भारत में मोबाइल सुरक्षा को नए स्तर पर ले जाने के लिए दूरसंचार विभाग (DoT) ने एक बड़ा फैसला लागू कर दिया है। अब देश में बनने वाले या विदेश से आयात होकर आने वाले हर नए स्मार्टफोन में संचार साथी ऐप पहले से इंस्टॉल रहेगा। यह ऐप फोन से न तो हटाया जा सकेगा और न ही डिसेबल किया जा सकेगा। सरकार का कहना है कि यह कदम मोबाइल चोरी, धोखाधड़ी और साइबर अपराधों को रोकने में बेहद महत्वपूर्ण होगा।
संचार साथी ऐप को खास तौर पर मोबाइल उपयोगकर्ताओं को सुरक्षा से जुड़ी सेवाएं देने के लिए बनाया गया है। यदि फोन गुम हो जाए या चोरी हो जाए, तो इस ऐप की मदद से कुछ ही मिनटों में डिवाइस को ब्लॉक किया जा सकता है और रिपोर्ट दर्ज की जा सकती है। साथ ही यह ऐप उपयोगकर्ता को फर्जी लिंक, स्पैम कॉल, संदिग्ध मैसेज और उनके नाम पर चल रहे सभी मोबाइल कनेक्शनों पर नजर रखने की सुविधा देता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब IMEI जैसे लंबे नंबर याद रखने की आवश्यकता नहीं रह जाएगी।
राजनीतिक हलचल तेज—विपक्ष ने उठाए गंभीर सवालसरकार के इस आदेश के बाद विपक्ष ने इसे लेकर कड़ा विरोध जताया है। राज्यसभा सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि यह कदम नागरिकों की निजता पर सीधा हमला है। उनका दावा है कि फोन में एक ऐसा सरकारी ऐप प्री-लोडेड होना, जिसे हटाया न जा सके, नागरिकों की गतिविधियों की निगरानी के लिए खतरनाक मिसाल है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह निर्देश संविधान के अनुच्छेद 21 में दिए गए गोपनीयता के अधिकार के खिलाफ है। वेणुगोपाल ने आगे कहा कि ऐसी व्यवस्था “हर भारतीय पर नजर रखने की मशीन” की तरह काम कर सकती है, इसलिए इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों के विरुद्ध एक गंभीर कदम मान रहा है।
संचार साथी के अब तक के प्रभाव—लाखों लोग हुए लाभान्वितयह ऐप पिछले कुछ वर्षों में मोबाइल सुरक्षा के क्षेत्र में अहम भूमिका निभा रहा है। अब तक लाखों चोरी या गुम हुए फोन को ब्लॉक किया जा चुका है, कई मोबाइलों की लोकेशन भी ट्रेस की जा चुकी है। करोड़ों यूज़र्स ने इस ऐप के माध्यम से यह पता लगाया है कि उनके नाम पर कितने मोबाइल कनेक्शन चल रहे हैं, जिससे कई संभावित धोखाधड़ी समय रहते रोकी जा सकीं।
गूगल प्ले स्टोर और एप्पल ऐप स्टोर पर इस ऐप के डाउनलोड लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे इसकी उपयोगिता और विश्वसनीयता साफ झलकती है।
फोन कंपनियों के लिए नए मानक—90 दिन में लागू करना अनिवार्यसरकार ने निर्देश दिया है कि देश में बिकने वाले हर नए स्मार्टफोन में संचार साथी पहले से मौजूद होना चाहिए। साथ ही यह भी अनिवार्य किया गया है कि पुराने स्टॉक वाले फोन में भी सॉफ्टवेयर अपडेट के जरिए ऐप शामिल किया जाएगा। एप्पल, सैमसंग, ओप्पो, वीवो, शाओमी और अन्य सभी प्रमुख कंपनियों को 90 दिनों के भीतर इस आदेश के अनुसार प्रक्रिया शुरू करनी होगी और 120 दिन के अंदर सरकार को अनुपालन रिपोर्ट सौंपनी होगी।
सरकार की मंशा—मोबाइल फ्रॉड पर लगेगी रोक, सुरक्षा होगी मजबूतDoT का कहना है कि देश में तेजी से बढ़ रही मोबाइल धोखाधड़ी, नकली फोन, साइबर अपराध और संदिग्ध मोबाइल गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए यह कदम जरूरी था।
संचार साथी ऐप के जरिए:- चोरी हुए डिवाइस को तुरंत ब्लॉक किया जा सकता है
- नकली IMEI और फर्जी मोबाइल पहचान उजागर की जा सकती है
- स्पैम और साइबर फ्रॉड पर नियंत्रण रखा जा सकता है
- नागरिकों को सुरक्षा का आसान और विश्वसनीय साधन मिल सकता है
सरकार का दावा है कि यह बदलाव भारत में मोबाइल सुरक्षा को “सिस्टम लेवल” पर मजबूत करेगा और डिजिटल फ्रॉड कम करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।