बेंगलुरु और मुंबई समेत कई शहरों में LPG की कमी, हरदीप पुरी ने पीएम मोदी के साथ की अहम बैठक

देश के कई बड़े शहरों में एलपीजी की कमी को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। इसी मुद्दे पर मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। इस बैठक में लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) की आपूर्ति को स्थिर रखने और मौजूदा संकट से निपटने के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई।

दरअसल, मिडिल ईस्ट में ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे सैन्य तनाव का असर वैश्विक तेल और गैस बाजार पर पड़ रहा है। इस टकराव के चलते ऊर्जा आपूर्ति में बाधा आने की आशंका बढ़ गई है, जिसका असर भारत समेत कई देशों पर दिखाई दे रहा है।

होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से बढ़ी चिंता

सरकार ने मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के असर से देश के घरेलू उपभोक्ताओं को बचाने के लिए एक रणनीतिक योजना पर काम शुरू किया है। मौजूदा संकट तब और गहरा गया जब अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान की प्रतिक्रिया के चलते होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने लगी।

यह समुद्री मार्ग भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद अहम माना जाता है। भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरतों का लगभग 62 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है, जिसमें बड़ी मात्रा इसी मार्ग से होकर आती है। ऐसे में अगर यह रास्ता बाधित होता है तो देश में गैस आपूर्ति पर सीधा असर पड़ सकता है।
गैस वितरण का ढांचा क्या है?

भारत में हर साल करीब 31.3 मिलियन टन एलपीजी की खपत होती है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने गैस वितरण का ढांचा दो प्रमुख हिस्सों में बांटा हुआ है।

घरेलू क्षेत्र: कुल एलपीजी खपत का लगभग 87 प्रतिशत हिस्सा।

कमर्शियल क्षेत्र: होटल, रेस्टोरेंट और उद्योगों के लिए लगभग 13 प्रतिशत हिस्सा।

सरकार का कहना है कि मौजूदा हालात में आम नागरिकों और घरेलू रसोई गैस की जरूरतों को प्राथमिकता दी जा रही है। इसी वजह से कमर्शियल सेक्टर में गैस सप्लाई की कमी ज्यादा महसूस की जा रही है।

इस स्थिति का असर खासकर मुंबई और बेंगलुरु जैसे बड़े शहरों में देखने को मिल रहा है, जहां कई होटल और रेस्टोरेंट गैस की कमी से प्रभावित हुए हैं। होटल और रेस्टोरेंट से जुड़े संगठनों ने भी इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की है।

संकट से निपटने के लिए मंत्रालय के कदम

एलपीजी की कमी को देखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने कई आपातकालीन उपाय लागू किए हैं। रिफाइनरियों को निर्देश दिया गया है कि वे पेट्रोकेमिकल उत्पादन के लिए इस्तेमाल होने वाली गैस को कम करें और एलपीजी उत्पादन को अधिकतम स्तर तक बढ़ाएं।

इसके साथ ही जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकने के लिए घरेलू उपभोक्ताओं के लिए एलपीजी रिफिल बुकिंग के अंतराल को पहले के 21 दिनों से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है।

सरकार ने यह भी तय किया है कि आयातित एलपीजी का इस्तेमाल जरूरी गैर-घरेलू क्षेत्रों, विशेष रूप से अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों में प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा, ताकि जरूरी सेवाएं प्रभावित न हों।

कमर्शियल सेक्टर के लिए बनाई गई समिति


होटल, रेस्टोरेंट और अन्य उद्योगों को गैस आपूर्ति से जुड़ी मांगों की समीक्षा के लिए ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के तीन एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स की एक समिति गठित की गई है।

यह समिति विभिन्न सेक्टरों से मिलने वाले अनुरोधों का अध्ययन करेगी और जरूरत, प्राथमिकता तथा उपलब्धता के आधार पर एलपीजी का वितरण तय करेगी। सरकार का कहना है कि इन उपायों के जरिए मौजूदा संकट के दौरान गैस सप्लाई को संतुलित बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।