ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर कांग्रेस का देशभर में प्रदर्शन, दिल्ली से पटना तक मार्च

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस ने शुक्रवार को देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन किया। दिल्ली, पटना, देहरादून, चंडीगढ़, गुवाहाटी समेत कई शहरों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मार्च निकाला और चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन को देखते हुए कई जगहों पर पुलिस ने बैरिकेडिंग की, जबकि पटना में प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया।

कांग्रेस का यह विरोध प्रदर्शन मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों के बीच हुआ। पार्टी CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है। कांग्रेस का आरोप है कि चुनाव आयोग के भीतर फैसले लेने की प्रक्रिया को लेकर गंभीर मतभेद सामने आए हैं।

दिल्ली से देहरादून और पटना तक प्रदर्शन

दिल्ली में प्रदर्शन को देखते हुए जंतर-मंतर के आसपास सुरक्षा बढ़ाई गई और बैरिकेड लगाए गए। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मार्च निकालकर CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।

पटना में प्रदर्शन के दौरान स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। वहीं देहरादून में कुछ कांग्रेस कार्यकर्ता पुलिस की बैरिकेडिंग पर चढ़ गए। चंडीगढ़ और गुवाहाटी समेत अन्य शहरों में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन और मार्च किया।

इन प्रदर्शनों के जरिए कांग्रेस ने SIR और चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची में बदलाव से जुड़े फैसलों को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब मिलना चाहिए और CEC को इस्तीफा देना चाहिए।

10 महीने में 14 बार आपत्ति का दावा

इस विवाद की पृष्ठभूमि में चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों से जुड़ी एक रिपोर्ट का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर औपचारिक आपत्ति दर्ज की।

इन आपत्तियों में SIR के अलावा नए मतदाताओं से जुड़े नियम, मतदाता डेटा और सॉफ्टवेयर में किए गए बदलाव जैसे मुद्दे शामिल बताए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों को लेकर अपनी असहमति दर्ज कराई।

हालांकि, चुनाव आयोग की ओर से कहा गया है कि आयोग के फैसले सर्वसम्मति से लिए जा रहे थे। ऐसे में तीन सदस्यीय चुनाव आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया और SIR को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
CJP ने भी मांगा ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा

CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग सिर्फ कांग्रेस तक सीमित नहीं है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने भी गुरुवार को उनके इस्तीफे की मांग की थी। पार्टी ने ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे की डेडलाइन देते हुए कहा था कि अगर वह इस्तीफा नहीं देते हैं तो 2 अक्टूबर से देशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा।

CJP ने इसके साथ ही 'Election Commission Thik Karo' अभियान शुरू करने का ऐलान किया है। पार्टी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन की बात कही है।

SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका

मतदाता सूची के SIR से जुड़े फैसलों और इसकी प्रक्रिया को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर की गई है। याचिका में SIR से संबंधित फैसलों, दिशानिर्देशों और सॉफ्टवेयर में किए गए बदलावों की संवैधानिक वैधता पर सवाल उठाए गए हैं।

याचिकाकर्ताओं ने मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने की जांच की मांग भी की है। इस तरह SIR को लेकर राजनीतिक विरोध के साथ मामला न्यायिक स्तर पर भी पहुंच चुका है।

महाराष्ट्र में भी हाईकोर्ट में चुनौती

महाराष्ट्र की मतदाता सूची में प्रस्तावित SIR को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट में भी याचिकाएं दायर की गई हैं। इन याचिकाओं में SIR की संवैधानिक वैधता, इसकी प्रक्रिया और इसे लागू करने के तरीके को चुनौती दी गई है।

याचिकाकर्ताओं का दावा है कि दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद SIR से जुड़े कई आदेश जारी किए गए। याचिकाओं में इन आदेशों को रद्द करने और चुनाव आयोग के भीतर दर्ज की गई आपत्तियों को सार्वजनिक करने की मांग की गई है।

SIR को लेकर जारी विवाद में अब कांग्रेस के देशव्यापी प्रदर्शन, CEC के इस्तीफे की मांग, चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेद और अदालतों में दायर याचिकाएं प्रमुख मुद्दे बन गए हैं। इसी के साथ चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर राजनीतिक दलों तथा न्यायपालिका में बहस जारी है।