NEET UG में 406 अंक हासिल कर MBBS में लिया था दाखिला, अब विवादों में घिरीं सेजल पवार; शवों के प्राइवेट पार्ट के साइज पर टिप्पणी को लेकर मचा बवाल

मुंबई के प्रतिष्ठित सेठ जीएस मेडिकल कॉलेज एवं केईएम अस्पताल की एमबीबीएस छात्रा सेजल पवार इन दिनों एक वायरल वीडियो को लेकर चर्चा के केंद्र में हैं। स्टैंड-अप कॉमेडी शो के दौरान पुरुष शवों के निजी अंगों को लेकर की गई उनकी टिप्पणी पर देशभर में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। इस विवाद के बीच उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि और मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG में प्राप्त अंकों की जानकारी भी सामने आई है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सेजल पवार ने वर्ष 2022 में MBBS पाठ्यक्रम में प्रवेश लिया था। उन्होंने NEET UG परीक्षा में कुल 720 में से 406 अंक हासिल किए थे। आरक्षित वर्ग के तहत उन्हें मुंबई के सरकारी मेडिकल संस्थान सेठ जीएस मेडिकल कॉलेज एवं केईएम अस्पताल में प्रवेश मिला था। उनके शैक्षणिक रिकॉर्ड पर नजर डालें तो 12वीं कक्षा में अंग्रेजी विषय में उन्हें 100 में से 87 अंक प्राप्त हुए थे, जबकि फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी (PCB) विषयों में कुल 300 में से 190 अंक मिले थे। यानी विज्ञान के इन प्रमुख विषयों में उनका प्रदर्शन लगभग 63 प्रतिशत रहा था।

गौरतलब है कि सेठ जीएस मेडिकल कॉलेज और केईएम अस्पताल देश के प्रतिष्ठित सरकारी मेडिकल संस्थानों में गिने जाते हैं, जिनका संचालन बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के अधीन होता है। सामान्य वर्ग के छात्रों को यहां प्रवेश पाने के लिए आमतौर पर NEET UG में 600 से अधिक अंक लाने पड़ते हैं।

वीडियो वायरल होने के बाद अस्पताल प्रशासन हरकत में

सेजल पवार की विवादित टिप्पणी सामने आने के बाद केईएम अस्पताल प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है। अस्पताल प्रबंधन ने तत्काल जांच के आदेश जारी करते हुए एक समिति का गठन किया है और उससे शुक्रवार तक अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा है। दूसरी ओर महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने भी वायरल वीडियो के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

अस्पताल प्रशासन का कहना है कि इस तरह की टिप्पणियां न केवल संस्थान की प्रतिष्ठा को प्रभावित करती हैं बल्कि पूरे मेडिकल पेशे की गरिमा पर भी सवाल खड़े करती हैं। इसी कारण मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने की बात कही गई है।
क्या था पूरा विवाद?

यह विवाद उस समय शुरू हुआ जब सोशल मीडिया पर कॉमेडियन प्रणित मोरे के शो का एक वीडियो तेजी से वायरल होने लगा। इससे पहले इसी शो से जुड़ा ‘370 रुपए की बिरयानी’ वाला वीडियो भी चर्चा में रहा था। वायरल क्लिप में एमबीबीएस अंतिम वर्ष की छात्रा और सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर सेजल पवार दर्शकों के साथ बातचीत के दौरान मेडिकल कॉलेज में अध्ययन और डिसेक्शन के लिए उपयोग किए जाने वाले पुरुष शवों के निजी अंगों को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करती नजर आईं।

वीडियो में उन्होंने दावा किया कि मेडिकल शिक्षा के दौरान वह और उनके कुछ साथी छात्र दान में मिले पुरुष शवों के प्राइवेट पार्ट्स को देखकर उनका मजाक उड़ाते थे। इस बयान को बिना किसी संपादन या सेंसर के सोशल मीडिया पर साझा किया गया, जिसके बाद यह तेजी से वायरल हो गया और लोगों का आक्रोश भड़क उठा।

