राहुल गांधी के किसानों को लेकर दिए बयान पर हंगामा, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने सरकार का पक्ष रखा

नई दिल्ली: लोकसभा में विपक्षी नेता राहुल गांधी द्वारा किसानों से जुड़े बयान ने संसद में हलचल मचा दी। राहुल ने लोकसभा में कहा कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील में किसानों के हितों की उपेक्षा की गई और इसे बराबरी के आधार पर नहीं किया गया। उन्होंने जोर देकर कहा, सरकार को शर्म आनी चाहिए कि उसने देश और किसानों के हितों के साथ समझौता किया। इस तरह की पहल आज तक किसी प्रधानमंत्री ने नहीं की, और भविष्य में भी कोई नहीं करेगा।

पीयूष गोयल ने किया किसानों के हितों का बचाव

राहुल गांधी के इस बयान पर केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने जवाब दिया। उन्होंने कहा, वाणिज्य मंत्री के रूप में मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि सभी निर्णय किसानों के कल्याण और हितों को ध्यान में रखते हुए लिए गए हैं। हमारी सरकार का उद्देश्य हमेशा उनके हितों की रक्षा करना रहा है।

बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी का हमला

बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी के व्यवहार और बयान की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा, राहुल गांधी जहरीले आरोप लगाकर विदेश जाने में विश्वास रखते हैं। संसद में उनका रवैया सुस्त और अनुशासनहीन रहा। कांग्रेस का आचरण सदन में सड़क किनारे के हंगामे जैसा प्रतीत हुआ। महिलाओं को ढाल बनाकर सत्ता पक्ष पर बैनर लेकर बढ़ना संसदीय मर्यादा के खिलाफ है।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने डेटा सुरक्षा पर ध्यान दिलाया

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत का डेटा कड़े कानूनी ढांचे में सुरक्षित है। उन्होंने बताया, डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट के तहत सभी संवेदनशील क्षेत्रों का अपने-अपने नियम हैं। ऐसे आरोप लगाने से पहले तथ्यों को सत्यापित करना आवश्यक है।

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू का बयान

संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने राहुल गांधी के आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, बजट पर भाषण देते हुए राहुल गांधी बिना किसी तथ्य या प्रमाण के आरोप लगा रहे हैं। उनके भाषण में कही गई गलत बातें, असंसदीय शब्द और झूठ सभी हटा दिए जाएंगे। किसी ने देश को बेचा या खरीदा नहीं है। भारत को किसी के द्वारा खरीदना या बेचना संभव नहीं है।

इस पूरे विवाद ने संसद सत्र में भारी हंगामा पैदा कर दिया है। विपक्षी नेताओं के विरोध और आरोप-प्रत्यारोप के बीच, सरकार ने किसानों और राष्ट्रीय हितों के संरक्षण पर अपने स्थिर रुख को दोहराया।