लोकसभा में महिला आरक्षण मुद्दे पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री Narendra Modi ने विपक्षी दलों से इस महत्वपूर्ण विधेयक का समर्थन करने की अपील की। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि जो दल इसका विरोध करेंगे, उन्हें आने वाले समय में राजनीतिक रूप से इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है। अपने भाषण के बीच एक दिलचस्प क्षण भी आया, जब उन्होंने Akhilesh Yadav को अपना मित्र बताते हुए हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि वे कभी-कभी उनकी मदद भी कर देते हैं। पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि देश में जमीनी स्तर पर महिलाओं के नेतृत्व को पहचानना और उसे आगे बढ़ाना समय की मांग है।
उन्होंने अपने संबोधन में पूर्व रक्षा मंत्री Mulayam Singh Yadav का भी उल्लेख किया और कहा कि वे लंबे समय से इस विषय को उठाते रहे थे। पीएम मोदी ने कहा कि देश की महिलाओं पर भरोसा करना चाहिए और उन्हें 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व का अवसर देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पहले उन्हें मौका दिया जाए, आगे के निर्णय बाद में भी लिए जा सकते हैं।
भाषण के दौरान सपा सांसद Dharmendra Yadav के हस्तक्षेप पर पीएम मोदी ने थोड़ी देर के लिए रुककर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वे उनके आभारी हैं कि उन्होंने उनकी पहचान का जिक्र किया। पीएम ने यह भी दोहराया कि वे अत्यंत पिछड़े वर्ग से आते हैं, लेकिन उनका दायित्व पूरे समाज को साथ लेकर चलने का है। उन्होंने कहा कि संविधान ने उन्हें यही रास्ता दिखाया है और उनके लिए संविधान सर्वोपरि है। उन्होंने इसे संविधान की ताकत बताया कि एक साधारण पृष्ठभूमि से आने वाले व्यक्ति को देश का नेतृत्व करने का अवसर मिला।
महिला आरक्षण पर अपने विचार रखते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जीवन में कुछ ऐसे अवसर आते हैं, जो इतिहास में मील का पत्थर बन जाते हैं। उन्होंने इसे भारतीय संसदीय लोकतंत्र के लिए ऐसा ही एक ऐतिहासिक क्षण बताया। पीएम मोदी ने कहा कि यह व्यवस्था 25-30 साल पहले ही लागू हो जानी चाहिए थी, लेकिन अब भी यह देश के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है। उन्होंने कहा कि भारत की लोकतांत्रिक यात्रा हजारों वर्षों से विकसित होती आई है और यह निर्णय उसमें एक नया अध्याय जोड़ सकता है।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि देश की आधी आबादी को नीति निर्धारण की प्रक्रिया में शामिल करना अब समय की आवश्यकता बन चुकी है। उन्होंने माना कि इस दिशा में पहले ही देरी हो चुकी है, लेकिन अब सभी दलों को मिलकर इसे आगे बढ़ाना चाहिए। उन्होंने कहा कि निजी बातचीत में सभी दल इस मुद्दे का समर्थन करते हैं, लेकिन सार्वजनिक रूप से इसे राजनीतिक रंग दिया जाता है।
अंत में पीएम मोदी ने विपक्षी दलों को मित्रतापूर्ण सलाह देते हुए कहा कि इस मुद्दे को राजनीति से ऊपर उठकर देखना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि जब-जब महिला आरक्षण का विरोध हुआ है, तब-तब देश की महिलाओं ने उसका जवाब दिया है। हालांकि 2024 में सभी दलों की सहमति से यह पारित हुआ, इसलिए किसी को राजनीतिक लाभ या नुकसान नहीं हुआ। उन्होंने दोहराया कि अगर सभी दल मिलकर आगे बढ़ते हैं, तो इसका फायदा किसी एक पार्टी को नहीं बल्कि देश के लोकतंत्र को मिलेगा।