सोशल मीडिया यूजर्स ने उनकी टिप्पणी को असंवेदनशील और अमर्यादित बताते हुए कड़ी आलोचना की। कई लोगों ने उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की, जबकि कुछ ने उनका मेडिकल लाइसेंस तक रद्द करने की बात कही। मेडिकल छात्रों के संगठनों और बड़ी संख्या में डॉक्टरों ने भी इस बयान की निंदा की है।

डॉक्टरों और संगठनों ने जताई नाराजगी

विवाद बढ़ने के बाद महाराष्ट्र एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स सहित कई चिकित्सकों ने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी व्यक्त की। उनका कहना है कि डॉक्टरों से समाज उच्च नैतिक मानकों की अपेक्षा करता है और इस प्रकार के बयान मेडिकल समुदाय की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं।

डॉक्टरों का तर्क है कि ऐसी घटनाओं से मरीजों और आम लोगों का चिकित्सा व्यवस्था पर भरोसा कमजोर हो सकता है। उनका मानना है कि चिकित्सा शिक्षा और पेशे से जुड़े लोगों को विशेष रूप से संवेदनशील विषयों पर जिम्मेदारी के साथ बोलना चाहिए।

सार्वजनिक रूप से मांगी माफी

विवाद बढ़ने और लगातार आलोचना झेलने के बाद सेजल पवार ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी करते हुए कहा कि वह अपनी बात का बचाव नहीं कर रही हैं और अपनी टिप्पणी की पूरी जिम्मेदारी स्वीकार करती हैं।

सेजल ने बताया कि यह उनका पहला कॉमेडी शो था और उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं था कि एक महीने पहले कही गई बात इतना बड़ा विवाद खड़ा कर देगी। उन्होंने कहा कि यह पूरा घटनाक्रम उनके लिए एक सीख की तरह रहा है और इससे उन्हें संवेदनशील मुद्दों पर बोलते समय अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता का एहसास हुआ है।

विवाद के बाद उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट में भी कई बदलाव किए। बताया गया कि उन्होंने अपने सभी फॉलोइंग अकाउंट्स को अनफॉलो कर दिया, प्रोफाइल बायो हटा दिया और सोशल मीडिया गतिविधियां सीमित कर दीं।

बॉडी डोनर्स के सम्मान का मुद्दा भी उठा

सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में लोगों ने इस टिप्पणी को शरीर दान करने वाले व्यक्तियों और उनके परिवारों के प्रति अपमानजनक बताया। आलोचकों का कहना है कि मेडिकल शिक्षा और शोध के लिए अपने शरीर दान करने वाले लोग समाज के लिए महत्वपूर्ण योगदान देते हैं और उनके प्रति सम्मान बनाए रखना चिकित्सकों की जिम्मेदारी है।

कई लोगों ने आशंका जताई कि यदि इस तरह की घटनाएं सामने आती रहीं तो भविष्य में लोग मेडिकल शिक्षा और अनुसंधान के लिए अपनी बॉडी डोनेट करने से हिचकिचा सकते हैं। यही कारण है कि यह मामला केवल एक वायरल वीडियो तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मेडिकल एथिक्स और पेशेवर जिम्मेदारी पर भी व्यापक बहस का विषय बन गया है।

लाइसेंस रद्द करने की मांग तेज

वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर सेजल पवार के खिलाफ कार्रवाई की मांग लगातार बढ़ रही है। कई यूजर्स और संगठनों ने उन्हें MBBS की प्रैक्टिस से रोकने और भविष्य में मेडिकल लाइसेंस जारी न करने की मांग उठाई है। हालांकि इस मामले में अंतिम निर्णय जांच रिपोर्ट और संबंधित संस्थानों की कार्रवाई के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल अस्पताल प्रशासन, साइबर पुलिस और मेडिकल संगठनों की नजर इस पूरे मामले पर बनी हुई है।