NCERT की किताब में न्यायपालिका विरोधी कंटेंट पर सुप्रीम कोर्ट ने जताई कड़ी नाराजगी, CJI बोले- यह जानबूझकर की गई साजिश

सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) की 8वीं कक्षा की किताब में न्यायपालिका को भ्रष्ट दिखाए जाने वाले अध्याय के मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए कड़ी सुनवाई की। इस मामले में सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने NCERT की तरफ से पेश होकर कहा कि वे बिना शर्त माफी मांगते हैं। अगली सुनवाई 11 मार्च को होगी।

CJI ने जताई गहरी चिंता, कहा- यह एक सोचा-समझा कदम हो सकता है

मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने कहा कि मीडिया रिपोर्ट्स में यह मामला देखने को मिला है और सेक्रेटरी जनरल इसे जांचेंगे कि यह सामग्री कैसे प्रकाशित हुई। CJI ने चेतावनी दी कि यह किसी जानबूझकर की गई साजिश का हिस्सा भी हो सकता है।

सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि किताब कुछ प्रतियों के साथ मार्केट में पहुंच गई थी, जिन्हें तुरंत वापस ले लिया गया। CJI ने इसे बड़ा “कैलकुलेटेड मूव” बताया, जिसमें भारतीय न्यायपालिका को भ्रष्ट दिखाया गया और शिक्षक समाज इसे ट्रोल कर रहा है।

जस्टिस बागची ने कहा कि डिजिटल युग में एक किताब की हजारों प्रतियां बन गई होंगी, इसलिए यह समझना जरूरी है कि यह कैसे हुआ। SG मेहता ने स्पष्ट किया कि विवादित चैप्टर को किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता।

CJI ने मीडिया पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इस नोटिस में माफी का कोई उल्लेख नहीं है। सीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने भी आरोप लगाया कि यह जानबूझकर किया गया कदम है।

क्या ये किताबें बाजार में हैं? CJI ने जताई नाराजगी

CJI ने कहा कि यह हमारी संस्थागत जिम्मेदारी है कि पता लगाया जाए कि किताब कैसे प्रकाशित हुई। रजिस्ट्रार जनरल को भेजे गए कम्युनिकेशन में अथॉरिटी बचाव करती नजर आई, जो इस घटना को गहरी साजिश का रूप देती है।

SG मेहता ने बताया कि जिन्होंने दो विवादित चैप्टर तैयार किए हैं, वे भविष्य में UGC या किसी मंत्रालय के साथ काम नहीं कर पाएंगे। CJI ने पूछा कि क्या ये कॉपी मार्केट में हैं। SG ने कहा कि केवल 32 किताबें बाजार में गई थीं, जिन्हें वापस ले लिया गया है और पूरी किताब की समीक्षा की जाएगी।

CJI ने कहा कि यह कदम सोचा-समझा था और पूरी शिक्षण समुदाय को यह संदेश देने की कोशिश की गई कि भारतीय न्यायपालिका भ्रष्ट है और मामलों की लंबित स्थिति दर्शाई गई। इससे छात्र और उनके अभिभावक प्रभावित हो सकते हैं।

कपिल सिब्बल ने सवाल उठाया कि पॉलिटिशियन और नेताओं के संदर्भ में क्या स्थिति है, क्योंकि यह किताब PDF फॉर्मेट में भी मौजूद है। CJI ने लोकतंत्र के तीन अंगों—विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका—की अहमियत पर जोर दिया।

वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने आरोप लगाया कि ऑनलाइन सर्कुलेशन हार्ड कॉपी से कहीं अधिक व्यापक है।
हम और गहरी जांच चाहते हैं” – CJI

CJI ने मामले की गंभीरता जताते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट इस घटना की और गहन जांच करेगा। न्यायालय यह पता लगाएगा कि कौन जिम्मेदार है और इसकी सजा सुनिश्चित की जाएगी। CJI ने स्पष्ट किया कि केस को बंद नहीं किया जाएगा।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वह पूरे इंस्टीट्यूशन के साथ खड़े हैं और कोई भी दोषी इससे बचकर नहीं जाएगा।

CJI ने संविधान निर्माताओं की दूरदर्शिता पर भी जोर दिया और कहा कि उन्होंने विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका को स्वतंत्र और स्वायत्त बनाने का ध्यान रखा ताकि लोकतांत्रिक ताने-बाने की सुरक्षा हो सके। इसके बावजूद फरवरी 2026 में NCERT द्वारा ग्रेड II के लिए प्रकाशित सोशल साइंस की किताब ‘Exploring Society India and Beyond’ के पहले एडिशन में ऐसी सामग्री पाई गई, जिसने न्यायपालिका के खिलाफ सैकड़ों शिकायतों का उल्लेख किया।

CJI ने कहा कि किताब में पुराने CJI के भाषण के कुछ शब्दों का संदर्भ देकर यह दिखाया गया कि न्यायपालिका ने खुद पारदर्शिता की कमी और संस्थागत भ्रष्टाचार स्वीकार किया। यह सामग्री बेहद लापरवाह ढंग से तैयार की गई थी। इस पर अपनी राय देने के बजाय, UGC के डायरेक्टर ने इसे बचाने की कोशिश की।

सुप्रीम कोर्ट ने माफी स्वीकार करने से किया इंकार

सुप्रीम कोर्ट ने NCERT द्वारा माफी मांगने को तुरंत स्वीकार नहीं किया और कारण बताओ नोटिस जारी किया। कोर्ट ने कहा कि माफी की सच्चाई और वैधता आगे चलकर तय की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट ने NCERT को निर्देश दिया कि केंद्र और राज्य सरकारों के सहयोग से किताब की सभी हार्ड और सॉफ्ट कॉपी, चाहे वे स्कूलों या रिटेल दुकानों में हों, तुरंत सार्वजनिक पहुँच से हटा दी जाए। इसके साथ ही, सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म से भी इसे हटाने का आदेश दिया गया। कोर्ट ने NCERT से कम्प्लायंस रिपोर्ट जमा करने को कहा।

किताब के प्रोडक्शन और डिस्ट्रीब्यूशन पर पूर्ण बैन

सुप्रीम कोर्ट ने NCERT के डायरेक्टर को निर्देश दिया कि स्कूलों में भेजी गई सभी किताबों को तुरंत ज़ब्त करें और दो हफ्तों के भीतर कम्प्लायंस रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

CJI ने स्पष्ट किया कि किताब के प्रोडक्शन और डिस्ट्रीब्यूशन पर पूरी तरह बैन रहेगा। इसे फिजिकली या डिजिटल रूप में वितरित करने का कोई प्रयास सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन माना जाएगा।