राजस्थान कांग्रेस में लंबे समय से चर्चा का विषय रहे अशोक गहलोत और सचिन पायलट के रिश्तों को लेकर अब एक सकारात्मक संदेश सामने आया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि पार्टी के भीतर चल रहे पुराने मतभेदों को पीछे छोड़ने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि अब सभी नेताओं को मिलकर आगे बढ़ना चाहिए और बीते विवादों को समाप्त मान लेना चाहिए।
जयपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान गहलोत ने कई मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने न केवल पुराने राजनीतिक विवादों पर अपनी स्थिति स्पष्ट की, बल्कि सचिन पायलट के साथ अपने संबंधों को लेकर भी विस्तार से बात की। उनके बयान को कांग्रेस संगठन में एकता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
आज के बाद विवादों का अध्याय खत्म होना चाहिएअशोक गहलोत ने कहा कि उनके ताजा बयान के बाद अब किसी तरह के विवाद को आगे बढ़ाने की जरूरत नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि पार्टी के सभी नेता और कार्यकर्ता आपसी मतभेदों को भुलाकर एकजुट होकर काम करेंगे।
उन्होंने कहा, गलती चाहे किसी की भी रही हो, अब समय आगे बढ़ने का है। हमें पुरानी बातों को भूलकर संगठन और जनता के हित में साथ काम करना चाहिए।
गहलोत ने यह भी याद दिलाया कि उन्होंने पहले भी कई अवसरों पर नेताओं से ‘भूलो और माफ करो’ की भावना अपनाने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि यदि उस समय इस सोच को व्यापक समर्थन मिला होता, तो शायद कई विवाद पैदा ही नहीं होते।
उनके अनुसार राजनीति में व्यक्तिगत मतभेदों को ज्यादा समय तक नहीं ढोना चाहिए, क्योंकि इसका असर संगठन और कार्यकर्ताओं दोनों पर पड़ता है।
कांग्रेस अध्यक्ष पद को लेकर फैली गलतफहमी पर दी सफाईपूर्व मुख्यमंत्री ने कांग्रेस अध्यक्ष पद से जुड़े विवाद पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि देशभर में यह धारणा बना दी गई थी कि उन्होंने मुख्यमंत्री पद बचाने के लिए कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद स्वीकार नहीं किया।
गहलोत ने इस धारणा को पूरी तरह गलत बताया और कहा कि इस मुद्दे को लेकर उन्हें व्यक्तिगत रूप से काफी पीड़ा हुई। उन्होंने बताया कि केवल राजनीतिक विरोधी ही नहीं, बल्कि उनके करीबी मित्र, रिश्तेदार और समर्थक भी इसी भ्रम में आ गए थे।
उन्होंने कहा कि उस समय उन्होंने सिर्फ अपने मन की बात सार्वजनिक रूप से रखी थी। उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति या नेता पर आरोप लगाना नहीं था। गहलोत ने कहा कि जिस पद पर देश के बड़े-बड़े नेताओं ने जिम्मेदारी निभाई हो, उसे कोई भी नेता सम्मान की दृष्टि से ही देखेगा।
उन्होंने सवालिया अंदाज में कहा कि यदि किसी को ऐसा महत्वपूर्ण पद प्रस्तावित किया जाए, तो वह उसे हल्के में क्यों लेगा। उनके मुताबिक उनके फैसले को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया, जिससे अनावश्यक विवाद पैदा हुए।
सचिन पायलट को लेकर दिखाई आत्मीयतासचिन पायलट के साथ संबंधों पर बोलते हुए अशोक गहलोत ने बेहद भावनात्मक अंदाज अपनाया। उन्होंने कहा कि पायलट ने हाल ही में जो बयान दिया था, उसमें कोई गलत बात नहीं थी।
गहलोत ने कहा कि सचिन पायलट उनके लिए हमेशा परिवार के सदस्य की तरह रहे हैं। उन्होंने बताया कि दोनों परिवारों के बीच वर्षों पुराने संबंध हैं और काफी कम उम्र से ही एक-दूसरे के घर आना-जाना रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, सचिन मेरे लिए बेटे जैसे हैं और मैंने जो भी कहा, पूरी ईमानदारी और दिल से कहा था।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनके मन में पायलट के प्रति कोई कटुता नहीं है। राजनीति में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन व्यक्तिगत रिश्ते अलग होते हैं और उन्हें उसी नजरिए से देखा जाना चाहिए।
एकजुट कांग्रेस का संदेश देने की कोशिशराजनीतिक जानकारों का मानना है कि गहलोत के ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब राजस्थान में कांग्रेस संगठन को मजबूत करने की कवायद चल रही है। आगामी राजनीतिक चुनौतियों को देखते हुए पार्टी नेतृत्व भी एकजुटता का संदेश देने की कोशिश कर रहा है।
गहलोत के ताजा बयान को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। उन्होंने साफ संकेत दिया है कि अब पुराने विवादों को पीछे छोड़कर संगठनात्मक मजबूती पर ध्यान देना चाहिए।
उनका कहना है कि कांग्रेस को मजबूत बनाने के लिए सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को एक मंच पर आना होगा। यही कारण है कि उन्होंने एक बार फिर संवाद, समन्वय और आपसी विश्वास की आवश्यकता पर जोर दिया है।
राजनीतिक हलकों में अब इस बात पर नजर बनी हुई है कि गहलोत के इस मेल-मिलाप वाले संदेश का पार्टी के भीतर क्या असर पड़ता है और आने वाले दिनों में कांग्रेस किस तरह की एकजुट तस्वीर पेश करती है।