अपराधियों का पता लगाने के लिए अलग-अलग स्तरों पर काम कर रही हैं और विदेशों में छिपे ड्रग तस्करों के लिए भी भारतीय कानून से बचना आसान नहीं होगा।

970 किलो मेफेड्रोन बरामदगी से जुड़ा मामला

वीरेंद्र बसोया के खिलाफ कार्रवाई जिस मामले में हुई है, उसकी जांच में बड़े पैमाने पर ड्रग्स की तस्करी का नेटवर्क सामने आने की बात कही गई है। आरोप है कि मेफेड्रोन की एक बड़ी खेप लंदन भेजने की तैयारी की जा रही थी।

इस मामले में पुणे पुलिस ने 21 फरवरी 2024 को दिल्ली में कार्रवाई करते हुए दिवेश चरंजीत भूतानी और संदीपकुमार राजपाल बैसोया को गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार, दोनों के पास से लगभग 970 किलोग्राम मेफेड्रोन बरामद किया गया था। जांच में यह बात सामने आई कि इस खेप को लंदन भेजने की योजना थी और इसके लिए डेल्टा लॉजिस्टिक्स के जरिए कंसाइनमेंट तैयार किया जा रहा था।
जांच में वीरेंद्र बसोया की भूमिका का दावा

जांच एजेंसियों के मुताबिक, दिवेश चरंजीत भूतानी और संदीपकुमार राजपाल बैसोया कथित तौर पर वीरेंद्र सिंह बसोया के निर्देश पर काम कर रहे थे। इसी आधार पर जांच में ड्रग्स की सप्लाई और उसे विदेश भेजने की व्यवस्था में वीरेंद्र बसोया की भूमिका महत्वपूर्ण बताई गई है।

इसी मामले में डेल्टा लॉजिस्टिक्स के मालिक संदीप हनुमानसिंह यादव और कंपनी के मैनेजर देवेंद्र रामफुल यादव को भी 21 फरवरी 2024 को गिरफ्तार किया गया था। जांच के अनुसार, नेटवर्क में बड़ी मात्रा में मेफेड्रोन को देश से बाहर भेजने के लिए लॉजिस्टिक्स और कंसाइनमेंट व्यवस्था का इस्तेमाल किया जा रहा था।

बसोया के बेटे के खिलाफ भी रेड कॉर्नर नोटिस

जांच का दायरा वीरेंद्र बसोया तक ही सीमित नहीं है। उसके बेटे ऋषभ के खिलाफ भी रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने की जानकारी दी गई है। वह फिलहाल विदेश में बताया गया है।

वहीं, संदीप धुनिय के पाकिस्तान चले जाने के कारण मामले में एक प्रमुख आरोपी अभी भारतीय एजेंसियों की गिरफ्त से बाहर है। वीरेंद्र बसोया को दुबई से भारत लाए जाने को ड्रग्स तस्करी के खिलाफ चल रही कार्रवाई में महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा जा रहा है।