चुनाव के बाद पेट्रोल-डीजल ₹25-28 प्रति लीटर तक महंगे होंगे? जानिए सरकार का क्या है कहना

चुनावी दौर खत्म होते ही पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹25 से ₹28 प्रति लीटर तक की तेज बढ़ोतरी हो सकती है, ऐसी आशंका ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे भू-राजनीतिक तनाव, खासकर अमेरिका-इजरायल-ईरान विवाद के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर असर देखा जा रहा है। हालांकि अभी तक इसका सीधा असर भारतीय रिटेल बाजार में नहीं दिखा है, क्योंकि सरकार ने अब तक ईंधन की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। लेकिन आने वाले समय में हालात बदल सकते हैं, ऐसा अनुमान कई रिपोर्टों में जताया जा रहा है।

पश्चिम एशिया संकट और तेल बाजार पर दबाव

लाइव मिंट की एक रिपोर्ट के अनुसार कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज (KIE) का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया में तनाव जारी रहता है और कोई स्थायी शांति समझौता नहीं होता, तो चुनावों के बाद भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी संभव है। फिलहाल ब्रेंट क्रूड ऑयल लगभग 104 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर बना हुआ है। इसका प्रमुख कारण अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में ठहराव और क्षेत्रीय तनाव में बढ़ोतरी बताया जा रहा है।

सबसे अहम चिंता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति का करीब 20% और भारत के कच्चे तेल आयात का लगभग 40% इसी रास्ते से होकर गुजरता है। इस मार्ग में किसी भी तरह की बाधा सीधे तौर पर वैश्विक कीमतों को प्रभावित करती है।

₹25 से ₹28 तक बढ़ सकते हैं ईंधन के दाम

ब्रोकरेज रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि अगर स्थिति ऐसी ही बनी रहती है और पश्चिम एशिया में कोई समाधान नहीं निकलता, तो चुनाव खत्म होने के बाद पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में बड़ी बढ़ोतरी हो सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक यदि कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचती हैं और रिफाइनिंग मार्जिन सीमित रहते हैं, तो भारत में ईंधन की कीमतें ₹25 से ₹28 प्रति लीटर तक बढ़ सकती हैं।

गौरतलब है कि देश में चुनावी प्रक्रिया 29 अप्रैल तक चलने वाली है और नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। ऐसे में माना जा रहा है कि सरकार फिलहाल कीमतों में स्थिरता बनाए रख सकती है।
कूटनीतिक तनाव और समुद्री मार्गों पर असर

17 अप्रैल को ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही को लेकर दी गई राहत के बाद तेल बाजार में थोड़ी स्थिरता आई थी। लेकिन इसके बाद हालात फिर से बिगड़ गए और दोनों पक्षों के बीच तनाव और गहरा गया।

कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी मध्यस्थता और अंतरराष्ट्रीय प्रयासों के बावजूद क्षेत्र में संघर्ष विराम पूरी तरह लागू नहीं हो सका है। इसी बीच कई व्यापारिक जहाजों की आवाजाही पर असर पड़ा है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो रही है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट में दावा किया गया कि हाल ही में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कुछ समय के लिए यातायात बाधित हुआ, जब ईरान द्वारा कुछ जहाजों पर कार्रवाई की गई। यह स्थिति पिछले कई हफ्तों में सबसे गंभीर मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पूर्ण शांति समझौता नहीं होता, तब तक कच्चे तेल की सप्लाई में अनिश्चितता बनी रहेगी।

सरकार ने कीमत बढ़ने की खबरों को बताया गलत

इधर भारत सरकार ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में संभावित बढ़ोतरी की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर स्पष्ट किया कि इस तरह का कोई प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन नहीं है।

मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में ईंधन की कीमतें बढ़ने की बातें पूरी तरह भ्रामक हैं और जनता में अनावश्यक डर फैलाने वाली हैं। सरकार ने कहा कि भारत पिछले चार वर्षों से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में स्थिरता बनाए हुए है, जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कई बार बड़े उतार-चढ़ाव आए हैं।

सरकारी बयान में यह भी कहा गया कि तेल विपणन कंपनियों ने लगातार यह सुनिश्चित किया है कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों का सीधा बोझ आम उपभोक्ताओं पर न पड़े और उन्हें राहत मिलती रहे।