विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी विवाद के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी दलों ने अपना विरोध तेज कर दिया है। विपक्षी नेताओं ने उन्हें पद से हटाने के लिए महाभियोग प्रस्ताव लाने की बात कही है। कांग्रेस, जेएमएम, सीपीआई (एम) और समाजवादी पार्टी के नेताओं ने अलग-अलग बयानों में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR से जुड़े फैसलों पर गंभीर सवाल उठाए।
कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि संविधान में मिले अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि दो चुनाव आयुक्तों ने ज्ञानेश कुमार के कामकाज को लेकर आपत्ति जताई है और 10 महीने में 14 बार नियमों के खिलाफ काम किए जाने का आरोप लगाया है।
तिवारी ने भाजपा पर ज्ञानेश कुमार का बचाव करने का आरोप लगाते हुए उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज करने और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच कराने की मांग की। उन्होंने भाजपा और ज्ञानेश कुमार पर लोकतंत्र तथा संविधान के खिलाफ काम करने का आरोप भी लगाया।
राहुल गांधी को लेकर पूछे गए सवाल पर प्रमोद तिवारी ने कहा कि उन्होंने करीब तीन साल पहले जिन मुद्दों को उठाया था, वही बातें अब दोनों चुनाव आयुक्तों की ओर से भी कही गई हैं। तिवारी ने राहुल गांधी के रुख का समर्थन करते हुए भाजपा पर लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
कांग्रेस नेता ने ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार करने की मांग कीकांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने मुख्य चुनाव आयुक्त की गिरफ्तारी की मांग की। उन्होंने कहा कि अगर ज्ञानेश कुमार में नैतिकता है तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। भगत ने कहा कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना तथा मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना है।
उन्होंने SIR के तहत 13 करोड़ नाम हटाए जाने का दावा किया और कहा कि इस प्रक्रिया में एक भी नाम नहीं जोड़ा गया। भगत ने आरोप लगाया कि संविधान ने चुनाव आयोग को स्वतंत्र संस्था बनाया है, लेकिन ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में आयोग को सरकारी विभाग की तरह चलाया जा रहा है।
उदित राज ने लगाए तंत्र को प्रभावित करने के आरोपकांग्रेस नेता उदित राज ने भाजपा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर ज्ञानेश कुमार का समर्थन करने और पूरे तंत्र को प्रभावित करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि Form-6 में बदलाव किया गया, जिसे उनके मुताबिक केवल संसद और सरकार कर सकती है। उदित राज ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की।
विपक्ष की ओर से प्रस्ताव लाने की तैयारी पर उदित राज ने कहा कि संसद को संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए मिले अधिकारों का इस्तेमाल करना चाहिए। उन्होंने इसे केवल कांग्रेस या किसी एक क्षेत्रीय दल का मुद्दा नहीं बताते हुए आम लोगों से जुड़े मामले के तौर पर पेश किया।
उन्होंने लोगों से सड़कों पर उतरने की अपील भी की और मध्यावधि चुनाव की मांग रखी।
जेएमएम ने भाजपा और मुख्य चुनाव आयुक्त पर मिलीभगत का आरोप लगायाजेएमएम प्रवक्ता मनोज पांडेय ने कहा कि यदि सरकार विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोपों को गंभीर मानती है तो मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए थी। उन्होंने भाजपा और ज्ञानेश कुमार के बीच मिलीभगत का आरोप लगाया।
पांडेय ने दावा किया कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी कोशिशों से एक राजनीतिक दल को फायदा पहुंचाने का प्रयास किया गया है। हालांकि, ये उनके द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं।
चुनाव आयोग को लेकर सुधांशु त्रिवेदी के बयान पर भी विवादकांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी के चुनाव आयोग को लेकर दिए गए बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग और उसके अधिकारी भाजपा के कहने पर काम कर रहे हैं और कथित अनियमितताओं से भाजपा को फायदा हो रहा है।
राजपूत ने हरियाणा की मतदाता सूची का मुद्दा उठाते हुए सवाल किया कि वहां 19 लाख मतदाता कहां से और क्यों जोड़े गए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी पहले भी इस मुद्दे को लेकर सबूत सामने रख चुके हैं।
सीपीआई (एम) ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग कीसीपीआई (एम) सांसद वी. शिवदासन ने कहा कि इंडी गठबंधन और विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त के कथित लोकतंत्र-विरोधी रवैये और कदमों के खिलाफ मिलकर काम करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की।
शिवदासन ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की विश्वसनीयता प्रभावित हो रही है और मतदाता सूची से बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने RSS और भाजपा पर चुनाव आयोग तथा उससे जुड़ी मशीनरी के साथ मिलकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नुकसान पहुंचाने का आरोप भी लगाया।
सपा ने चुनाव आयुक्तों के बीच मतभेद का मुद्दा उठायासमाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेद को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि तीन चुनाव आयुक्तों में से दो एक तरफ और एक दूसरी तरफ होने की स्थिति को लेकर राजनीतिक दलों तथा लोगों में नाराजगी है।
वर्मा ने दावा किया कि इन परिस्थितियों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है कि ज्ञानेश कुमार अब उत्तर प्रदेश नहीं जाएंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा उत्तर प्रदेश में और जोखिम नहीं लेना चाहती।
विपक्षी नेताओं के इन बयानों में ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयोग और भाजपा के खिलाफ लगाए गए आरोप उनके राजनीतिक दावे और मांगें हैं। दिए गए संदर्भ में इन आरोपों पर भाजपा या चुनाव आयोग की ओर से कोई अलग प्रतिक्रिया शामिल नहीं है।