बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने ‘पितृसत्ता खत्म करो’ के मुद्दे को लेकर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोला है। पुणे में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में दिए गए संदेश को लेकर बांसुरी ने सवाल उठाया कि महिलाओं से जुड़े इस मुद्दे पर कांग्रेस की राजनीति का रुख क्या हर मामले में एक जैसा रहा है। उन्होंने राहुल गांधी पर एकतरफा नैरेटिव बनाने और अपनी ही पार्टी के नेताओं से जुड़े विवादों पर चुप रहने का आरोप लगाया।
‘पितृसत्ता खत्म करने’ के नारे पर राहुल गांधी से सवालबांसुरी स्वराज ने कहा कि वह ‘Smash the Patriarchy’ यानी ‘पितृसत्ता को खत्म करो’ के विचार से सहमत हैं, लेकिन राहुल गांधी से यह जानना चाहती हैं कि क्या यह संदेश केवल पुणे के मंच तक सीमित है। उनके मुताबिक, राहुल गांधी को अपनी पार्टी के भीतर राजनीतिक पितृसत्ता के सवाल पर भी जवाब देना चाहिए।
बीजेपी सांसद ने राहुल गांधी की राजनीतिक सोच पर भी सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के पास स्पष्ट विजन और सकारात्मक एजेंडा नहीं है और उनकी रिसर्च टीम से मिलने वाली जानकारी के आधार पर वे देश के मतदाताओं और युवाओं को भ्रमित करने की कोशिश करते हैं।
कंगना रनौत और हेमा मालिनी का मुद्दा उठायाबांसुरी स्वराज ने अपने आरोपों के समर्थन में कांग्रेस नेताओं से जुड़े कई पुराने विवादों का जिक्र किया। उन्होंने मंडी से बीजेपी सांसद कंगना रनौत का मामला उठाते हुए कहा कि जब उन्हें लोकसभा चुनाव का टिकट मिला था, तब कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत के सोशल मीडिया अकाउंट से कथित तौर पर अभद्र टिप्पणी की गई थी। बांसुरी ने दावा किया कि उस समय राहुल गांधी ने इस मामले पर चुप्पी साधे रखी और उन्होंने खुद शिकायत की थी।
उन्होंने अप्रैल 2024 में कैथल की एक रैली में बीजेपी सांसद हेमा मालिनी को लेकर कांग्रेस नेता रणदीप सुरजेवाला की कथित अशोभनीय टिप्पणी का भी उल्लेख किया। बांसुरी के अनुसार, इस मामले में भी राहुल गांधी की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई।
द्रौपदी मुर्मू को लेकर टिप्पणी का भी जिक्रबीजेपी सांसद ने कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी की तत्कालीन राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को लेकर की गई ‘राष्ट्रपत्नी’ वाली टिप्पणी को भी अपने तर्क का हिस्सा बनाया। बांसुरी का आरोप है कि ऐसे मामलों में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं दी।
बांसुरी ने राहुल गांधी के हालिया बयानों और एक महिला विदेशी प्रधानमंत्री से जुड़े कथित मजाक का भी उल्लेख किया। उन्होंने सवाल उठाया कि महिलाओं के सम्मान और पितृसत्ता का मुद्दा धर्म से जुड़े मामलों में अलग तरीके से क्यों देखा जाता है।
शाह बानो और तीन तलाक का भी उठाया सवालबांसुरी स्वराज ने अपने बयान में शाह बानो मामले का भी जिक्र किया। उन्होंने सवाल किया कि यदि कांग्रेस वास्तव में पितृसत्ता के खिलाफ है, तो सुप्रीम कोर्ट के शाह बानो को गुज़ारा-भत्ता देने के फैसले को पलटने के लिए तत्कालीन कांग्रेस सरकार कानून क्यों लेकर आई थी।
उन्होंने तीन तलाक कानून को लेकर भी कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाया। बांसुरी ने पूछा कि यदि महिलाओं के अधिकारों और पितृसत्ता को खत्म करने की बात की जाती है, तो तीन तलाक कानून का विरोध क्यों किया गया।
इस तरह बीजेपी सांसद ने ‘पितृसत्ता खत्म करो’ के नारे को कांग्रेस की पिछली राजनीति और उसके नेताओं से जुड़े विवादों से जोड़ते हुए राहुल गांधी से कई सवाल किए हैं। उनके बयान में लगाए गए आरोपों के जवाब के संबंध में संदर्भ सामग्री में कांग्रेस या राहुल गांधी की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।